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divyansh Kushwaha - Author on ShareChat
divyansh Kushwaha
1K views • 3 months ago
#कबीर अमृत वाणी🙏🙏
कबार JNI वाणी कबीर , हरि की भक्ति बिन, धिक जीवन संसार | క్తతీ धूवें जैसा धौलहरा , जात न लागै बार। | కైక Cullus 719680/825  Sant Rampal li Maharaj Jagat GuruRampalliorg कबार JNI वाणी कबीर , हरि की भक्ति बिन, धिक जीवन संसार | క్తతీ धूवें जैसा धौलहरा , जात न लागै बार। | కైక Cullus 719680/825  Sant Rampal li Maharaj Jagat GuruRampalliorg
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  • niytiji - Author on ShareChat
    niytiji
    #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌞 Good Morning🌞 #संत कबीर अमृत वाणी #कबीर अमृत वाणी🙏🙏 #❤️जीवन की सीख
    राम राम जी से, कुछ ना मिले. पुजने" 11 पत्थर पढ़नें से मिले "ग्यान "पुस्तक [[ 1 "मंदिरजाने से अगर "भगवान [| मीले तो "पुजारी 1 creatior 10 आपसे क्युं मांगे "दान" / संत कबीर राम राम जी से, कुछ ना मिले. पुजने" 11 पत्थर पढ़नें से मिले "ग्यान "पुस्तक [[ 1 "मंदिरजाने से अगर "भगवान [| मीले तो "पुजारी 1 creatior 10 आपसे क्युं मांगे "दान" / संत कबीर
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  • ꧁☬☬꧂ - Author on ShareChat
    ꧁☬🅳🅴🅴🅿☬꧂
    #कबीर अमृत वाणी🙏🙏
    बीर वाणा- कबीर , माला फेरत जुग भया , फिरा न मन का फेर | कर का मनका डार 4 मन का मनका फेर। । भावार्थः कबीर जी अपनी उपरोक्त वाणी के माध्यम से उन लोगों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो लम्बे समय तक हाथ में माला तो घमाते है॰ पर उनके मन cht की नहीं बदलता, उनके मन भाव नहीं होती। शांत ৪লখলে कबीर जी ऐसे व्यक्ति को कहते हैं कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन को आडंबरों सांसारिक से हटाकर भक्ति में लगाओ। बीर वाणा- कबीर , माला फेरत जुग भया , फिरा न मन का फेर | कर का मनका डार 4 मन का मनका फेर। । भावार्थः कबीर जी अपनी उपरोक्त वाणी के माध्यम से उन लोगों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो लम्बे समय तक हाथ में माला तो घमाते है॰ पर उनके मन cht की नहीं बदलता, उनके मन भाव नहीं होती। शांत ৪লখলে कबीर जी ऐसे व्यक्ति को कहते हैं कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन को आडंबरों सांसारिक से हटाकर भक्ति में लगाओ।
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  • kusum - Author on ShareChat
    kusum
    🌹 #कबीर अमृत वाणी🙏🙏 #सु प्रभात संदेश🌹🌹🙏
    रामनाम कड़वा लगे , मीठे लागे दाम। दुविधा मे दोनो गये, माया मिली न राम।। శా శౌ रामनाम कड़वा लगे , मीठे लागे दाम। दुविधा मे दोनो गये, माया मिली न राम।। శా శౌ
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  • kusum - Author on ShareChat
    kusum
    🌹 #कबीर अमृत वाणी🙏🙏
    पूजे हरि मिले, पाथर तो मैं पूजूँ पहाड़ घर की चाकी कोई न पूजै, जाको पीस खाये संसार संत कबीरदास m k nInd,nn rnnn ాా  ా  पूजे हरि मिले, पाथर तो मैं पूजूँ पहाड़ घर की चाकी कोई न पूजै, जाको पीस खाये संसार संत कबीरदास m k nInd,nn rnnn ాా  ా
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