sn vyas
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#🙏संकष्टी चतुर्थी🪔📿 #शुभ रविवार `॥ श्री ब्रह्म पुराणे एकत्रिंशोऽध्याये , ब्रह्म कृतं श्री सूर्य स्तुतिः सम्पूर्णम् ॥` *आदिदेवोऽसि देवानामैश्वर्याच्च त्वमीश्वरः ।* *आदिकर्ताऽसि भूतानां देवदेवो दिवाकरः ॥१॥* *जीवनः सर्वभूतानां देवगन्धर्वरक्षसाम् ।* *मुनिकिन्नरसिद्धानां तथैवोरगपक्षिणाम् ॥२॥* `अर्थात 👉🏻 हे दिवाकर ! आप देवताओं के आदि देव एवं ऐश्वर्य से ईश्वर हैं । आप समस्त प्राणियों के आदि कर्ता हैं । आप देव , गन्धर्व , राक्षस , मुनि , किन्नर , सिद्ध , सर्प तथा पक्षियों सबके जीवनदाता हैं ।` `भावार्थ 👉🏻 सूर्य ही इस जगत के मूल कारण हैं । उनके बिना कोई भी योनि जीवित नहीं रह सकती ।` *त्रिमूर्ति स्वरूप त्वं ब्रह्मा त्वं महादेवस्त्वं विष्णुस्त्वं प्रजापतिः ।* *वायुरिन्द्रश्च सोमश्च विवस्वान् वरुणस्तथा ॥३॥* *त्वं कालः सृष्टिकर्ता च हर्ता भर्ता तथा प्रभुः ।* *सरितः सागराः शैला विद्युदिन्द्रधनूंषि च ॥४॥* `अर्थात 👉🏻 आप ही ब्रह्मा , आप ही शिव , आप ही विष्णु औऱ प्रजापति हैं । आप ही वायु , इन्द्र , चन्द्रमा , वरुण एवं विवस्वान हैं । आप ही काल हैं , सृष्टि के कर्ता , पालक तथा संहारक हैं । नदी , समुद्र , पर्वत , बिजली , इन्द्रधनुष समस्त आप ही हैं ।` `भावार्थ 👉🏻 सूर्य में ही त्रिदेव औऱ पंचतत्व समाहित हैं । सम्पूर्ण प्रकृति सूर्य से चलायमान है ।` *परमात्म स्वरूप प्रलयः प्रभवश्चैव व्यक्ताव्यक्तः सनातनः ।* *ईश्वरात्परतो विद्या विद्यायाः परतः शिवः ॥५॥* *शिवात्परतरो देवस्त्वमेव परमेश्वरः ।* *सर्वतः पाणिपादान्तः सर्वतोक्षिशिरोमुखः ॥६॥* `अर्थात 👉🏻 आप ही सृष्टि औऱ प्रलय हैं । व्यक्त-अव्यक्त , सनातन हैं । आप ईश्वर से भी परे ज्ञान हैं , ज्ञान से परे शिव हैं , शिव से भी परे परमेश्वर हैं । आपके हाथ-पैर , आंख-सिर-मुख सभी ओर हैं ।` `भावार्थ 👉🏻 सूर्य विराट पुरुष हैं । उनका स्वरूप सर्वव्यापी है ।` *सहस्रांशु स्वरूप सहस्रांशुः सहस्रास्यः सहस्रचरणेक्षणः ।* *भूतादिर्भूर्भुवः स्वश्च महः सत्यं तपो जनः ॥७॥* *प्रदीप्तं दीपनं दिव्यं सर्वलोकप्रकाशकम् ।* *दुर्निरीक्ष्यं सुरेन्द्राणां यद्रूपं तस्य ते नमः ॥८॥* `अर्थात 👉🏻 हे हजार किरणों , हजार मुखों , हजार हाथ-पैरों वाले ! आप ही भूः भुवः स्वः लोक एवं समस्त प्राणियों के आदि हैं । आपका रूप अत्यंत तेजस्वी , दिव्य तथा सभी लोकों को प्रकाशित करने वाला है । देवताओं के लिए भी आपके उस रूप का दर्शन कठिन है ।` `भावार्थ 👉🏻 सूर्य की हजारों किरणें ही जीवन की ऊर्जा हैं । उनका तेज इतना है कि उन्हें सीधे देखना असंभव है ।