sn vyas
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#जय श्री राधे ' मधुराधिपते अखिलं मधुरम् ' मधुर नयन मधु चितवन मधुरी। लहरि लहरि हरि लोचन लहरति घाव करति मन मधुरी मधुरी।। जीति लेत मन चित्त सहज अति जदुपति दृष्टि भाव उर मधुरी। तीखो शर अचूक मन वेधै नयन धनुष दृग सायक मधुरी।। उठति तनति कुसुमाकर सायक तजति धनुष भ्रू माधव मधुरी। ...
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