सुशील मेहता
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जयापार्वती व्रत देवी जया को समर्पित एक महत्वपूर्ण उपवास दिवस है। देवी जया, देवी पार्वती के विभिन्न रूपों में से एक हैं। जयापार्वती व्रत मुख्य रूप से गुजरात में मनाया जाता है। जयापार्वती का व्रत अविवाहित कन्याओं के साथ-साथ विवाहित स्त्रियों द्वारा भी किया जाता है। अविवाहित कन्याएँ जयापार्वती व्रत का पालन सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिये करती हैं तथा विवाहित स्त्रियाँ इस व्रत को अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी वैवाहिक जीवन के लिये करती हैं जयापार्वती व्रत आषाढ़ मास में पाँच दिनों तक मनाया जाता है। यह व्रत शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से आरम्भ होता है तथा पाँच दिवस पश्चात कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर समाप्त होता है। जयापार्वती व्रत को पाँच, सात, नौ, ग्यारह तथा अधिकतम बीस वर्षों तक करने का सुझाव दिया गया है। जयापार्वती व्रत पालन के समय भक्तगण, विशेष रूप से नमकीन भोजन ग्रहण करने से बचते हैं। इन पाँच दिनों की उपवास अवधि के दौरान नमक का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित है। कुछ भक्तगण इन पाँच दिनों की उपवास अवधि के दौरान अनाज तथा सभी प्रकार की सब्जियों के उपयोग से भी बचते हैं। #शुभ कामनाएँ 🙏
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