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कबीर दास (साहेब) - Author on ShareChat
कबीर दास (साहेब)
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#🗣कबीर अमृतवाणी📢
रात भक्ती सदेश সহীন,' राम सरीखे राम हैं, संत सरीखे संत नाम सरीखा नाम है, नहीं आदि नहीं अंत। | कविर्देव प्रभुंमध्ये समर्थ प्रभु हेच कल्याणकारक आहेत. (साई म्हणजे मालक प्रभु ) संतांमध्ये तत्त्वदर्शी संत हेच उद्धार करणारे & आहेत. नामांमध्ये सत्यनाम तसेच सारनाम हेच मोक्षाकरीता ಕ್ಲಿ आहेत , तसेच परमात्मा यांच्या शक्तीची कोणतीही सीमा नाही. वेदांमध्ये (कविरमितौजा ) अर्थात कविर्देव (अमित ) + असिमित (औजा ) शक्तीशाली आहेत. & ٤ संत रामपाल जी मह्याराज % ljimarathisatsang Sant Hampal JiMarathi Satsang Sant Rampal Ji Marathi Satsang @MarathiSatsang @santrampal रात भक्ती सदेश সহীন,' राम सरीखे राम हैं, संत सरीखे संत नाम सरीखा नाम है, नहीं आदि नहीं अंत। | कविर्देव प्रभुंमध्ये समर्थ प्रभु हेच कल्याणकारक आहेत. (साई म्हणजे मालक प्रभु ) संतांमध्ये तत्त्वदर्शी संत हेच उद्धार करणारे & आहेत. नामांमध्ये सत्यनाम तसेच सारनाम हेच मोक्षाकरीता ಕ್ಲಿ आहेत , तसेच परमात्मा यांच्या शक्तीची कोणतीही सीमा नाही. वेदांमध्ये (कविरमितौजा ) अर्थात कविर्देव (अमित ) + असिमित (औजा ) शक्तीशाली आहेत. & ٤ संत रामपाल जी मह्याराज % ljimarathisatsang Sant Hampal JiMarathi Satsang Sant Rampal Ji Marathi Satsang @MarathiSatsang @santrampal
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  • AP advait - Author on ShareChat
    AP advait 🔥
    कबीर साहब 🙏🏻❤️ #sant Kabir vani #🙏Sant Kabir☺ #realty of life #Aachrya parsant #Life Truth
    चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोय | दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय || कबीर साहब~~ NN चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोय | दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय || कबीर साहब~~ NN
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    कबीर दास (साहेब)
    #🗣कबीर अमृतवाणी📢
    काम बिगाड़े भक्ति को , क्रोध बिगाड़े ज्ञान 1 लोभ बिगाड़े त्याग को , मोह बिगाड़े ध्यान ११ कबीर साहेब काम बिगाड़े भक्ति को , क्रोध बिगाड़े ज्ञान 1 लोभ बिगाड़े त्याग को , मोह बिगाड़े ध्यान ११ कबीर साहेब
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    कबीर दास (साहेब)
    #🗣कबीर अमृतवाणी📢