` *सुरसिद्धगणैर्जुष्टं भृग्वत्रिपुलहादिभिः ।* *स्तुतस्य परमव्यक्तं यद्रूपं तस्य ते नमः ॥९॥* *वेद्यं वेदविदां नित्यं सर्वज्ञानसमन्वितम् ।* *सर्वदेवाधिदेवस्य यद्रूपं तस्य ते नमः ॥१०॥* *विश्वकृद्विश्वभूतं च वैश्वानरसुरार्चितम् ।* *विश्वस्थितमवेद्यं च यद्रूपं तस्य ते नमः ॥११॥* `अर्थात 👉🏻 भृगु , अत्रि , पुलह आदि ऋषि औऱ सिद्धगण जिस परम् अव्यक्त रूप की स्तुति करते हैं , जो वेदों के ज्ञाताओं के लिए जानने योग्य व सर्वज्ञान से युक्त है , जो विश्व का रचयिता , विश्व में स्थित एवं अग्नि तथा देवों से पूजित है – उस रूप को नमस्कार ।` `भावार्थ 👉🏻 सूर्य को वेद औऱ ऋषि भी सम्पूर्णतः नहीं जान पाए । वे ज्ञान के भी देवता हैं ।` *परमात्मा परं यज्ञात्परं वेदात्परं लोकात्परं दिवः ।* *परमात्मेत्यभिख्यातं यद्रूपं तस्य ते नमः ॥१२॥* *अविज्ञेयमनालक्ष्यमध्यानगतमव्ययम् ।* *अनादिनिधनं चैव यद्रूपं तस्य ते नमः ॥१३॥* `अर्थात 👉🏻 जो यज्ञ , वेद , लोक एवं स्वर्ग से भी परे है , जिसे "परमात्मा" कहा जाता है । जो अज्ञेय , अलक्ष्य , ध्यान में स्थित , अविनाशी , अनादि तथा अनंत है – उस रूप को नमस्कार ।` `भावार्थ 👉🏻 सूर्य का सत्य स्वरूप परमब्रह्म है । वह जन्म-मृत्यु से भी परे है ।` *अष्ट नमस्कार नमो नमः कारणकारणाय नमो नमः पापविमोचनाय ।* *नमो नमस्तेऽदितिवन्दिताय नमो नमो रोगविनाशनाय ॥१४॥* *नमो नमः सर्ववरप्रदाय नमो नमः सर्वसुखप्रदाय ।* *नमो नमः सर्वधनप्रदाय नमो नमः सर्वमतिप्रदाय ॥१५॥* `अर्थात 👉🏻 कारणों के भी कारण , पापों से मुक्त करने वाले , अदिति माता द्वारा वंदित , रोगों का नाश करने वाले , सभी वर , सुख , धन तथा उत्तम बुद्धि देने वाले सूर्यदेव को बारंबार नमस्कार ।` `भावार्थ 👉🏻 इस स्तुति से पाप करने से कटते हैं , रोग जाते हैं , औऱ सुख-धन-बुद्धि की प्राप्ति होती है ।` *॥ इति श्रीब्रह्मपुराणे एकत्रिंशोऽध्याये ब्रह्मकृतं सूर्य स्तुतिः सम्पूर्णम् ॥* `ॐ सूर्याय नमः🙏🏻` *ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः☀️* *ॐ आदित्याय नमः🚩* *ॐ दिवाकराय नमः🚩* *ॐ सप्ताश्वाय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्🚩* *हर हर महादेव🔱* *हर हर शङ्कर🚩* *जय जय शङ्कर🚩* `© सर्वाधिकार सुरक्षित। सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄` `#सर्वज्ञ_शङ्कर` `#प्रभात_वंदन` `#सूर्यस्तोत्र` `#वैदिकस्तुति` `#सूर्यपूजा` `#सनातनधर्म` `#ब्रह्मकृतसूर्यस्तुति` `#ब्रह्मपुराण३१` `#सूर्यदेव` `#सर्वज्ञशङ्कर`
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