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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं पावस के समय, धरी कोकिलन मौन तुलसी अब तो दादुर बोलिहं, हमें पूछिह कौंन वर्षा ऋतु आने पर कोयल मौन धारण कर लेती है। वह सोचती अब तो मेंढक टर्राएंगे, तो हमारी है कि आवाज को कौन सुरीली ूछेगा ? अर्थात जहाँ गुणहीनों का बोलबाला हो, वहाँ बुद्धिमान व्यक्ति का चुप रहना ही उचित है। हरि शरणं पावस के समय, धरी कोकिलन मौन तुलसी अब तो दादुर बोलिहं, हमें पूछिह कौंन वर्षा ऋतु आने पर कोयल मौन धारण कर लेती है। वह सोचती अब तो मेंढक टर्राएंगे, तो हमारी है कि आवाज को कौन सुरीली ूछेगा ? अर्थात जहाँ गुणहीनों का बोलबाला हो, वहाँ बुद्धिमान व्यक्ति का चुप रहना ही उचित है। - ShareChat