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212 212 212 212
कुछ मोहब्बत का मेरी सिला दीजिये
जाम नज़रो के अपने पिला दीजिये
कर ले मकबूल चाहत मेरी जाने जाँ
दिल को मेरे न इतनी सजा दीजिये
इश्क में तेरे मगलूब हूँ ऐ सनम
अपने आगोश में अब सुला दीजिये
दिल में तन्हाई चुभती रही है मेरे
पास आ कर गले से लगा दीजिये
तीरगी में कदम लड़खड़ा जायें ना
ज़िन्दगी से अंधेरे मिटा दीजिये
छुप के रोता रहा हूँ तेरी याद में
आरजू अपने दिल की बता दीजिये
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
20/4/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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