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सुशील मेहता - Author on ShareChat
सुशील मेहता
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दोहा बुल्लेशाह #संतो की रचनायें
(( बुल्लया कसूर बेदस्तूर, ओथे जाणा बणया ज़रूर | ना कोई पुंन दान है, ना कोई लाग दस्तूर ।। बुल्लेशाह 11 (( बुल्लया कसूर बेदस्तूर, ओथे जाणा बणया ज़रूर | ना कोई पुंन दान है, ना कोई लाग दस्तूर ।। बुल्लेशाह 11
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    चौपाई संत कबीर #संतो की रचनायें
    "aluIsే" भरमि भरमि मूआ संसारा बिरले काहू तंतु बिचारः या जग में बहु गरूवा भयेऊ स्वर्गे आसा नरकहि गयेऊ মন নীক্কা सबै सियान कृतिम औगुन ते नहिं साहेब चीन्ह जो कहते जिव भौजल पापा जिव उन नाहिं उबारा एको 1 बूड़ि मरे ते भौजल माहीं आतम ज्ञान बिचारे नाहीं राम कहत मूआ संसारा आतम राम न काहू बिचारः बूझे सो जे त्रिभुवन सूझै गहिरी बानी बिरला बूझै (संत कबीर दास) "aluIsే" भरमि भरमि मूआ संसारा बिरले काहू तंतु बिचारः या जग में बहु गरूवा भयेऊ स्वर्गे आसा नरकहि गयेऊ মন নীক্কা सबै सियान कृतिम औगुन ते नहिं साहेब चीन्ह जो कहते जिव भौजल पापा जिव उन नाहिं उबारा एको 1 बूड़ि मरे ते भौजल माहीं आतम ज्ञान बिचारे नाहीं राम कहत मूआ संसारा आतम राम न काहू बिचारः बूझे सो जे त्रिभुवन सूझै गहिरी बानी बिरला बूझै (संत कबीर दास)
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    चौपाई सहजो बाई #संतो की रचनायें
    @( चौपाई ऐसों का दर्शन नहिं लीजै चर्चा बात गोष्टि नहिं कीजै उनका संग करै जो कोई विमुख निगुरा नींदक होई गुरु दोषी की गति मति गाऊँ अपने मन हीं कूँ समझाऊँ उनकी चौरासी नहिं छूटै काल जोरा लूटै जाल यम फिर फिर योनी संकट आवें गर्भवास में बहु दुख पावै जग में पात बगूला जैसे जीवत प्रेम निशाचर ऐसे मन मैला तनु सदा उदासी गल में डिंभ कपट की फाँसी 'মমতী' নিনন भाजै नाम दूरहि लेत मम रसना लाजै सहजोबाई ~((9622- @( चौपाई ऐसों का दर्शन नहिं लीजै चर्चा बात गोष्टि नहिं कीजै उनका संग करै जो कोई विमुख निगुरा नींदक होई गुरु दोषी की गति मति गाऊँ अपने मन हीं कूँ समझाऊँ उनकी चौरासी नहिं छूटै काल जोरा लूटै जाल यम फिर फिर योनी संकट आवें गर्भवास में बहु दुख पावै जग में पात बगूला जैसे जीवत प्रेम निशाचर ऐसे मन मैला तनु सदा उदासी गल में डिंभ कपट की फाँसी 'মমতী' নিনন भाजै नाम दूरहि लेत मम रसना लाजै सहजोबाई ~((9622-
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    कुण्डली संत गंगादास #संतो की रचनायें
    'कुण्डली" माला फेरो स्वास की॰ जपो अजप्पा जाप | सोहं सोहं सुने से, कटते हैं सब qIq II कटते हैं सब पाप जोग सरमें कर मंजन | छः चक्कर ले शोध अंत पावें मनरंजन ।। गंगादास परकास होय खुलतेई घटन्ताला मनो मेरा कहा, भजो स्वासों की माला ।। (संत गंगादास) 'कुण्डली" माला फेरो स्वास की॰ जपो अजप्पा जाप | सोहं सोहं सुने से, कटते हैं सब qIq II कटते हैं सब पाप जोग सरमें कर मंजन | छः चक्कर ले शोध अंत पावें मनरंजन ।। गंगादास परकास होय खुलतेई घटन्ताला मनो मेरा कहा, भजो स्वासों की माला ।। (संत गंगादास)
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    कुण्डली गिरधर कविराय #संतो की रचनायें
    "कुण्डली" राजा के दरबार में॰ जैये समया पाय। साईं तहाँ न बैठिये, जहँ कोउ देय 3074|| जहँ कोउ देय उठाय , बोल अनबोले रहिये। हँसिये ना हहराय, बात पूछेते कहिये।। कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा| अति आतुर नहिं होय बहुरि अनखैहै राजा।l गिरधर कविराय) "कुण्डली" राजा के दरबार में॰ जैये समया पाय। साईं तहाँ न बैठिये, जहँ कोउ देय 3074|| जहँ कोउ देय उठाय , बोल अनबोले रहिये। हँसिये ना हहराय, बात पूछेते कहिये।। कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा| अति आतुर नहिं होय बहुरि अनखैहै राजा।l गिरधर कविराय)
