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212 212 212 212
खुशियों को चुरा कर खिजाँ ले गई
खुशबुओं को उड़ा कर हवा ले गई
जो बचा था मेरे पास थोड़ा बहुत
वक्त के आंधियो की घटा ले गई
फूल मुरझा गये ज़िन्दगी के सभी
साथ अपने वो सारी फिजां ले गई
कैसे लिखता गज़ल प्यारपे उसके मैं
दिल- ए-जज्बा मिटाकर वफ़ा ले गई
दे रहीं धड़कने भी सदाएं मेरी
हिज्रे गम दे के नामों निशां ले गई
कार गर हुई ना कोई हम पे दवा
बद्दुआ हर दुआ को बहा ले गई
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
18/6/2018 #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️