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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴 - चिंता ऐसी डाकिनी , 66 कबीर की वाणी, काट कलेजा खाए। जीवन की सच्चाई संतों की अमराई वैध बिचारा क्या करे , कहा तक दवा लगाए।। कबीर दास कवीर चाणी चरक संहिता संहिता gg7 हृदयम अष्टांग সাণাথ: चिंता एक डाकिनी के समान है, जो मनुष्य के हृदय को खा जाती है। बेचारा वैध ( हकीम ) क्या करे, कहां तक इसकी दवा लगाए चिंता मन को खा जाती है, इसलिए इसे त्यागकर , चाहिए। ईश्वर के नाम और भक्ति में मन लगाना चिंता ऐसी डाकिनी , 66 कबीर की वाणी, काट कलेजा खाए। जीवन की सच्चाई संतों की अमराई वैध बिचारा क्या करे , कहा तक दवा लगाए।। कबीर दास कवीर चाणी चरक संहिता संहिता gg7 हृदयम अष्टांग সাণাথ: चिंता एक डाकिनी के समान है, जो मनुष्य के हृदय को खा जाती है। बेचारा वैध ( हकीम ) क्या करे, कहां तक इसकी दवा लगाए चिंता मन को खा जाती है, इसलिए इसे त्यागकर , चाहिए। ईश्वर के नाम और भक्ति में मन लगाना - ShareChat