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#" रूबरू करवाता हूं आपको कुछ मेरी कलम से, कुछ मेरे हुनर से " #💞Heart touching शायरी✍️ #🥰 इमोशनल पल
" रूबरू करवाता हूं आपको कुछ मेरी कलम से, कुछ मेरे हुनर से " - होने लगा है शोर बहुत, कोई आया है क्या.. ? बाहर निकल के देखा तो एक सन्नाटा के सिवा कुछ न था।  यादों के सहारे ही तो एक उम्र कट रही, पतझड़ सी ज़िंदगी को तुफां से अबःच्या डर। चमक रहें हैं सितारे खुलकर आसमां पे, आंखों से मेरे शबनम बरस रहें हैं। मुश्किल है अब दिल समझना,  ढूंढ रहें हैं।  हालात के मारे मंज़िल को दो चिराग़ों को,ये अंधेरा अच्छा है, बुझने उजालों में सबके चेहरे दिख रहें हैं। Sfa:ాII:T :FFT होने लगा है शोर बहुत, कोई आया है क्या.. ? बाहर निकल के देखा तो एक सन्नाटा के सिवा कुछ न था।  यादों के सहारे ही तो एक उम्र कट रही, पतझड़ सी ज़िंदगी को तुफां से अबःच्या डर। चमक रहें हैं सितारे खुलकर आसमां पे, आंखों से मेरे शबनम बरस रहें हैं। मुश्किल है अब दिल समझना,  ढूंढ रहें हैं।  हालात के मारे मंज़िल को दो चिराग़ों को,ये अंधेरा अच्छा है, बुझने उजालों में सबके चेहरे दिख रहें हैं। Sfa:ాII:T :FFT - ShareChat