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2122 2122 2122 212 पिघलेगा जब दर्द -ऐ -दिल तो दवा हो जाएगा आग में तपकर ऐ बंदे तू खरा हो जाएगा [आँख को पत्थर बना कब तक जिएगा तू ऐसे फंस के झूठे दम्भ में इक दिन फना हो जाएगा आये थे तुम हाथ खाली हाथ खाली जाना है जोड़ता है तू यहाँ पर जो धुआँ हो जाएगा वक्त जब लेगा परीछा बच न पायेगा तु भी देखना तू मिल के मिट्टी में धरा हो जाएगा साँसे कायम है खुदा के दम पे ही सबकी यहाँ हट गया जो हाथ उस का तो मरा हो जाएगा बन्द पलको पे बिखर जाएंगे सपने टूट कर पढ़ सके ना कोई जो वो फलसफा हो जाएगा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 24/6/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी
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