Chetan Rathore
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Chetan Rathore
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🏹 जय श्री सियाराम चन्द्र 🚩
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - शादी आज मैंने एक शादी देखी जिसमें बारात में नाचते लोग देखे , सीना चौड़ा किए दुल्हे को देखा देखा सजी हुई दुल्हन को । साथ में देखा उस दहेज के ढेर को जो भीगा था एक बाप की पूरी जिंदगी के पसीने से । जो चमक रहा था मां के बिके गहनों से। पुनः , मैंने दूल्हे को देखा दहेज को निहारते हुए निहारते हुए , देखी उसकी चमकती आंखें । ऐसे लगा , मानो कुछ गिर रहा है मैंने उसके गिरते आत्मसम्मान को देखा सच कहूं , तो मैंने नहीं देखी कोई शादी मैंनेदेखा सौदा सौदा, दहेज के बदले स्वाभिमान का और सिंदर के बदले सपनों का शादी आज मैंने एक शादी देखी जिसमें बारात में नाचते लोग देखे , सीना चौड़ा किए दुल्हे को देखा देखा सजी हुई दुल्हन को । साथ में देखा उस दहेज के ढेर को जो भीगा था एक बाप की पूरी जिंदगी के पसीने से । जो चमक रहा था मां के बिके गहनों से। पुनः , मैंने दूल्हे को देखा दहेज को निहारते हुए निहारते हुए , देखी उसकी चमकती आंखें । ऐसे लगा , मानो कुछ गिर रहा है मैंने उसके गिरते आत्मसम्मान को देखा सच कहूं , तो मैंने नहीं देखी कोई शादी मैंनेदेखा सौदा सौदा, दहेज के बदले स्वाभिमान का और सिंदर के बदले सपनों का - ShareChat
#🙏अक्षय तृतीया का महत्व🗣️📿 #🔔अक्षय तृतीया Coming Soon⏳ #📚कविता-कहानी संग्रह
🙏अक्षय तृतीया का महत्व🗣️📿 - ShareChat
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#📚कविता-कहानी संग्रह वरुथिनी एकादशी
📚कविता-कहानी संग्रह - वरूाथना एकादशा की हार्दिक शुभकामनाएँ १३ अप्रैल २०२६ वरूाथना एकादशा की हार्दिक शुभकामनाएँ १३ अप्रैल २०२६ - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं বীক্ক না পাহ তিমব্ধী ঐ মাঠী বুনিযা &#.. वा एक बूंद ऑख का पान। सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनो अलग पहचान बनाने को आदत है कितना भी गहरा जख्म दे कोई मुस्कुरानें की आदत है हमें . ওননা কী তসাণা इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूॅँ मै जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन किताब हूँ मैं. जो समझ गए उनके लिए பளி आँख से देखोगे तो खश पाओगे दिल से पछोगे तो दर्द का सैलाब हॅँ मैं रख सकों तो एक निशानी हं मैं अगर खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं॰ . रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं বীক্ক না পাহ তিমব্ধী ঐ মাঠী বুনিযা &#.. वा एक बूंद ऑख का पान। सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनो अलग पहचान बनाने को आदत है कितना भी गहरा जख्म दे कोई मुस्कुरानें की आदत है हमें . ওননা কী তসাণা इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूॅँ मै जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन किताब हूँ मैं. जो समझ गए उनके लिए பளி आँख से देखोगे तो खश पाओगे दिल से पछोगे तो दर्द का सैलाब हॅँ मैं रख सकों तो एक निशानी हं मैं अगर खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं॰ . - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
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00:32
#🙏श्री राम भक्त हनुमान🚩 #📚कविता-कहानी संग्रह हनुमान जन्मोत्सव
🙏श्री राम भक्त हनुमान🚩 - ShareChat
00:26
#🚩राम नवमी Status⏳ #📚कविता-कहानी संग्रह
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01:00
#📚कविता-कहानी संग्रह श्री कृष्ण कहते की....
📚कविता-कहानी संग्रह - समय के साथ हर चीज का बदलना तय है, देखते रहिए पहले यहां बस किसी का भन, फिर व्यवहार और फिर अन्त में बात करने का लहजा बदलेगा লিব इसलिए किसी के चिन्तन करना व्यर्थ है, कलियुग ` में जरूरत के हिसाब से क्योंकि इन्सान अपना रंग जरूर बदलेगा. ! समय के साथ हर चीज का बदलना तय है, देखते रहिए पहले यहां बस किसी का भन, फिर व्यवहार और फिर अन्त में बात करने का लहजा बदलेगा লিব इसलिए किसी के चिन्तन करना व्यर्थ है, कलियुग ` में जरूरत के हिसाब से क्योंकि इन्सान अपना रंग जरूर बदलेगा. ! - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह जय श्री कृष्णा 🙏
📚कविता-कहानी संग्रह - महानंदा या सम्ग्मोहिनी : ईंश्वरीय प्रेम की बासुरी कृष्ण की बांसुरी का संगीत इतना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने महर्षि दधीचि की आकर्षक था कि इसने न केवल मनुष्यों, बल्कि पशु पक्षी, पेड़ पौधे हड्डियों से यह बांसुरी बनाई थी और  भगवान श्रीकृष्ण को भेंट की थी। और नदियों तक को मोहित कर मानो पूरी दिया था। ऐसा लिगना था सृष्टि ईश्वरीय प्रेम की धुन में मंत्रमुग्ध हो गई हो। इसका संगीत ईश्वरीय प्रेम का प्रतीक था॰ कृष्ण की बांसुरी सृष्टि की एकता का प्रतीक है जो जाति, धर्मः लिंग या प्रजाति के भेदों से परे था। जैसे गोपियाँ कृष्ण के संगीत की ओर आकर्षित वैसे ही सभी आत्माएँ अंततः ईश्वर की ओर आकर्षित होती हैं। महानंदा या सम्ग्मोहिनी : ईंश्वरीय प्रेम की बासुरी कृष्ण की बांसुरी का संगीत इतना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने महर्षि दधीचि की आकर्षक था कि इसने न केवल मनुष्यों, बल्कि पशु पक्षी, पेड़ पौधे हड्डियों से यह बांसुरी बनाई थी और  भगवान श्रीकृष्ण को भेंट की थी। और नदियों तक को मोहित कर मानो पूरी दिया था। ऐसा लिगना था सृष्टि ईश्वरीय प्रेम की धुन में मंत्रमुग्ध हो गई हो। इसका संगीत ईश्वरीय प्रेम का प्रतीक था॰ कृष्ण की बांसुरी सृष्टि की एकता का प्रतीक है जो जाति, धर्मः लिंग या प्रजाति के भेदों से परे था। जैसे गोपियाँ कृष्ण के संगीत की ओर आकर्षित वैसे ही सभी आत्माएँ अंततः ईश्वर की ओर आकर्षित होती हैं। - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #🙏जय माता दी📿
📚कविता-कहानी संग्रह - Bhakti Official माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपः नवदुर्गा शैलपुत्री स्कदमाता ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा Suis सिद्धिदात्री कात्यायनी महागौरी कालरात्रि Bhakti Official माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपः नवदुर्गा शैलपुत्री स्कदमाता ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा Suis सिद्धिदात्री कात्यायनी महागौरी कालरात्रि - ShareChat