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2122 2122
गर मेरी ही सब खता है
तू नज़र से क्यूँ गिरा है
जो लिखा किस्मत में तेरी
वो हि तो तुम को मिला है
दर्द है जो सर से पां तक
वो मुहब्बत का सिला है
ना रहा अपना भी कोई
अब तो किस्मत भी खफा है
अंधेरों ने इल्तजा की
तब तो दिल मेरा जला है
दूरियाँ कुछ बढ़ गईं पर
प्यार कुछ अब भी बचा है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
26/6/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी