pandit mohandash sharma
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#कैंसर_का_एक_कारण_घर_का_वास्तुदोष_भी_होता_है_क्या_आपके_घर_में_भी_है_वास्तुदोष
By Pandit Mohandas Sharma 9257323913
जय श्री राम मित्रों हमारे द्वारा प्रस्तुत वस्तु से संबंधित जानकारी यदि आपको अच्छे लगे तो हमें फॉलो कीजिए लाइक शेयर और कमेंट जरुर कीजिए जिससे हमारा मनोबल बढ़ता रहे वैसे हमारा प्रयास हमेशा ही रहता है कि हम आपके लिए अच्छी और सच्ची जानकारी प्रस्तुत करते रहें
मित्रों बढ़ती कीमतों और घटते स्पेस के कारण अब घरों का निर्माण पुराने जमाने की तरह आयताकार प्लॉट्स में नहीं हो पाता है। कम स्पेस में ज्यादा सुविधाएं देने के लिए प्लॉट में जिस जगह जो उचित लगता है, बना दिया जाता है। ऐसे घरों में रहनेवाले लोगों को वास्तुदोष के कारण कई बार कैंसर जैसी बीमारी का भी सामना करना पड़ जाता है। वास्तु शास्त्र की विशेष पुस्तक विश्वकर्मा प्रकाश में इस चीज का वर्णन मिलता है इनके अनुसार घर का निर्माण कराते समय या घर खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखकर कैंसर रोग से बचाव का एक प्रयास किया जा सकता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में ऊर्जा का असंतुलन और प्रमुख दिशाओं का दूषित होना कैंसर जैसी गंभीर और लंबी बीमारियों का कारण बन सकता है। मुख्य रूप से दो दिशाओं—ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण)—में गंभीर वास्तु दोष होने पर इसका खतरा बढ़ता है।वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न अंगों को प्रभावित करने वाले कैंसर के मुख्य वास्तु दोष इस प्रकार हैं:
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में दोष: इस दिशा में शौचालय या रसोईघर होना, या इस कोने का कटा या दबा होना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है, जो कैंसर सहित कई असाध्य रोगों का कारण बनता है।
रक्त कैंसर: ईशान कोण के दूषित होने या नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में पानी की भूमिगत टंकी होने पर ब्लड कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।
ब्रेन कैंसर: घर का उत्तर-पश्चिम (वायव्य) और उत्तर-पूर्व हिस्सा ऊंचा हो, और दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा नीची या वहां पानी का स्रोत हो, तो यह ब्रेन कैंसर की वजह बन सकता है।
हार्मोन/यूट्रस कैंसर: उत्तर-पूर्व में दूषित स्थान के साथ-साथ दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में गड्ढा या भूमिगत पानी का स्रोत होने से महिलाओं में गर्भाशय या ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है।
मित्रों वास्तु शास्त्र केवल ऊर्जा के संतुलन की बात करता है। कैंसर एक चिकित्सीय और आनुवंशिक बीमारी है, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हमेशा योग्य डॉक्टरों से परामर्श लें।)क्या आप अपने घर के किसी विशिष्ट हिस्से (जैसे उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम) के वास्तु के बारे में जानना चाहते हैं, या आप इस बारे में कोई साधारण सुधार (Remedy) पूछना चाहते हैं?
बीमारी और वास्तु के बीच यह है संबंध
जगह की कमी, फिर जरूरत और डिजाइन के हिसाब से किसी जगह को ऊंचा और किसी जगह को नीचा बना दिया जाता है। इस कारण घर में नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का असंतुलन बन जाता है और कैंसर जैसी बीमारी का जन्म होने के कारण क्रिएट हो जाते हैं।
विस्तार
ऐसे ब्रेंन कैंसर की वजह बनता है वास्तु
अगर आपके घर का वायव्य कोण (उत्तर और पश्चिम दिशा का कोना) घर के बाकी हिस्सों से ऊंचा है तो आपके परिवार में इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही घर के अग्नेय कोण, नैऋत्य कोण (दक्षिण – पश्चिम का कोना) और दक्षिण दिशा में पानी का स्रोत होना भी इस बीमारी की वजह बना सकता है।
ब्लड कैंसर से बचने के लिए करें ऐसा
घर के नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी का स्रोत होना तथा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व का कोना) की तुलना में घर के अन्य कोणों का नीचा होना इस बीमारी की वजह हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर ध्यान रखें ये वास्तु टिप्स
घर की पूर्व दिशा और अग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण का कोना) में पानी का स्रतोत होना, जैसे-टंकी, कुंआ या बोरिंग नहीं होना चाहिए। तथा घर की पूर्व दिशा या अग्नेय कोण नीचा होने पर यह दिक्कत आ सकती है। साथ ही ईशान कोण होने पर भी यह बीमारी परेशान कर सकती है।
यूट्रस कैंसर को दक्षिण दिशा करती है प्रभावित
दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में भूमिगत टैंक का होना, इस दिशा और इस कोने का नीचा होना या बढ़ा हुआ होने पर यूट्रस कैंसर की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं।
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