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#गजेंद्र मोक्ष गजेंद्र मोक्ष' की यह अत्यंत प्रभावशाली और प्रसिद्ध घटना मुख्य रूप से श्रीमद्भागवत पुराण में मिलती है। जब सरोवर में एक शक्तिशाली मगरमच्छ (ग्राह) ने हाथी (गजेंद्र) का पैर मजबूती से पकड़ लिया, तब गजेंद्र ने उससे छूटने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। लेकिन समय बीतने के साथ गजेंद्र का शारीरिक बल 'हीन' यानी कमज़ोर पड़ने लगा। जब उसे अहसास हुआ कि उसका अपना पराक्रम और उसके साथी उसे नहीं बचा सकते, तब उसने अपना अहंकार त्याग कर ईश्वर को पुकारा। जैसे ही गजेंद्र ने परम व्याकुलता और 'दीन' (असहाय) भाव से भगवान विष्णु को पुकारा, प्रभु से रहा न गया। वे इतने वेग से दौड़े कि उन्होंने पैरों में खड़ाऊँ (पादुका) पहनने तक का समय नहीं लिया और 'नंगे चरण' ही वैकुंठ से भाग पड़े। भक्त की पुकार सुनते ही भगवान ने अपनी गरिमा और आराम की चिंता छोड़ दी और तुरंत प्रकट होकर अपने भक्त की रक्षा की।
गजेंद्र मोक्ष - ग्राह गहा जब पाव को , কা নল ৪যী आये बिन पादुका , G भक्त अति दीन ग्राह गहा जब पाव को , কা নল ৪যী आये बिन पादुका , G भक्त अति दीन - ShareChat