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    भजन दादू दयाल #संतो की रचनायें
    भजन मेरे मन भैया राम कहौ रे।।टेकI। रामनाम मोहि सहजि सुनावै| उनहिं चरन मन कीन रहौ रे II१ Il रामनाम ले संत सुहावै। कोई कहै सब सीस सहौ रे।।२ II वाहीसों मन जोरे राखौ। नीकै रासि लिये निबहौ रे।I३ II कहत सुनत तेरौ कछू न जावे। पाप निछेदन सोई लहौ रे।I४ II নানু নযাল भजन मेरे मन भैया राम कहौ रे।।टेकI। रामनाम मोहि सहजि सुनावै| उनहिं चरन मन कीन रहौ रे II१ Il रामनाम ले संत सुहावै। कोई कहै सब सीस सहौ रे।।२ II वाहीसों मन जोरे राखौ। नीकै रासि लिये निबहौ रे।I३ II कहत सुनत तेरौ कछू न जावे। पाप निछेदन सोई लहौ रे।I४ II নানু নযাল
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    सुशील मेहता
    क़ाफी बाबा #संतो की रचनायें फरीद
    "क़ाफी" बिन गुर निस दिन फिराँ नी माए फिर के हावै अउगण्यारी नूँ क्यूँ कर कंत वसावै अउगण्यारी नूँ क्यूँ कंत वसावै मैं गुन कोई नाही सहुरे जासां ताँ पछुतासां আাতামা মাৎ নাকী मेरा साहब चंगा गुनी देहन्दा कहे फ़रीदे सुनावे बिन गुर निस दिन फिराँ नी माए फिर के हावै (फरीद) "क़ाफी" बिन गुर निस दिन फिराँ नी माए फिर के हावै अउगण्यारी नूँ क्यूँ कर कंत वसावै अउगण्यारी नूँ क्यूँ कंत वसावै मैं गुन कोई नाही सहुरे जासां ताँ पछुतासां আাতামা মাৎ নাকী मेरा साहब चंगा गुनी देहन्दा कहे फ़रीदे सुनावे बिन गुर निस दिन फिराँ नी माए फिर के हावै (फरीद)
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    संत वाणी सूरदास #संतो की रचनायें
    संत वाणी दीपक पीर न जानई, पावक परत TemHl I तनु तो तिहि ज्वाला जरयो, चित न भयो रस भंग ।l भावार्थः पतंगा दिये की लौ पर जलकर भस्म हो जाता है पर दीपक इसकी पीड़ा को नहीं जानता। पतंग का शरीर तो दीपक की ज्वाला में जलकर भस्म हो जाता है पर इसका प्रेम नष्ट नहीं होता। (सूरदास) संत वाणी दीपक पीर न जानई, पावक परत TemHl I तनु तो तिहि ज्वाला जरयो, चित न भयो रस भंग ।l भावार्थः पतंगा दिये की लौ पर जलकर भस्म हो जाता है पर दीपक इसकी पीड़ा को नहीं जानता। पतंग का शरीर तो दीपक की ज्वाला में जलकर भस्म हो जाता है पर इसका प्रेम नष्ट नहीं होता। (सूरदास)
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    सुशील मेहता
    संत वाणी #संतो की रचनायें
    संत वाणी रैदास ' सोई सूरा भला, जो लरै के हेत। धरम अंग-अंग कटि भुंइ गिरै, तउ அ3 <II भावार्थः रैदास ' कहते हैं कि वही शूरवीर श्रेष्ठ होता है जो धर्म fag ' বী ২৪া ৯ লভ্ন-লভ্ন अपने अंग ्प्रत्यंग कटकर युद्धभूमि में गिर जाने पर भी युद्धभूमि से पीठ नहीं दिखाता| रैदास संत वाणी रैदास ' सोई सूरा भला, जो लरै के हेत। धरम अंग-अंग कटि भुंइ गिरै, तउ அ3 <II भावार्थः रैदास ' कहते हैं कि वही शूरवीर श्रेष्ठ होता है जो धर्म fag ' বী ২৪া ৯ লভ্ন-লভ্ন अपने अंग ्प्रत्यंग कटकर युद्धभूमि में गिर जाने पर भी युद्धभूमि से पीठ नहीं दिखाता| रैदास
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    सुशील मेहता
    सबद यारी साहिब #संतो की रचनायें
    qG" दोउ मूँदि के नैन अंदर देखा, नहिं चाँद सुरज दिन राति है रै। रोसन समा बिनु तेल बाती, उस जोति सों सबै सिफ़ाति है रे।I गोता मारि देखो आदम , कोउ अवर नाहिं संग साथि है रे। यारी कहै तहकीक किया, तू मलकुलूमौत की जाति है रै।l (यारी साहब) Motivational VideosApp Want qG" दोउ मूँदि के नैन अंदर देखा, नहिं चाँद सुरज दिन राति है रै। रोसन समा बिनु तेल बाती, उस जोति सों सबै सिफ़ाति है रे।I गोता मारि देखो आदम , कोउ अवर नाहिं संग साथि है रे। यारी कहै तहकीक किया, तू मलकुलूमौत की जाति है रै।l (यारी साहब) Motivational VideosApp Want
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