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Dr.Rakesh Sharma - Author on ShareChat
Dr.Rakesh Sharma
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दैनिक इंदौरिया समाचार जगत #indoriatimes #BREAKING NEWS #samachar #news
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    आधी आबादी का अधिकार किसी भी गणित से बड़ा होे सकता था : डॉ. राकेश शर्मा लोकसभा में महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण  परिसीमन की अनिश्चित समयसीमा से जोड़कर टालने देने और सीटों के विस्तार से जुड़े १३१वें संविधान की कोशिश बताया, जबकि कुछ दलों ने सामाजिक संशोधन विधेयक का गिरना केवल एक विधायी और क्षेत्रीय संतुलन के प्रश्न उठाए  परिणामस्वरूप बल्कि राजनीतिक सहमति के असफलता   नहीं, पयरf प्त ತ೯೯ಶ _ Tf೯mT3TT* को 77 प्रतिनिधित्व - राजनीतिक अविश्वास की भेंट चढ़ गया।  अभाव की स्पष्ट तस्वीर है 298 মমথন সন ক্িমী छोटे प्रयास का संकेत नहीं सवाल यह भी है कि ॰क्या महिला आरक्षण को 87, लेकिन 4 लागू करने के लिए सीटों का विस्तार अनिवार्य था ? 352 आवश्यक आंकड़े से दूर मौजूदा 7 संरचना में ही राजनीतिक इच्छाशक्ति যা দ্িং कि मुद्दा रह जाना बताता है के साथ इसे लागू किया जा सकता था ? इन प्रश्नों के अभी भी दलगत राजनीति स्पष्ट उत्तर के बिना सहमति बनना कठिन है। की दीवारों में उलझा हुआ इस घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पक्ष यह है 8 कि व्यापक समर्थन के बावजूद विधेयक पास नहीं हो इंदौरि या यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में समाचार सका के चीफ़ एडीटर डॉ॰ राकेश शर्मा के अनुसार के लिए केवल संख्याएं नहीं, संवेदनशील सुधारों जगत महिला आरक्षण का विचार नया नहीं है। दशकों से बल्कि भरोसे और संवाद की भी आवश्यकता है। यह मांग भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व के संतुलन महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक वादा की दिशा में एक अहम कदम माना जाता रहा है। नहीं, बल्कि सामाजिक और   लोकतांत्रिक न्याय स्थानीय निकायों में आरक्षण ने यह साबित भी किया समावेशन का प्रश्न है। यदि इसे बार- बार राजनीतिक है कि अवसर मिलने पर महिलाएं नेतृत्व की प्रभावी रणनीति का हिस्सा बनाकर टाला जाता रहा, तो यह न भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में  संसद और केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व को   प्रभावित विधानसभाओं में इसकी अनुपस्थिति लोकतांत्रिक करेगा, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी अधूरेपन की ओर इशारा करती है। प्रश्न खड़े करेगा मैं समझता हूं इस विधेयक को परिसीमन और मैं समझता  हूं सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ना सरकार की रणनीतिक पर टकराव की बजाय राजनीति सहमति का रास्ता সতনুহী ৯্ী মন্ধনী ই, লব্ধিন সঙ্কী হমন্দী মনম নভী अपनाते तो आधी आबादी का अधिकार किसी भी যণিল ম লভা ক্কী মন্ধনা থা | कमजोरी भी बन गई। विपक्ष ने इसे जनगणना और आधी आबादी का अधिकार किसी भी गणित से बड़ा होे सकता था : डॉ. राकेश शर्मा लोकसभा में महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण  परिसीमन की अनिश्चित समयसीमा से जोड़कर टालने देने और सीटों के विस्तार से जुड़े १३१वें संविधान की कोशिश बताया, जबकि कुछ दलों ने सामाजिक संशोधन विधेयक का गिरना केवल एक विधायी और क्षेत्रीय संतुलन के प्रश्न उठाए  परिणामस्वरूप बल्कि राजनीतिक सहमति के असफलता   नहीं, पयरf प्त ತ೯೯ಶ _ Tf೯mT3TT* को 77 प्रतिनिधित्व - राजनीतिक अविश्वास की भेंट चढ़ गया।  अभाव की स्पष्ट तस्वीर है 298 মমথন সন ক্িমী छोटे प्रयास का संकेत नहीं सवाल यह भी है कि ॰क्या महिला आरक्षण को 87, लेकिन 4 लागू करने के लिए सीटों का विस्तार अनिवार्य था ? 352 आवश्यक आंकड़े से दूर मौजूदा 7 संरचना में ही राजनीतिक इच्छाशक्ति যা দ্িং कि मुद्दा रह जाना बताता है के साथ इसे लागू किया जा सकता था ? इन प्रश्नों के अभी भी दलगत राजनीति स्पष्ट उत्तर के बिना सहमति बनना कठिन है। की दीवारों में उलझा हुआ इस घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पक्ष यह है 8 कि व्यापक समर्थन के बावजूद विधेयक पास नहीं हो इंदौरि या यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में समाचार सका के चीफ़ एडीटर डॉ॰ राकेश शर्मा के अनुसार के लिए केवल संख्याएं नहीं, संवेदनशील सुधारों जगत महिला आरक्षण का विचार नया नहीं है। दशकों से बल्कि भरोसे और संवाद की भी आवश्यकता है। यह मांग भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व के संतुलन महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक वादा की दिशा में एक अहम कदम माना जाता रहा है। नहीं, बल्कि सामाजिक और   लोकतांत्रिक न्याय स्थानीय निकायों में आरक्षण ने यह साबित भी किया समावेशन का प्रश्न है। यदि इसे बार- बार राजनीतिक है कि अवसर मिलने पर महिलाएं नेतृत्व की प्रभावी रणनीति का हिस्सा बनाकर टाला जाता रहा, तो यह न भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में  संसद और केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व को   प्रभावित विधानसभाओं में इसकी अनुपस्थिति लोकतांत्रिक करेगा, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी अधूरेपन की ओर इशारा करती है। प्रश्न खड़े करेगा मैं समझता हूं इस विधेयक को परिसीमन और मैं समझता  हूं सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ना सरकार की रणनीतिक पर टकराव की बजाय राजनीति सहमति का रास्ता সতনুহী ৯্ী মন্ধনী ই, লব্ধিন সঙ্কী হমন্দী মনম নভী अपनाते तो आधी आबादी का अधिकार किसी भी যণিল ম লভা ক্কী মন্ধনা থা | कमजोरी भी बन गई। विपक्ष ने इसे जनगणना और
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