सुशील मेहता
597 views • 7 days ago
प्लास्टिक बैग निषेध दिवस
प्लास्टिक प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, हर साल 3 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज के समय में दुनिया भर में प्लास्टिक का उपयोग काफी बढ़ गया है. ऐसे में शरीर के भीतर श्वास का आना-जाना एक निरंतर क्रिया है। एक लयबद्ध गति, जो क्षण-क्षण हमें समय की धारा के साथ जोड़ रही है। लेकिन क्या आपने कभी रुक कर यह सोचा है—जो इन श्वासों को देख रहा है, वह कौन है?
शरीर समय की धारा के अधीन है। श्वास का आना-जाना ही इस शरीर की आयु है, जो काल के नियमों से बंधी है। लेकिन, आप?
आप वह नहीं हैं जो श्वास ले रहा है।
आप वह हैं जो इस श्वास को देख रहा है।जब आप अपनी श्वास को देखते हैं, तो आप दो अलग-अलग अस्तित्वों का अनुभव करते हैं:
धारा: जो शरीर के भीतर आ रही है और जा रही है। यह निरंतर बदल रही है।
दृष्टा: जो इस श्वास के आने और जाने का साक्षी है। वह न तो बदल रहा है, न ही इस धारा का हिस्सा है।
जो स्वयं को 'श्वास' (शरीर) मान बैठते हैं, वे काल के प्रवाह में बहते हुए डर में जीते हैं। लेकिन जो अपने भीतर उस 'देखने वाले' को पहचान लेता है, वह जान जाता है कि वह समय की धारा से सर्वथा परे है।आपकी श्वास रुक सकती है, आपका शरीर समय की धारा में विलीन हो सकता है, लेकिन वह 'देखने वाला' कभी नहीं रुकता। वह साक्षी सदैव वहीं रहता है। जिस दिन आप इस 'देखने वाले' में स्थिर हो गए, उस दिन आपको समझ आएगा कि मृत्यु केवल समय की धारा का एक अंत है, आपका नहीं।
आज, अपनी श्वास को शरीर के हवाले छोड़ दें, लेकिन स्वयं को उस अचल केंद्र में स्थित करें, जो श्वास के आने-जाने से भी परे है।
आप शरीर नहीं, आप वह शाश्वत साक्षी हैं जो जीवन के पूरे नाटक को देख रहा है।
#परम_सत्य #साक्षी_भाव #दृष्टा #अस्तित्व #काल_अतीत #स्व_स्वरूप #परिवर्तन_से_प दिन काफी महत्व रखता है, क्योंकि प्लास्टिक प्राकृतिक पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है. इतना ही नहीं यह आने वाली पीढ़ी को गंभीर खतरे में डाल रहा है.
दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस 3 जुलाई को पूरे विश्व में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य देशों को सिंग यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है. सिंगल यूज प्लास्टिक ऐसे प्लास्टिक उत्पाद हैं जिन्हें एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाता है और इन्हें रिसाइकल नहीं किया जा सकता है. अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस बैग मुक्त विश्व की एक पहल है. ग्रेट प्लास्टिक पैच की खोज 1997 में समुद्र में की गई थी. इसके बाद, दुनिया भर के लोगों ने रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक के उपयोग के दुष्प्रभावों पर चर्चा करना शुरू कर दिया.
2002 में, बांग्लादेश प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना. देश ने सिंगल यूज प्लास्टिक बैन तब लगाया जब इस बात पर प्रकाश डाला गया कि प्लास्टिक तूफानी नालों को बंद कर देता है जिससे बाढ़ की स्थिति और खराब हो जाती है. प्लास्टिक कचरे के ढेर को देश में जलभराव का एक कारण बताया गया. अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस का मुख्य उद्देश्य सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से हमारे पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता पैदा करना है.
सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी चीजें हमारे जलाशयों को दूषित करती हैं. प्लास्टिक नदियों और समुद्री जीवों के लिए बहुत बड़ा खतरा है. प्लास्टिक को खाने से कई जलीय जंतु मारे जाते हैं.
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मनुष्य हर साल लगभग 300 मिलियन टन प्लास्टिक का उत्पादन करते हैं, जिनमें से ज्यादातर को रिसायकल नहीं किया जा सकता है. #जागरूकता दिवस
9 likes
14 shares