    মন যাটন जो तू चाहे मुक्ति को, छोड़ दे सबकी आस| मुक्त ही जैसा हो रहे, सब कुछ तेरे पास II 3থ der कबीर साहेव कहते हे कि यदि आप मुक्ति (जन्म मरण के से छुटकारा) पाना चाहते हैं, तो सबसे पहले दुनिया की सभी आसक्तियॉ, इच्छाएं और अपेक्षाएँ त्याग दें। जब मनुष्य भीतर से मुक्त हो जाता है और परमात्मा में एकरूप हो जाता है, तब उसे वह सब प्राप्त हो जाता है जिसकी वह खोज करता है, क्योंकि वह सब कुछ परमात्मा के पास पहले से ही विद्यमान है। कबीर भजन ज्ञान कबीर वाणी कबीर वाणी, सच्चा ज्ञान जीवन का सच्चा पहचान कवारभनन ण মন যাটন जो तू चाहे मुक्ति को, छोड़ दे सबकी आस| मुक्त ही जैसा हो रहे, सब कुछ तेरे पास II 3থ der कबीर साहेव कहते हे कि यदि आप मुक्ति (जन्म मरण के से छुटकारा) पाना चाहते हैं, तो सबसे पहले दुनिया की सभी आसक्तियॉ, इच्छाएं और अपेक्षाएँ त्याग दें। जब मनुष्य भीतर से मुक्त हो जाता है और परमात्मा में एकरूप हो जाता है, तब उसे वह सब प्राप्त हो जाता है जिसकी वह खोज करता है, क्योंकि वह सब कुछ परमात्मा के पास पहले से ही विद्यमान है। कबीर भजन ज्ञान कबीर वाणी कबीर वाणी, सच्चा ज्ञान जीवन का सच्चा पहचान कवारभनन ण
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    कबीर दास (साहेब)
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    সয ম্ভী ঝনী ৪ীড় করী संत सताए तीनों जाही , तेज बल और वंश| ऐसे ऐसे कई रावण, कौरव और कंस। गए, शब्दार्थ भावार्थ जो संत को दुख देता है, जो भी व्यक्ति संत को सताता है॰ মন মনাৎ अपमान करता हि। उसका तेज , बल और वंश - ये तीनों तीनों जाही - उसके 3 चीजें नष्ट हो जाती हैं। नष्ट हा जाते हैं। मान-सम्मान , इज्जत , कीर्ति। तेज इतिहास गवाह है शरीर का बल, राज्य का बल, च्ल कौरच, कंस जैसे AICu ঋন-হাণিন [ बड़े-बड़े भी मिट गए। कुल, संतान , खानदान।  বহা इतिहास से 3 प्रमाण २ कौरव सावण  कस -मुनियों को चहुत सताया।  दुर्यौँधन ने सभा में द्रोपदी का चीर हरण किया।  कस ने देवकी वसुदेव को कारागार में रख्ा रावणने ऋपि विदुर जी का अपमान किया।  निर्दोष बालकों की ढत्या करवाई। सीता माता रुपी " संत " काहरण किया। নখা परिणामः परिणामः পহিতাম: सोने की लका  लाख पुत्र सवा लाख नाती। १०० भाई मारे गए भगवान श्रीकृष्ण के हाथों १० हजार हार्थियों फा चल।  रस्तिनापुर का तेज गया, उसका अंत हुआ। पूरा राक्षस चंश  सव खत्म। कौरव वंश समाप्त। श्रीमद्धनगवदीता प्रमाण कबीर साहेब जी की चाणी गरुड़ पुराण प्रमाण হীযী সুনা,  अध्याय १६ वैद्य मुवा হলাক 19-20 पुराण के अनुसार गरुड  तानहं द्रिपतः क्रूरनू संसेषु नराधमान्।  मुवा सकल संसार। संत की निंदा करने वाले क्षिपाम्यजसमशुभानासुरीप्देव योनिषु।१  एक कवीरा ना मुवा, को २१ प्रकार के भावार्थः जाके राम आधार।। नरक भोगने पडते हैं। এরম ম ঐপ কনে বাল ৪,: जो कूर উছ্ছ 3াম  वेअपने कर्मी के कारण वार्चार Ha: GஎaHd अघोगति को प्राप्त होते हें। भगवान से चैर। Fas तुलसीदास जी सच्चा संत वह हे जो शास्त्रसम्मत सत्य का उपदेश देकर जीवों के कल्याण का मार्ग चताता है। ऐसे संतों का सम्मान करना संत समागम हरि कथा , और उनके सत्संग से ज्ञान प्राप्त करना मानव जीवन के लिए हितकारी है। तुलसी दुर्लभ दोय।। अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारना। nಹl 31 1 = संतों का