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अर्चना गोरे - Author on ShareChat
अर्चना गोरे
1K views • 27 days ago
#✍गुलजारांचे साहित्य
रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ हो गई है ज़िंदगी की, कि सुबह का दर्द 91T7 ಈ gಾT T FTTT ೯. !! गुलज़ार रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ हो गई है ज़िंदगी की, कि सुबह का दर्द 91T7 ಈ gಾT T FTTT ೯. !! गुलज़ार
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  • माईVN - Author on ShareChat
    माई🌹🌹VN🌹🌹
    #✨शुभ रात्री😴Good Night😴 #✍गुलजारांचे साहित्य
    जब लोगों को उजाला नज़र आने लगता है तब वह उनको भूल जाते हैं जो अंधेरे में उनके साथ !! जब लोगों को उजाला नज़र आने लगता है तब वह उनको भूल जाते हैं जो अंधेरे में उनके साथ !!
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  • अर्चना गोरे - Author on ShareChat
    अर्चना गोरे
    #✍गुलजारांचे साहित्य
    ज़िंदगी का सफर नहीं रुकता किसी के चले जाने से हम ना होंगे तो यारों, रोनके महफ़िल कोई और होगा !! ज़िंदगी का सफर नहीं रुकता किसी के चले जाने से हम ना होंगे तो यारों, रोनके महफ़िल कोई और होगा !!
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  • juhi - Author on ShareChat
    💖juhi💕🌷🌹🌷
    #✍गुलजारांचे साहित्य ## मनातले❤️पानावर 🌷
    जिंदगी का सफर नहीं रुकता किसी के चले जाने से हम ना होंगे तो यारों, रोनके ्महफ़िल कोई और होगा !! जिंदगी का सफर नहीं रुकता किसी के चले जाने से हम ना होंगे तो यारों, रोनके ्महफ़िल कोई और होगा !!
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  • अर्चना गोरे - Author on ShareChat
    अर्चना गोरे
    #✍गुलजारांचे साहित्य
    मौजूदगी की कदर किसी को 6 8, बाद में तस्वीरें देख कर रोते हैं लोग गुलजार शायरी मौजूदगी की कदर किसी को 6 8, बाद में तस्वीरें देख कर रोते हैं लोग गुलजार शायरी
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  • Shirish Jadhav - Author on ShareChat
    Shirish Jadhav
    #🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍गुलजारांचे साहित्य
    अब बने है पत्थर के तो हैरत कैसी है, जब थे मोम के तो जलाए गए थे।! बहुत अब बने है पत्थर के तो हैरत कैसी है, जब थे मोम के तो जलाए गए थे।! बहुत
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  • Shirish Jadhav - Author on ShareChat
    Shirish Jadhav
    #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य
    ठंडी रोटियां अक्सर उन्ही के हिस्से में आती है जो अपनों के लिए कमाकर देर से घर लौटते हैं Gulzar Shayari ठंडी रोटियां अक्सर उन्ही के हिस्से में आती है जो अपनों के लिए कमाकर देर से घर लौटते हैं Gulzar Shayari
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  • अर्चना गोरे - Author on ShareChat
    अर्चना गोरे
    #✍गुलजारांचे साहित्य
    सफ़ेद बाल देखकर, मुंह ना फेरिए जनाब. चीज़ों को ब्रँडेड होने में , उम्र लग जाती है.. ! ।॰ / सुप्रभात | सफ़ेद बाल देखकर, मुंह ना फेरिए जनाब. चीज़ों को ब्रँडेड होने में , उम्र लग जाती है.. ! ।॰ / सुप्रभात |
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  • Shirish Jadhav - Author on ShareChat
    Shirish Jadhav
    #🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य #📝कविता / शायरी/ चारोळी
    इन्सान तब तक सहन करता है जब तक उसकी सहन करने की क्षमता होती है, उसके बाद वो ना तो रिश्तों को जरुरी समझता है और ना तो अपनों को..!! इन्सान तब तक सहन करता है जब तक उसकी सहन करने की क्षमता होती है, उसके बाद वो ना तो रिश्तों को जरुरी समझता है और ना तो अपनों को..!!
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  • juhi - Author on ShareChat
    💖juhi💕🌷🌹🌷
    #✍गुलजारांचे साहित्य ## मनातले❤️पानावर 🌷
    दुनिया की फितरत भी बड़ी अजीब है ईमानदार को मूर्ख. en बेईमान को अक्लमंद. ೦೦೦ और बेशर्मी को खूबसूरती का नाम देती है...! दुनिया की फितरत भी बड़ी अजीब है ईमानदार को मूर्ख. en बेईमान को अक्लमंद. ೦೦೦ और बेशर्मी को खूबसूरती का नाम देती है...!
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