sn vyas
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#👉 Sunday Thoughts #🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️ #ॐ सूर्याय नमः 🙏💖 शुभ रविवार 💖💖 प्रातः अभिनंदन 🙏🙏💖💖🌹🌹 सूर्यं सुन्दरलोकनाथममृतं वेदान्तसारं शिवं ज्ञानब्रह्ममयं सुरेशममलं लोकैकचित्रस्वयम् । इन्द्रादित्यनराधिपसुरगुरुं त्रैलोक्यचूडामणिं *ब्रह्मविष्णुशिवस्वरूपहृदयं वन्दे सदा भास्करम् ॥ [ `यह सूर्याष्टक स्तोत्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध मंत्र है , जिसका वर्णन मुख्य रूप से साम्भ पुराण एवं भविष्य पुराण में प्राप्त होता है` ] `अर्थात 👉🏻 मैं उन भास्कर ( भगवान सूर्य ) को सदैव वंदन करता हूँ , जो सुंदर लोकों के स्वामी हैं , अमृतस्वरूप हैं ( मृत्यु से परे हैं ) ; वेदांत ( उपनिषदों ) का सार हैं तथा कल्याणकारी ( शिव ) हैं । वे ज्ञान औऱ ब्रह्म के स्वरूप ( भंडार ) हैं , देवताओं के ईश्वर हैं , निर्मल हैं एवं इस संसार के एकमात्र अद्भुत चित्र स्वयं ही हैं । वे इंद्र , आदित्य ( देवताओं ) , मनुष्यों के राजा तथा देवगुरु ( बृहस्पति ) के भी स्वामी हैं ; तीनों लोकों के मुकुटमणि हैं औऱ जिनके हृदय में ब्रह्मा , विष्णु एवं शिव— तीनों का स्वरूप समाहित हैं ।` `ॐ भास्कराय नमः🌞` `🌸 श्लोक का पद–पद अर्थ 🌸` `१.` *सुन्दरलोकनाथम्* `👉🏻 सुंदर लोकों के स्वामी हैं सूर्यदेव` `२.` *अमृतं वेदान्तसारं शिवं* `👉🏻 अमृतस्वरूप , वेदान्त के सार एवं कल्याणकारी हैं` `३.` *ज्ञानब्रह्ममयं सुरेशम्* `👉🏻 ज्ञान स्वरूप ब्रह्म हैं तथा देवों के ईश्वर हैं` `४.` *लोकैकचित्रस्वयम्* `👉🏻 संपूर्ण लोकों के अद्भुत चित्रकार स्वयं हैं` `५.` *इन्द्रादित्यनराधिपसुरगुरुम्* `👉🏻 इन्द्र , आदित्य , राजा औऱ देवगुरुओं के भी गुरु हैं` `६.` *त्रैलोक्यचूडामणिम्* `👉🏻 तीनों लोकों के शिरोमणि हैं` `७.` *ब्रह्मविष्णुशिवस्वरूपहृदयम्*`👉🏻 जिनके हृदय में ब्रह्मा , विष्णु , शिव तीनों का स्वरूप है` `८.√ *सदा भास्करम् वन्दे*`👉🏻 ऐसे सदैव प्रकाशमान भास्कर को मैं प्रणाम करता हूँ ।` `🪔 शास्त्र का भाव –` `इस एक श्लोक में सूर्य को "त्रिदेवात्मक" कहा गया है 👉🏻` `ब्रह्मा – सृष्टिकर्ता , विष्णु – पालनकर्ता ,एवं शिव – संहारकर्ता । तीनों कार्य सूर्य से ही चलते हैं ।` `😊🪷 इसीलिए सूर्य को "प्रत्यक्ष देव" कहा गया । तथा कोई अन्य देव मनुष्यों हेतु दृष्टिगोचर नहीं है , किन्तु सूर्य हमें नित्य दर्शन देते हैं ।` `🌺 पाठ का फल` `प्रात – इस श्लोक का नित्यप्रतिदिन ३ बार पाठ करने से 👉🏻` `१. बुद्धि में "ज्ञानब्रह्ममय" तेज आता है ।` `२. शरीर में "अमृत" जैसी आरोग्यता की प्राप्ति होती है ।` `३. जीवन में "त्रैलोक्यचूडामणि" सदृश्य मान-सम्मान प्राप्त होता है ।` `☝🏻 अतैव निष्कर्षत: – सूर्य केवल ग्रह नहीं , अपितु वो ☆वेदान्त का सार हैं , ☆ज्ञान के सूर्य हैं , औऱ ☆ब्रह्म–☆विष्णु–☆शिव का एकीभूत स्वरूप हैं ।` *ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः🌞* *आदित्याय नमः🙏🏻🚩* `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`
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