Mahendra Narayan
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हमारी भी जो चाहत है तुम्हारी भी वो चाहत है
हमारी आँखें इक दूजे से करती क्यों सियासत है
अभी तक मुद्दई हमको जुदा करके सभी खुश थे
मगर हम एक हैं दिल से महज़ इतनी सी राहत है #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह