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#દેશભક્તિ #सोचने वाली बात #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #points to ponder #positive thinking
દેશભક્તિ - येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः| मृत्युलोके भुवि भारभूता, al मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्तिIl अर्थः जिन लोगों के पास न विद्या है, न तप, न दान, न ज्ञान, न चरित्र, न गुण और न ही धर्म हैः वे लोग इस (ఇౌ్] पृथ्वी पर केवल एक 'भार हैं। वे मनुष्य का रूप धारण पशुओं की तरह जीवन जी रहे 9 ಈI 12:03 pm येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः| मृत्युलोके भुवि भारभूता, al मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्तिIl अर्थः जिन लोगों के पास न विद्या है, न तप, न दान, न ज्ञान, न चरित्र, न गुण और न ही धर्म हैः वे लोग इस (ఇౌ్] पृथ्वी पर केवल एक 'भार हैं। वे मनुष्य का रूप धारण पशुओं की तरह जीवन जी रहे 9 ಈI 12:03 pm - ShareChat