सम्मान करें सत्संग करें जीवन सफल बनाएं। सत साहब সয ম্ভী ঝনী ৪ীড় করী संत सताए तीनों जाही , तेज बल और वंश| ऐसे ऐसे कई रावण, कौरव और कंस। गए, शब्दार्थ भावार्थ जो संत को दुख देता है, जो भी व्यक्ति संत को सताता है॰ মন মনাৎ अपमान करता हि। उसका तेज , बल और वंश - ये तीनों तीनों जाही - उसके 3 चीजें नष्ट हो जाती हैं। नष्ट हा जाते हैं। मान-सम्मान , इज्जत , कीर्ति। तेज इतिहास गवाह है शरीर का बल, राज्य का बल, च्ल कौरच, कंस जैसे AICu ঋন-হাণিন [ बड़े-बड़े भी मिट गए। कुल, संतान , खानदान।  বহা इतिहास से 3 प्रमाण २ कौरव सावण  कस -मुनियों को चहुत सताया।  दुर्यौँधन ने सभा में द्रोपदी का चीर हरण किया।  कस ने देवकी वसुदेव को कारागार में रख्ा रावणने ऋपि विदुर जी का अपमान किया।  निर्दोष बालकों की ढत्या करवाई। सीता माता रुपी " संत " काहरण किया। নখা परिणामः परिणामः পহিতাম: सोने की लका  लाख पुत्र सवा लाख नाती। १०० भाई मारे गए भगवान श्रीकृष्ण के हाथों १० हजार हार्थियों फा चल।  रस्तिनापुर का तेज गया, उसका अंत हुआ। पूरा राक्षस चंश  सव खत्म। कौरव वंश समाप्त। श्रीमद्धनगवदीता प्रमाण कबीर साहेब जी की चाणी गरुड़ पुराण प्रमाण হীযী সুনা,  अध्याय १६ वैद्य मुवा হলাক 19-20 पुराण के अनुसार गरुड  तानहं द्रिपतः क्रूरनू संसेषु नराधमान्।  मुवा सकल संसार। संत की निंदा करने वाले क्षिपाम्यजसमशुभानासुरीप्देव योनिषु।१  एक कवीरा ना मुवा, को २१ प्रकार के भावार्थः जाके राम आधार।। नरक भोगने पडते हैं। এরম ম ঐপ কনে বাল ৪,: जो कूर উছ্ছ 3াম  वेअपने कर्मी के कारण वार्चार Ha: GஎaHd अघोगति को प्राप्त होते हें। भगवान से चैर। Fas तुलसीदास जी सच्चा संत वह हे जो शास्त्रसम्मत सत्य का उपदेश देकर जीवों के कल्याण का मार्ग चताता है। ऐसे संतों का सम्मान करना संत समागम हरि कथा , और उनके सत्संग से ज्ञान प्राप्त करना मानव जीवन के लिए हितकारी है। तुलसी दुर्लभ दोय।। अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारना। nಹl 31 1 = संतों का सम्मान करें सत्संग करें जीवन सफल बनाएं। सत साहब
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    कबीर दास (साहेब)
    #🗣कबीर अमृतवाणी📢
    सत साहेब कबीर प्रसिद्ध दोहा कबीर साहेब जी का साहब काम , क्रोध , मद , लोभ की। जब लग घट में खान। । कह्वां पंडिता | कह्यां मूर्ख दोनों एक समान। | कोध काम है कि जब तक मनुष्य के अर्थ इसका हृदय या शरीर रूपी घर ( घट ) में काम , क्रोध , मद ( अहंकार ) और लोभ  लोभ जैसे दुर्गुणों का भंडार रहता है, HG तब तक ज्ञानी ( पंडित ) और अज्ञानी (मूर्ख) दोनों एक समान हैं। किताबी ज्ञान का कोई महत्त नहीं है मूर्ख और पंडित यदि मन इन बुराइयों से मुक्त न हो। दाना एक समान दोहे का मुख्य संदेश (हदय /शरीर ) मूर्ख और पंडित वास्त्वविक ज्ञान C खान वाहरी ज्ञान या असली ज्ञानी इन युरे जिव तक भन के अज्ञान से फर्क भीतर ये विकार या संत बही ह गुरणों का नहीं पडता  जो इन विकारों  छिपे हें। आंतरिक स्थिति खजाना या खोत।  