Dhamnashrya yuwa vichar mnach nanded
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*मूलाधिकार...*
*मूलाधिकारों को रखने के दो प्रयोजन हैं। पहला तो यह कि प्रत्येक नागरिक इन अधिकारों का दावा कर सके। दूसरा यह कि यह प्रत्येक ऐसे प्राधिकारी के लिए प्राधिकारी का क्या मतलब है यह में अभी आपको बताता हूं, जिसको विधि-निर्माण का अधिकार प्राप्त है यह जिसमें विधि-निर्माण के संबंध में स्वविवेकमूलक शक्ति सन्निहित है। इन पर अमल करना अनिवार्य हो। इसलिए यह स्पष्ट है कि अगर मूलाधिकारों को सही रूप में रखना है तो इन पर अमल करना न केवल केन्द्रीय अथवा प्रान्तीय सरकारों के लिए ही लाजिमी बनाना चाहिए, न केवल भारतीय रियासतों में स्थापित सरकारों के लिए लाजिमी बनाना चाहिए बल्कि जिला बोडों, म्युनिसिपल बोडों, यहां तक कि ग्राम पंचायतों और ताल्लुका बोडों के लिए भी यह लाजिमी होना चाहिए। वस्तुतः विधि द्वारा निर्मित प्रत्येक प्राधिकारी जिसे विधि, नियम और उपनियम बनाने का कोई भी अधिकार है, उसके लिए भी इस पर अमल करना लाजिमी होना चाहिए।*
*मुक्तीदाता विशेषांक*
*संदर्भ संविधान सभा वाद विवाद .खंड.-VII (क), पृ.* *870* #✍️सुविचार #bhimsenik #🪷बुद्धांची तत्वे📜 #💙 भीमसैनिक 💙 #🙂Positive Thought
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