sn vyas
168 views • 5 hours ago
स्वयं श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि..
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙
हरि हैं हर के रूप में, हर हैं हरि के प्राण।
जो दोनों में भेद करे, सोई मूढ़ अज्ञान।।
भावार्थ: भगवान कृष्ण (हरि) और महादेव (हर) एक ही हैं। महादेव कृष्ण के प्राण हैं और कृष्ण महादेव के। जो अज्ञानी इनमें अंतर समझता है, वह जीवन के परम सत्य से दूर रहता है।
भक्ति सार अद्वैत भाव: सच्ची भक्ति वही है जो ईश्वर को हर रूप में देख सके। शिव और विष्णु में अंतर देखना आध्यात्मिक मार्ग में सबसे बड़ा अवरोध है।समदृष्टि की सीख: जब तक मन में ऊंच-नीच या संप्रदायों का भेद रहेगा, तब तक वास्तविक ज्ञान (ईश्वर) की प्राप्ति नहीं हो सकती।मन की शुद्धि: यह दोहा भक्तों को कट्टरता छोड़कर शुद्ध, सरल और सर्वव्यापी प्रेम से भक्ति करने की प्रेरणा देता है।
🕉🙏जय श्रीकृष्ण हर हर महादेव!!!🙏🔱