-
672 views 2 days ago
2122 2122 गर मेरी ही सब खता है तू नज़र से क्यूँ गिरा है जो लिखा किस्मत में तेरी वो हि तो तुम को मिला है दर्द है जो सर से पां तक वो मुहब्बत का सिला है ना रहा अपना भी कोई अब तो किस्मत भी खफा है अंधेरों ने इल्तजा की तब तो दिल मेरा जला है दूरियाँ कुछ बढ़ गईं पर प्यार कुछ अब भी बचा है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 26/6/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी
12 likes
9 shares

More like this