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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - शादी आज मैंने एक शादी देखी जिसमें बारात में नाचते लोग देखे , सीना चौड़ा किए दुल्हे को देखा देखा सजी हुई दुल्हन को । साथ में देखा उस दहेज के ढेर को जो भीगा था एक बाप की पूरी जिंदगी के पसीने से । जो चमक रहा था मां के बिके गहनों से। पुनः , मैंने दूल्हे को देखा दहेज को निहारते हुए निहारते हुए , देखी उसकी चमकती आंखें । ऐसे लगा , मानो कुछ गिर रहा है मैंने उसके गिरते आत्मसम्मान को देखा सच कहूं , तो मैंने नहीं देखी कोई शादी मैंनेदेखा सौदा सौदा, दहेज के बदले स्वाभिमान का और सिंदर के बदले सपनों का शादी आज मैंने एक शादी देखी जिसमें बारात में नाचते लोग देखे , सीना चौड़ा किए दुल्हे को देखा देखा सजी हुई दुल्हन को । साथ में देखा उस दहेज के ढेर को जो भीगा था एक बाप की पूरी जिंदगी के पसीने से । जो चमक रहा था मां के बिके गहनों से। पुनः , मैंने दूल्हे को देखा दहेज को निहारते हुए निहारते हुए , देखी उसकी चमकती आंखें । ऐसे लगा , मानो कुछ गिर रहा है मैंने उसके गिरते आत्मसम्मान को देखा सच कहूं , तो मैंने नहीं देखी कोई शादी मैंनेदेखा सौदा सौदा, दहेज के बदले स्वाभिमान का और सिंदर के बदले सपनों का - ShareChat