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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
सतगुरू कबीर साहेब वाणी कबीर कहे जगत से, ऐसी वाणी बोल | टूटे दिल भी जुड़ उठें , मिट जाए मनभेद Il मीठे वचन अमृत समान हैं, ये ही प्रेम का सेतु बनाते हैं , कठोर वाणी से रिश्ते टूटते हैं, मधुर वाणी से दिल मिल जाते हैं । सप्रेम साहेब बंदगी साहेब सतगुरू कबीर साहेब वाणी कबीर कहे जगत से, ऐसी वाणी बोल | टूटे दिल भी जुड़ उठें , मिट जाए मनभेद Il मीठे वचन अमृत समान हैं, ये ही प्रेम का सेतु बनाते हैं , कठोर वाणी से रिश्ते टूटते हैं, मधुर वाणी से दिल मिल जाते हैं । सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    ।। सत्यनाम ।। सदगुरु कबोर DHARMDAS  8 सत्संग समाराह [) ೫೭?m @ % | हुज़ूर प्रकाशमुनि " धर्मदास  पंथ श्री नाम साहव साहेब के सभी भक्तजनों को अत्यंत हर्ष के साथ किया सूचित जाता है कि सदगुरु कबीर साहेब की असीम कृपा एवं पंथ श्री हुज़ूर प्रकाशमुनि नाम साहेब तथा पंथ श्री हुज़ूर उदितमुनि नाम  दृष्टि से सदगुरु कबीर सत्संग समारोह का भव्य साहेब की दया- आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आप सभी सादर आमंत्रित हैं। कार्यक्रम की रूपरेखा २१ सितंबर २०२६ शोभा यात्रा , स्वागत व सत्संग प्रवचन 22 মিননয 2026 प्रातः गुरु महिमा, सत्संग भजन एवं " अनुराग सागर अखड पाठ 23 মিননয 2026  प्रातः गुरु महिमा सत्संग एस.के.डी॰वी. मिशन कार्यक्रम आनंदी चौका आरती के साथ समापन स्थान : भट्टू अनाज मंडी , फतेहाबाद , हरियाणा श्री हुज़ूर 7 सप्रेम साहेब बंदगी साहेब ।। उदितमुनि नाम साहब এথ 1 SKDV MISSION ।। सत्यनाम ।। सदगुरु कबोर DHARMDAS  8 सत्संग समाराह [) ೫೭?m @ % | हुज़ूर प्रकाशमुनि " धर्मदास  पंथ श्री नाम साहव साहेब के सभी भक्तजनों को अत्यंत हर्ष के साथ किया सूचित जाता है कि सदगुरु कबीर साहेब की असीम कृपा एवं पंथ श्री हुज़ूर प्रकाशमुनि नाम साहेब तथा पंथ श्री हुज़ूर उदितमुनि नाम  दृष्टि से सदगुरु कबीर सत्संग समारोह का भव्य साहेब की दया- आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आप सभी सादर आमंत्रित हैं। कार्यक्रम की रूपरेखा २१ सितंबर २०२६ शोभा यात्रा , स्वागत व सत्संग प्रवचन 22 মিননয 2026 प्रातः गुरु महिमा, सत्संग भजन एवं " अनुराग सागर अखड पाठ 23 মিননয 2026  प्रातः गुरु महिमा सत्संग एस.के.डी॰वी. मिशन कार्यक्रम आनंदी चौका आरती के साथ समापन स्थान : भट्टू अनाज मंडी , फतेहाबाद , हरियाणा श्री हुज़ूर 7 सप्रेम साहेब बंदगी साहेब ।। उदितमुनि नाम साहब এথ 1 SKDV MISSION
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    सतगुरू शब्द बिन सत्य नहीं  सत्य बिन नहों पार। नाम बिन जीव भटके खाय , जन्म मरण को मार।। N SATGURO सतगुरु का ज्ञान और नाम ही मुक्ति का मार्ग है। FOLLOW COD VLOGS ज्ञान - आध्यात्मिक विचार ٩٩٠ ٦5 सतगुरू शब्द बिन सत्य नहीं  सत्य बिन नहों पार। नाम बिन जीव भटके खाय , जन्म मरण को मार।। N SATGURO सतगुरु का ज्ञान और नाम ही मुक्ति का मार्ग है। FOLLOW COD VLOGS ज्ञान - आध्यात्मिक विचार ٩٩٠ ٦5
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    पूजा पाठ हजार कर, मन न छोडे लोभ। प्रेम बिना प्रभु ना मिलें , चाहे कर ले कोटि जप।। "प्रेम, ` दया और निर्मल मन ही सच्ची भक्ति का आधार हैं।" पूजा पाठ हजार कर, मन न छोडे लोभ। प्रेम बिना प्रभु ना मिलें , चाहे कर ले कोटि जप।। "प्रेम, ` दया और निर्मल मन ही सच्ची भक्ति का आधार हैं।"
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    बिन जल कमल खिला हुआ , बिन माली बगिया। गुरु॰कृपा की छाँव में , खिल उठी अंतर दुनिया।l कबीर वाणी बिन जल कमल खिला हुआ , बिन माली बगिया। गुरु॰कृपा की छाँव में , खिल उठी अंतर दुनिया।l कबीर वाणी
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    मल मल धोए शरीर को, धोए न मन का मैल। नहाए गंगा गोमती , रहे बैल के बैल ।। सदगुरू कबीर साहेब कबीर साहेब जी मल मल धोए शरीर को, धोए न मन का मैल। नहाए गंगा गोमती , रहे बैल के बैल ।। सदगुरू कबीर साहेब कबीर साहेब जी
