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#*let us understand our religion #points to ponder #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #islam guide us in every field of life #Islam and We
*let us understand our religion - 20/6/26 अफसोस हम पढ़ते हैं दूसरों को भेजते भी है लेकिन अमल नहीं करते। *रावीः* हज़रत अबुल अहवस जश्मी रज़ियल्लाहु अन्हु अपने वालिद से रिवायत करते हैंः मैंने अर्ज़ कियाः **যা रसूलल्लाह > मैं एक 8;!*46 !<HISgfத शख्स के यहाँ गया, उसने मेरी मेहमानी नहीं की - अब वह मेरे पास आए तो*्क्या मैं उसकी मेहमानी करूँ या उसे वैसा ही बदला दूँ?* आप ग७क ने इरशाद फ़रमायाः *"तुम उसकी मेहमानी करो।" हवाला / रेफरेंस जामे तिर्मिज़ी , हदीस नंबरः २००६ 20/6/26 अफसोस हम पढ़ते हैं दूसरों को भेजते भी है लेकिन अमल नहीं करते। *रावीः* हज़रत अबुल अहवस जश्मी रज़ियल्लाहु अन्हु अपने वालिद से रिवायत करते हैंः मैंने अर्ज़ कियाः **যা रसूलल्लाह > मैं एक 8;!*46 !<HISgfத शख्स के यहाँ गया, उसने मेरी मेहमानी नहीं की - अब वह मेरे पास आए तो*्क्या मैं उसकी मेहमानी करूँ या उसे वैसा ही बदला दूँ?* आप ग७क ने इरशाद फ़रमायाः *"तुम उसकी मेहमानी करो।" हवाला / रेफरेंस जामे तिर्मिज़ी , हदीस नंबरः २००६ - ShareChat