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#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ज्येष्ठ मास में आने वाली पहली एकादशी का नाम अपरा एकादशी है। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अपरा एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो व्यक्ति एकादशी का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करता है। उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही घर परिवार में भी सुख समृद्धि बनी रहती है। अपरा एकादशी व्रत को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। दरअसल, एकादशी तिथि 12 और 13 मई दोनों दिन ही लग रही है। ऐसे में आइए जानते हैं 12 और 13 मई कब रखा जाएगा अपरा एकादशी का व्रत। जानें सही तारीख और पूजा विधिपंडित राकेश झा की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का आरंभ 12 मई को दोपहर में 2 बजकर 53 मिनट पर आरंभ होगी और 13 अप्रैल को एकादशी तिथि दोपहर में 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। (केयर न्यूज) शास्त्रों के नियमों के अनुसार, एकादशी तिथि का व्रत तब किया जाता है जब उदयकाल में एकादशी तिथि लग रही हो। ऐसे में 13 मई को सुबह को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि लगी रहेगी। इसलिए अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को ही रखा जाएगा। वहीं, एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। 14 मई को द्वादशी तिथि लग रही है। इसलिए व्रत का पारण 14 तारीख में 11 बजकर 20 मिनट पर किया जाएगा। पंडित राकेश झा की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का आरंभ 12 मई को दोपहर में 2 बजकर 53 मिनट पर आरंभ होगी और 13 अप्रैल को एकादशी तिथि दोपहर में 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के नियमों के अनुसार, एकादशी तिथि का व्रत तब किया जाता है जब उदयकाल में एकादशी तिथि लग रही हो। ऐसे में 13 मई को सुबह को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि लगी रहेगी। इसलिए अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को ही रखा जाएगा। वहीं, एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। 14 मई को द्वादशी तिथि लग रही है। इसलिए व्रत का पारण 14 तारीख में 11 बजकर 20 मिनट पर किया जाएगा। अपरा एकादशी व्रत का पुराण में विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से ब्रह्म हत्या जैसे अपराधों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही प्रेत योनि जैसे भयंकर पापों से भी मुक्ति मिलती है। अपरा एकादशी का व्रत करने से #Newsgenix
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