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कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ") - Author on ShareChat
कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ")
1K views • 23 days ago
प्रस्तुत है एक लघुकथा.. #story #short story #kahani #📚कविता-कहानी संग्रह #किस्से-कहानी
लघु कथा एक मुनि जंगल में मुनि और बाघ पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या रहे थे। O೦oo यारहेश्वना एक बार एक मुनि जंगल पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या तभी सामने से बाघ आ जाता है तभी सामने से बाघ आ जाता है। वह मुनि पर आक्रमण करता है वह मुनि पर आक्रमण करता है। वे उस पर।@ बिना एक भी क्षण गवाएं बिना एक भी क्षण गवाएं वे उस पर पानी छिड़क कर छिड़क कर मंत्र उच्चारण करते हैं | मंत्र उच्चारण करते हैं। पानी जिससे वह बाघ तोता बन जाता है। वे उसे अपने साथ लेकर कुटिया में Di मानधना चले जाते हैं । तोते को रोज धार्मिक जिससे वह बाघ पाठ पढ़ाते हैं और पौरांणिक कथा 8|  सुनाते | तोता बन जाता है। वे उसे अपने साथ जिससे वह भी धार्मिक बातें लेकर कुटिया में सीख जाता है। चले जाते हैं। मृत्यु होने पर उस तोते को मुक्ि मिल जाती है और वह आवागमन के चक्कर से छूटकर ' ग 'है। प्ानधना माक्ष प्राप्त करता Aala: तोते को रोज धामिक पाठ पढ़ाते हं और पौराणिक कथा सूनाते हें। जिसस धामिक बाते सीख जाता हे d೯ 1ii ! मृत्यु होने पर उस तोते को मुकि मिल जाती कैसी भी परिस्थिति आ जाए, और वह आवागमन के चककर से छूटकर हमेशा संयम और समझदारी मोक्ष प्राप्त करता है। से काम लेना चाहिए। सुमित मानधना  गौरव ( मंचीय कवि | हास्य कलाकार सूरत (गुजरात ) पसंद आए तो फॉलो करें, लाइक, कमेंट, शेयर करें लघु कथा एक मुनि जंगल में मुनि और बाघ पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या रहे थे। O೦oo यारहेश्वना एक बार एक मुनि जंगल पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या तभी सामने से बाघ आ जाता है तभी सामने से बाघ आ जाता है। वह मुनि पर आक्रमण करता है वह मुनि पर आक्रमण करता है। वे उस पर।@ बिना एक भी क्षण गवाएं बिना एक भी क्षण गवाएं वे उस पर पानी छिड़क कर छिड़क कर मंत्र उच्चारण करते हैं | मंत्र उच्चारण करते हैं। पानी जिससे वह बाघ तोता बन जाता है। वे उसे अपने साथ लेकर कुटिया में Di मानधना चले जाते हैं । तोते को रोज धार्मिक जिससे वह बाघ पाठ पढ़ाते हैं और पौरांणिक कथा 8|  सुनाते | तोता बन जाता है। वे उसे अपने साथ जिससे वह भी धार्मिक बातें लेकर कुटिया में सीख जाता है। चले जाते हैं। मृत्यु होने पर उस तोते को मुक्ि मिल जाती है और वह आवागमन के चक्कर से छूटकर ' ग 'है। प्ानधना माक्ष प्राप्त करता Aala: तोते को रोज धामिक पाठ पढ़ाते हं और पौराणिक कथा सूनाते हें। जिसस धामिक बाते सीख जाता हे d೯ 1ii ! मृत्यु होने पर उस तोते को मुकि मिल जाती कैसी भी परिस्थिति आ जाए, और वह आवागमन के चककर से छूटकर हमेशा संयम और समझदारी मोक्ष प्राप्त करता है। से काम लेना चाहिए। सुमित मानधना  गौरव ( मंचीय कवि | हास्य कलाकार सूरत (गुजरात ) पसंद आए तो फॉलो करें, लाइक, कमेंट, शेयर करें
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  • fatima razviya - Author on ShareChat
    fatima razviya
    #freephilistin #gaza #share #your #story @fatima_razviya
    freephilistin, gaza
    17
    23
  • @ sunita bairragi - Author on ShareChat
    @ sunita bairragi💕
    #किस्से-कहानी #हिंदी कहानी #कहानी #📚कविता-कहानी संग्रह #मजेदार कहानी
