sn vyas
697 views 1 months ago
#मंदिर दर्शन तुंगनाथ – आखिर क्यों आज भी यहाँ महादेव की भुजाओं की पूजा होती है...? आइए जानते हैं... द्वापर युग में महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। कुरुक्षेत्र के मैदान में लाखों शव बिछे थे। पांडव युद्ध तो जीत गए थे, लेकिन उनके हृदयों में भारी आत्मग्लानि और दुख था। अपने ही भाइयों, गुरुजनों और असंख्य योद्धाओं के वध का बोझ उन्हें भीतर ही भीतर कचोट रहा था। इस महापाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने राजपाठ छोड़ दिया और भगवान शिव के दर्शन हेतु हस्तिनापुर से काशी की ओर प्रस्थान किया। जब शिव जी को ज्ञात हुआ कि पांडव उनके दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो वे उनसे रुष्ट हो गए। उनका मानना था कि जो अपने ही कुल के विनाश का कारण बने हैं, उन्हें इतनी सहजता से पापमुक्त नहीं किया जा सकता। इसी कारण शिव जी काशी से अंतर्ध्यान होकर उत्तराखंड के गुप्तकाशी क्षेत्र में चले गए। लेकिन पांडव भी हार मानने वाले नहीं थे। वे भोलेनाथ की खोज करते-करते हिमालय की दुर्गम घाटियों, घने वनों और ऊँचे पर्वतों तक पहुँच गए। अंततः भगवान शिव ने एक विशाल महिष (बैल) का रूप धारण कर वहाँ चर रहे पशुओं के झुंड में स्वयं को छिपा लिया। महिष रूपी महादेव को पहचानना सरल नहीं था। तभी महाबली भीम ने अपनी बुद्धि और पराक्रम का परिचय दिया। वे दो विशाल पर्वतों पर अपने पैर फैलाकर खड़े हो गए। चरवाहे अपने-अपने पशुओं को उनके पैरों के नीचे से निकालने लगे। सभी पशु निकल गए... लेकिन एक महिष वहीं रुक गया। भीम समझ गए कि यही उनके आराध्य शिव जी हैं। जैसे ही वे उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े, महादेव भूमि में अंतर्ध्यान होने लगे। भीम ने फुर्ती दिखाते हुए महिष की पीठ का त्रिकोणाकार भाग कसकर पकड़ लिया। पांडवों के अटूट समर्पण, सच्चे पश्चाताप और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनके पापों से मुक्ति प्रदान की। कथा के अनुसार, भूमि में अंतर्ध्यान होने के बाद शिव जी के शरीर के विभिन्न अंग हिमालय के पाँच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें आज पंचकेदार के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि महिष रूपी शिव जी की भुजाएँ जिस पवित्र पर्वत पर प्रकट हुईं, वही स्थान आगे चलकर "तुंगनाथ" कहलाया। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 📚 श्रेणी : प्राचीन शैव कथा एवं पंचकेदार। 📚 स्रोत : स्कंद पुराण (केदारखंड) एवं महाभारत। 📍 स्थान : तुंगनाथ पर्वत (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड)। 📝 विशेष : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित तुंगनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर (12,073 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। इसे विश्व के सबसे ऊँचाई पर स्थित प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण मूल रूप से पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कराया था। 📚🎨 प्रस्तुत चित्र केवल भावात्मक एवं कलात्मक प्रस्तुति है। कथा शास्त्रीय ग्रंथों एवं प्राचीन परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न परंपराओं में विवरणों में भिन्नता संभव है। चित्र का उद्देश्य कथा का दृश्यात्मक अनुभव कराना है, न कि वास्तविक स्वरूप का सटीक चित्रण। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ || हर हर महादेव : जय श्री महाकाल || 🕉️🔱🚩 🙏“हर हर महादेव”🙏
13 shares

More like this