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    संगती सो सुख उपजे . कुसंगति सो दुःख होय | कह कबीर तह जाइए. साधू संग जहा होय |l एक अच्छी संगति पैदा करती है और खुशी दुख पैदा करती है। बुराई Uc अच्छे लोगों के बीच चाहिए। हमेशा रहना कबीर साहेब जी कवीरभजन S(o संगती सो सुख उपजे . कुसंगति सो दुःख होय | कह कबीर तह जाइए. साधू संग जहा होय |l एक अच्छी संगति पैदा करती है और खुशी दुख पैदा करती है। बुराई Uc अच्छे लोगों के बीच चाहिए। हमेशा रहना कबीर साहेब जी कवीरभजन S(o
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    सदगुरु कबीर वाणी वचन Dol 6|9 पंथ श्री हुजूर उदितमुनिनाम साहब के प्रवचन जब हम सेवा की बात करते ह तो अक्सर हमारा मन एक सीमित दायरे गें सोचता हे।  कोई भोतिक मदद कोई दान या कोई शारीरिक श्रम यही सेवा की सामान्य समडा हे। लेकिन क्या सेवा का अर्थ इतना सतही ह? सेवा का वास्तविक अर्थ हे अहं से मुक्ति।  जव तक '॰ कर्ता बना रहता हेःतव तक चास्तविक सेचा संभव नहीं ह। सेच। करने वाला  जव तक यह सोचता है कि"मे सेवा कर रहा तय तक बह सेवा के सार को नहीं समझ पाया हे। वास्तविक सेता तव होती ह जव करने वाला गायय हो जाता हे।  जेसे सूर्य प्रकाश देता हे, पर कभी नहीं सोचता " कि चह प्रकाश दे रहा हे।जेसो नदी बहती ह॰ पर कभी नही सोचती किबह किसी की 66 सेवा चही जो अहंसे मुक्त हो, प्यारा बुझा रही हे। यही सेचा का परम स्वरुप हे।  जहा कर्ता नःहो, केवल करुणा हो। सेवा का अर्थ हे स्वयं को मिटाकर स्वयंको मिटा कर॰ सबगें स्वयं को देखो में देखना।  বুমযৌ  यही सेचा हे॰ यही साथना ह यही पंथ ह।७७ जव तक 'दूसरा' हे॰ तब तक सेवा अथूरी ह।  जय आपःकिसी की सेवा करते हता यास्तय मे॰ आप स्वयं कीही सेचा कर रहे हें, क्योकि  बह ' दूसरा' आपसे अलग नहीं हे। बंदगी साहेब जी सप्रेम साहेब Nkp सदगुरु कबीर वाणी वचन Dol 6|9 पंथ श्री हुजूर उदितमुनिनाम साहब के प्रवचन जब हम सेवा की बात करते ह तो अक्सर हमारा मन एक सीमित दायरे गें सोचता हे।  कोई भोतिक मदद कोई दान या कोई शारीरिक श्रम यही सेवा की सामान्य समडा हे। लेकिन क्या सेवा का अर्थ इतना सतही ह? सेवा का वास्तविक अर्थ हे अहं से मुक्ति।  जव तक '॰ कर्ता बना रहता हेःतव तक चास्तविक सेचा संभव नहीं ह। सेच। करने वाला  जव तक यह सोचता है कि"मे सेवा कर रहा तय तक बह सेवा के सार को नहीं समझ पाया हे। वास्तविक सेता तव होती ह जव करने वाला गायय हो जाता हे।  जेसे सूर्य प्रकाश देता हे, पर कभी नहीं सोचता " कि चह प्रकाश दे रहा हे।जेसो नदी बहती ह॰ पर कभी नही सोचती किबह किसी की 66 सेवा चही जो अहंसे मुक्त हो, प्यारा बुझा रही हे। यही सेचा का परम स्वरुप हे।  जहा कर्ता नःहो, केवल करुणा हो। सेवा का अर्थ हे स्वयं को मिटाकर स्वयंको मिटा कर॰ सबगें स्वयं को देखो में देखना।  বুমযৌ  यही सेचा हे॰ यही साथना ह यही पंथ ह।७७ जव तक 'दूसरा' हे॰ तब तक सेवा अथूरी ह।  जय आपःकिसी की सेवा करते हता यास्तय मे॰ आप स्वयं कीही सेचा कर रहे हें, क्योकि  बह ' दूसरा' आपसे अलग नहीं हे। बंदगी साहेब जी सप्रेम साहेब Nkp
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    ( सत्यनाम सत्यनाम ( सत्यनाम ) = జ్ధి # జ్ఞి # = = 8 गुरू पारस को अन्तरो , जानत हैं सब सन्त। वह लोहा कंचन करे ,ये करि लये महन्त। | गुरू में और पारस पव्थर में अंन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरू शिष्य को अपने समान महान बना लेता हैं। सुप्रभात सप्रेम साहेब बांदगी साहेब ( सत्यनाम सत्यनाम ( सत्यनाम ) = జ్ధి # జ్ఞి # = = 8 गुरू पारस को अन्तरो , जानत हैं सब सन्त। वह लोहा कंचन करे ,ये करि लये महन्त। | गुरू में और पारस पव्थर में अंन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरू शिष्य को अपने समान महान बना लेता हैं। सुप्रभात सप्रेम साहेब बांदगी साहेब
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