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गुरु या मजदूर? शिक्षा का सच | गोरखपुर | अब स्कूलों में टीचर नहीं, मजदूर चाहिए... वो मजदूर जो गधे की तरह लदता जाए। यह दर्द सिर्फ एक शिक्षिका का नहीं, बल्कि आज के पूरे शिक्षा तंत्र की कड़वी सच्चाई बन चुका है। युवा शिक्षिका अंकिता सिंह द्वारा टॉक्सिक एनवायरमेंट के कारण प्राइवेट स्कूल की नौकरी से इस्तीफा देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इस वीडियो ने लाखों शिक्षकों के दबे हुए दर्द को मानो जुबान दे दी है। वायरल वीडियो में अंकिता ने शिक्षा के नाम पर चल रहे गोरखधंधे और शोषण की सरेआम पोल खोली है। उन्होंने बताया कि कैसे एक टीचर की सैलरी में उनसे ग्रामर, कंप्यूटर, डांस टीचर के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और स्कूल के प्यून तक का काम लिया जाता था। चंद मिनट लेट होने पर 12-15 दिन की सैलरी काट ली जाती थी और स्कूल में मातृभाषा बोलने पर फाइन लगाया जाता था। अंकिता के इस बोल्ड कदम ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। 13 लाख से ज्यादा व्यूज वाले इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में हजारों शिक्षकों ने अपना दर्द बयां किया है। कमेंट्स में लोगों ने बताया कि कैसे प्राइवेट और यहां तक कि सरकारी स्कूलों में भी शिक्षकों को 'कोल्हू का बै #cg #छत्तीसगढ़ #📖छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल🖋️ #छत्तीसगढ़ शिक्षक #cg news ल' बना दिया गया है। मोटी फीस वसूलने वाले स्कूल अपने शिक्षकों को दिहाड़ी मजदूर से भी बदतर समझते हैं। तीन-तीन विषयों का बोझ, क्लेरिकल काम, और छुट्टी मांगने या बीमार पड़ने पर सीधे सैलरी काटना आज स्कूलों का अलिखित नियम बन गया है। बड़ा सवाल यह है कि जिस देश में गुरु को भगवान का दर्जा प्राप्त है, वहां शिक्षकों की इस बदहाली पर सिस्टम खामोश क्यों है?
cg - SAWEWS அ गोरखपुर  '(UP) 04 IBI NEWS UPDATE गुरू या मजदूरः शिक्षा का सच युवा शिक्षिका अंकिता सिंह द्वारा नौकरी छोड़ने का वायरल वीडियो खोल रहा स्कूलों की पोल Follow Us On: SANews chhattisgarh @SANewsChannelcG SANewsin SAWEWS அ गोरखपुर  '(UP) 04 IBI NEWS UPDATE गुरू या मजदूरः शिक्षा का सच युवा शिक्षिका अंकिता सिंह द्वारा नौकरी छोड़ने का वायरल वीडियो खोल रहा स्कूलों की पोल Follow Us On: SANews chhattisgarh @SANewsChannelcG SANewsin - ShareChat