    की दवा गुस्से एक स्त्री थी। उसे बात-बात पर गुस्सा आ जाता ٩ ؟٢ उसकी इस आदत परिवार परेशान থা उसको वजह से परिवार में कलह का থা माहौल बना रहता था। एक दिन उस महिला के दरवाजे एक साधु आया महिला ने साधु को अपनी समस्या बताई उसने कहा, महाराज ! मुझे बहुत जल्दी गु़स्सा आ जाता है। मैं चाहकर भी अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाती | साधु ने अपने झोले से कोई उपाय बताइए एक दवा की शीशी निकालकर उसे दी और कि जब भी गुस्सा आए, इसमें से चार बताया बूंद दवा अपनी जीभ पर डाल लेना १० मिनट तक दवा को मुॅह में ही रखना है " १० मिनट तक मुॅह नहीं खोलना है | नहीं तो दवा असर नहीं करेगी | महिला ने साधु के बताए अनुसार दवा का प्रयोग शुरू किया  सात दिन में ही उसको वह साधु फिर उसके दरवाजे आया तो गुस्सा करने की आदत छूट गई। सात दिन बाद महिला उसके पैरों में गिर पड़ी | उसने कहा, महाराज आपकी दवा से मेरा क्रोध गायब हो गया। अब मुझे गुस्सा नहीं आता और मेरे परिवार में शांति का माहौल रहता तब साधु महाराज ने उसे बताया कि वह कोई दवा नहीं थी। उस शीशी में 8 गुस्से का इलाज केवल चुप रहकर ही किया जा सकता है केवल पानी भरा था| क्योंकि गुस्से में व्यक्ति उल्टा सीधा बोलता है, जिससे विवाद बढ़ता है। इसलिए, क्रोध का इलाज केवल मौन है। की दवा गुस्से एक स्त्री थी। उसे बात-बात पर गुस्सा आ जाता ٩ ؟٢ उसकी इस आदत परिवार परेशान থা उसको वजह से परिवार में कलह का থা माहौल बना रहता था। एक दिन उस महिला के दरवाजे एक साधु आया महिला ने साधु को अपनी समस्या बताई उसने कहा, महाराज ! मुझे बहुत जल्दी गु़स्सा आ जाता है। मैं चाहकर भी अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाती | साधु ने अपने झोले से कोई उपाय बताइए एक दवा की शीशी निकालकर उसे दी और कि जब भी गुस्सा आए, इसमें से चार बताया बूंद दवा अपनी जीभ पर डाल लेना १० मिनट तक दवा को मुॅह में ही रखना है " १० मिनट तक मुॅह नहीं खोलना है | नहीं तो दवा असर नहीं करेगी | महिला ने साधु के बताए अनुसार दवा का प्रयोग शुरू किया  सात दिन में ही उसको वह साधु फिर उसके दरवाजे आया तो गुस्सा करने की आदत छूट गई। सात दिन बाद महिला उसके पैरों में गिर पड़ी | उसने कहा, महाराज आपकी दवा से मेरा क्रोध गायब हो गया। अब मुझे गुस्सा नहीं आता और मेरे परिवार में शांति का माहौल रहता तब साधु महाराज ने उसे बताया कि वह कोई दवा नहीं थी। उस शीशी में 8 गुस्से का इलाज केवल चुप रहकर ही किया जा सकता है केवल पानी भरा था| क्योंकि गुस्से में व्यक्ति उल्टा सीधा बोलता है, जिससे विवाद बढ़ता है। इसलिए, क्रोध का इलाज केवल मौन है।
    24
    44
  • Nish's Infinite Tales - Author on ShareChat
    Nish's Infinite Tales
    Kabhi mat kholna:us purani diary ka khaufnaak sach (part-3) Grand Final 😱💔📖#horror #story #trending #viral
    Kabhi mat kholna:us purani diary ka khaufnaak sach (part-3) Grand Final, horror
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    14
  • fatima razviya - Author on ShareChat
    fatima razviya
    खूबसूरत इंसान कौन है? #share #your #story
    खूबसूरत इंसान कौन है?, share
    33
    42
  • ༒︎@Mr_Sahban_Sk༒︎ - Author on ShareChat
    👑༒︎@Mr_Sahban_Sk༒︎👑
    Khuda ko hamne be parda Usi ki Zaat Main Dekha... #islamic ##STATUS #story ##viral
    Khuda ko hamne be parda Usi ki Zaat Main Dekha..., islamic
    14
    58
  • @ sunita bairragi - Author on ShareChat
    @ sunita bairragi💕
    #मजेदार कहानी #📚कविता-कहानी संग्रह #कहानी #हिंदी कहानी #किस्से-कहानी
