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#गुलज़ार साहब की शायरी #📓 हिंदी साहित्य #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह
गुलज़ार साहब की शायरी - हमने देखी है इन औँखों की महकती खुशबू हाथ से छू के इसे रश्तों का इल्जाम ना दो Gulzar #At[ Poems FB GR0UD सिर्फ अहसास 84 64 महसूस करो प्यारको प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो Khamoshi हमने देखी है इन औँखों की महकती खुशबू हाथ से छू के इसे रश्तों का इल्जाम ना दो Gulzar #At[ Poems FB GR0UD सिर्फ अहसास 84 64 महसूस करो प्यारको प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो Khamoshi - ShareChat