श्यामा
686 views • 9 days ago
"जब तक प्रेम नहीं था, हम सबके साथ थे। प्रेम होते ही दुनिया में से एक चेहरा अलग हो गया अब हम अकेले हैं, क्योंकि हमारा मन अब सबका नहीं रहा, एक का हो गया जो अकेलेपन को खोजता है..
प्रेम में अकेलापन हमें एहसास कराता है कि किसी दूसरे का होना क्या होता है। जब तक हम अपने आप में पूरे थे तो हमें दूसरे की ज़रूरत नहीं थी। प्रेम ने हमें अधूरा किया, एक खाली जगह बनाई - और उस खाली जगह में दूसरे को जीने की जगह मिली।
'हम अकेलेपन को ढ़ूंढ़ते है की कोई भीतर जी पाये हम उसकी अनुपस्थिति में भी उसकी उपस्थिति को महसूस करते है... हम दूसरे हो जाते है।
"शायद इसलिए कहा जाता है - प्रेम मिलना नहीं है, प्रेम किसी को अपने भीतर इतनी जगह देना है कि उसका न होना भी एक मौजूदगी बन जाए।
प्रेम कोई प्रयास नहीं, न ही मन की कोई कल्पना है। प्रेम तो प्रकृति का सहज वरदान है, जो प्राणों के किसी शांत कोने में एक मधुर सुगंध की तरह जन्म लेता है।
प्रेम न माँगा जाता है, न बनाया जाता है; वह तो भीतर स्वयं ही प्रस्फुटित होता है, जैसे भोर की पहली किरण, जैसे बंद कली में छिपी हुई सुगंध, जैसे खुद को पाने का अहसास।
जहाँ प्रेम है, वहीं ईश्वर का स्पर्श है। जहाँ प्रेम है, वहीं जीवन अपने वास्तविक अर्थ में खिल उठता है।
प्रेम ही प्रकृति का संगीत है,
प्रेम ही आत्मा का उत्सव है,
प्रेम ही परमात्मा तक पहुँचने का सबसे
सरल मार्ग भी है।
#❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #💕राधेकृष्ण 💕 #💓 मोहब्बत दिल से #सिर्फ तुम #🌙 गुड नाईट
14 likes
18 shares