    निंदा पर ध्यान न दें में एक संत प्राचीन clcd गांव जाने के क्रम নুম अपने एक शिष्य के साथ एक गांव में कुछ दिनों को गांव के लोग लिए रुके संत के पास अपनी समस्याएं लेकर   पहुंचने लगे।   संत बहुत विद्वान थे।वे अपनी बुद्धि से सभी परेशानियों को दूर करने रास्ता बता देते थे कुछ हो दिनों में संत की प्रसिद्धि  पूरे  क्षेत्र में  फैल गयी। संत रोज प्रवचन भी देते थे। उनके उपदेश सुनने के लिए गांव में दूर-दूर से लोग आने लगे। संत की बढ़ती प्रसिद्धि को देखकर गांव पुजारी को जलन होने लगी। वह सोचने लगा कि इस तरह तो उसके भक्त एक संत के पास पहुंचने लगेंगे | पुजारी जलन की वजह से संत को शत्रु मानने लगा था पुजारी ने संत की छवि खराब करना शुरू कर दिया। वह गांव के लोगों को कहन लगा किये संत पाखंडी है और लोगों मूर्ख बना रहा है। पुजारी के कुछ साथी साथ दे रहे थे।एक दिन संत के शिष्य ने गांव में अपने गुरु इस काम में उसका बुराई सुनी तो वह क्रोधित हो गया।  शिष्य तुरंत ही गुरु के पास पहुंचा और गांव में हो रही बुराई कै बारे में बताया| संत ने शिष्य की बातें सुनी और कहा कि हमें इन बातों पर ध्यान नही देना चाहिए। अगर हम उस पंडित से वाद विवाद करेंगे तो भी ये बातें चलती रहेंगी। जिस तरह हाथी कुत्ते भौँकते हैं, लेकिन हाथी अपनी मस्त चाल में चलते रहता है।ठोक उसी तरह भी ऐसी बुराइयों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अपने काम में मन लगाना चाहिए।  संदेश  जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति आपके पक्ष में हो। समाज में कुछ लोग हमारे यह होते हैं तो कुछ विपक्ष में भी होते हैं । हमसे मतभेद रखने बाले लोग  पक्ष में दूसरों  सामने हमारी बुराई करते हैं और वे हमारी   परेशानियां बढ़ाने रहते हैं। ऐसी स्थिति में हमें निदाओं से विचलित हुए बिना अपना काम करते रहना चाहिए। निंदा पर ध्यान न दें में एक संत प्राचीन clcd गांव जाने के क्रम নুম अपने एक शिष्य के साथ एक गांव में कुछ दिनों को गांव के लोग लिए रुके संत के पास अपनी समस्याएं लेकर   पहुंचने लगे।   संत बहुत विद्वान थे।वे अपनी बुद्धि से सभी परेशानियों को दूर करने रास्ता बता देते थे कुछ हो दिनों में संत की प्रसिद्धि  पूरे  क्षेत्र में  फैल गयी। संत रोज प्रवचन भी देते थे। उनके उपदेश सुनने के लिए गांव में दूर-दूर से लोग आने लगे। संत की बढ़ती प्रसिद्धि को देखकर गांव पुजारी को जलन होने लगी। वह सोचने लगा कि इस तरह तो उसके भक्त एक संत के पास पहुंचने लगेंगे | पुजारी जलन की वजह से संत को शत्रु मानने लगा था पुजारी ने संत की छवि खराब करना शुरू कर दिया। वह गांव के लोगों को कहन लगा किये संत पाखंडी है और लोगों मूर्ख बना रहा है। पुजारी के कुछ साथी साथ दे रहे थे।एक दिन संत के शिष्य ने गांव में अपने गुरु इस काम में उसका बुराई सुनी तो वह क्रोधित हो गया।  शिष्य तुरंत ही गुरु के पास पहुंचा और गांव में हो रही बुराई कै बारे में बताया| संत ने शिष्य की बातें सुनी और कहा कि हमें इन बातों पर ध्यान नही देना चाहिए। अगर हम उस पंडित से वाद विवाद करेंगे तो भी ये बातें चलती रहेंगी। जिस तरह हाथी कुत्ते भौँकते हैं, लेकिन हाथी अपनी मस्त चाल में चलते रहता है।ठोक उसी तरह भी ऐसी बुराइयों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अपने काम में मन लगाना चाहिए।  संदेश  जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति आपके पक्ष में हो। समाज में कुछ लोग हमारे यह होते हैं तो कुछ विपक्ष में भी होते हैं । हमसे मतभेद रखने बाले लोग  पक्ष में दूसरों  सामने हमारी बुराई करते हैं और वे हमारी   परेशानियां बढ़ाने रहते हैं। ऐसी स्थिति में हमें निदाओं से विचलित हुए बिना अपना काम करते रहना चाहिए।
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  • ༺⃝☜્᭄͜⟶ - Author on ShareChat
    ༺⃝🦅𝕚𝕞𝕣𝕒𝕟✯𝕜𝕚𝕟𝕘☜✿્᭄͜͡🖤⟶
    Din ki baten 🤲🏻 #muslim #dua #islam #islami #story
    Din ki baten, muslim
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    104
  • Rishitha - Author on ShareChat
    Rishitha
    #story
    story
    17
    29
  • Nish's Infinite Tales - Author on ShareChat
    Nish's Infinite Tales
    Aadaton ki taaqat: sirf 1% badlav! #MOTIVATIONAL #inspiration #viral #story #shorts
    Aadaton ki taaqat: sirf 1% badlav!, MOTIVATIONAL
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