sn vyas
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## जय मनसा देवी #मनसा देवी मंदिर #जय मां मनसा देवी #मनसा देवी की जय हो 🙏 🐍 सर्पों की अधिष्ठात्री: माँ मनसा देवी की अद्भुत और रहस्यमयी कथा 🐍 क्या आप जानते हैं कि नागों के प्रकोप से सृष्टि को बचाने के लिए किस देवी का प्राकट्य हुआ था? आइए जानते हैं माँ मनसा (विषहरी) की दिव्य महिमा: 🪷 कैसे हुआ प्राकट्य? प्राचीन काल में जब नागों (कद्रू के पुत्रों) का आतंक बहुत बढ़ गया था, तब ब्रह्मा जी की सलाह पर महर्षि कश्यप ने एक ऐसी शक्ति का आह्वान किया जो सर्पों को नियंत्रित कर सके। महर्षि ने अपने 'मन' के योग और कठोर तपस्या से एक दिव्य कन्या को उत्पन्न किया। मन से प्रकट होने के कारण ही इनका नाम 'मनसा' पड़ा। 🔱 महादेव की 'शम्भुशिष्या' जन्म के बाद देवी मनसा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए और सिद्धियों का गूढ़ ज्ञान दिया। शिव जी की शिष्या होने के कारण वे 'शम्भुशिष्या' कहलाईं। भगवान शिव ने ही उन्हें भयंकर से भयंकर विष को नियंत्रित करने की विशिष्ट शक्ति प्रदान की। 🛡️ पुत्र आस्तीक और नागवंश की रक्षा माँ मनसा का विवाह महर्षि जरत्कारु से हुआ था। उनके एक अत्यंत तेजस्वी पुत्र हुए, जिनका नाम 'आस्तीक' रखा गया। जब राजा जनमेजय अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए महाविनाशकारी 'सर्प मेध यज्ञ' कर रहे थे, तब इसी बालक आस्तीक मुनि ने अपनी कुशाग्र बुद्धि से उस यज्ञ को रुकवाया और सम्पूर्ण नागवंश को भस्म होने से बचाया। ✨ माँ विषहरी का वरदान स्वयं भगवान नारायण के अनुसार— जो भी भक्त माँ मनसा देवी (विषहरी) की सच्चे मन से स्तुति करता है, उसे जीवन में कभी सर्पदंश का भय नहीं रहता और माँ उसकी संतानों की सदैव रक्षा करती हैं। आज भी बंगाल और उत्तर भारत में लोक देवी के रूप में उनकी अपार श्रद्धा से पूजा की जाती है। जय माँ मनसा! 🙏🌺
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