दोनों की एक का त्याग कर दे। जिसी होती हे। पहले मन के विकारों को त्यागें , तभी सच्चा ज्ञान और मोक्ष संभव है। अतः मन को निर्मल बनाओ , विकारों से मुक्त हो जाओ , परमात्मा को पाओ। মন মEন सत साहेब कबीर प्रसिद्ध दोहा कबीर साहेब जी का साहब काम , क्रोध , मद , लोभ की। जब लग घट में खान। । कह्वां पंडिता | कह्यां मूर्ख दोनों एक समान। | कोध काम है कि जब तक मनुष्य के अर्थ इसका हृदय या शरीर रूपी घर ( घट ) में काम , क्रोध , मद ( अहंकार ) और लोभ  लोभ जैसे दुर्गुणों का भंडार रहता है, HG तब तक ज्ञानी ( पंडित ) और अज्ञानी (मूर्ख) दोनों एक समान हैं। किताबी ज्ञान का कोई महत्त नहीं है मूर्ख और पंडित यदि मन इन बुराइयों से मुक्त न हो। दाना एक समान दोहे का मुख्य संदेश (हदय /शरीर ) मूर्ख और पंडित वास्त्वविक ज्ञान C खान वाहरी ज्ञान या असली ज्ञानी इन युरे जिव तक भन के अज्ञान से फर्क भीतर ये विकार या संत बही ह गुरणों का नहीं पडता  जो इन विकारों  छिपे हें। आंतरिक स्थिति खजाना या खोत।  दोनों की एक का त्याग कर दे। जिसी होती हे। पहले मन के विकारों को त्यागें , तभी सच्चा ज्ञान और मोक्ष संभव है। अतः मन को निर्मल बनाओ , विकारों से मुक्त हो जाओ , परमात्मा को पाओ। মন মEন
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  • कबीर दास (साहेब) - Author on ShareChat
    कबीर दास (साहेब)
    #🗣कबीर अमृतवाणी📢 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇
    कबीर अमृतवाणी, आध्यात्मिकता
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  • sing is king - Author on ShareChat
    sing is king
    #sant Kabir vani #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🕉 शिव भजन🙏
    कबीर यह मन लालची , समझै नाहि गवार। भजन करन को आलसी खाने को तैयार। | कबीर यह मन लालची , समझै नाहि गवार। भजन करन को आलसी खाने को तैयार। |
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  • कबीर दास (साहेब) - Author on ShareChat
    कबीर दास (साहेब)
    #🗣कबीर अमृतवाणी📢
    91VEAR AGU नैन खुले ढो दर्शन हो होठ खुले तो कीर्तन हो। याद रखु सतगुरू तेरे नाम को मन भटके तो सुमिरन हो। | 91VEAR AGU नैन खुले ढो दर्शन हो होठ खुले तो कीर्तन हो। याद रखु सतगुरू तेरे नाम को मन भटके तो सुमिरन हो। |
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  • k chandrakar jee - Author on ShareChat
    k chandrakar jee
    #🗣कबीर अमृतवाणी📢 #🙏सुविचार📿 #❤️जीवन की सीख #☝आज का ज्ञान #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
    कबीरा बात गरीब की सच माने ना कोय, , की झूठ में, धनवान हांजी हां जी होय! ! कबीरा बात गरीब की सच माने ना कोय, , की झूठ में, धनवान हांजी हां जी होय! !
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