sn vyas
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#भक्ति भावना 🍁*..हम पापी हैं ही नहीं!..*✨ ‼️*सम्पूर्ण पापों का फल भोग कर कल्याण होगा- ऐसी बात नहीं है।* बड़े-बड़े सन्त-महात्मा हुए हैं, वे भगवान्‌ की कृपा से पाप माफ होने से ही हुए हैं। इसलिये 'हम भगवान्‌ के हैं' - ऐसा मान लो । *जब कभी उद्धार होगा, भगवान्‌ की कृपा से ही होगा, पापों की माफी होने से ही होगा।*‼️ 🛐भगवान् का नाम लेते हैं, गंगा स्नान करते हैं, सत्संग करते हैं तो हमारे पाप नहीं रहे, हम शुद्ध हो गये! अगर अपने को अशुद्ध मानते हैं तो नाम का, गंगा स्नान का, सत्संग का, गीता पाठ का तिरस्कार होता है। अगर आप कृपा करके यह बात स्वीकार कर लें तो बहुत ही उत्तम बात है! *अब आगे से सावधान रहो कि हमारे द्वारा कोई पाप, अन्याय न हो जाय।* भगवान्‌ के नाम में, सत्संग में, गंगा स्नान में बहुत विलक्षण शक्ति है। भगवान्‌ की कथा सुनने की मन में आते ही अन्त:करण शुद्ध हो जाता है। *हृदय से स्वीकार कर लो कि हम भगवान् के हैं, हम शुद्ध हैं, हम पापी हैं ही नहीं!* हम भगवान्‌ के हैं—इतना मानने मात्र से अनन्त, अपार शुद्धि आ जायगी।🛐 🧘भगवान्‌ की तरफ वृत्ति जाते ही पाप नष्ट हो जाते हैं। पापों में ठहरने की ताकत नहीं रहती। आप पापों को पकड़ो मत। कोई खराब संकल्प आये, खराब चिन्तन हो तो 'हे नाथ! हे मेरे नाथ!' पुकारो। वह नष्ट हो जायगा ! बस, एक ही बात कि 'हे नाथ! मैं आपको भूलूँ नहीं'।🧘 👩‍❤️‍👩*सत्संग करने वालों के, भजन-ध्यान करने वालों के, भगवान् के भक्तों के दर्शन करने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं!* अच्छे भगवत् प्राप्त सन्तों के दर्शन से पाप नष्ट हो जाते हैं-👩‍❤️‍👩 *'संत दरस जिमि पातक टरई '* (मानस, किष्किन्धा० १७ । ३) । 🙏*राम ! राम !! राम !!!*🙏
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