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22 22 22 22 बोलने का जिगर रखते है सच का पक्ष निडर रखते है तल्ख है लहजा शमो सहर प्यार दिल मे मगर रखते है रास्ते प्यार के चुने नहीं खिलती मगर नज़र रखते है नाम कोई दिलपे लिखा नही राहें इश्क का डर रखते है जब से नवाजा खुदा ने हमे तब से झुका सर रखते है भूली न राहें भलाई की जान हथेली पर रखते है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 11/6/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी
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