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#कैंसर_का_एक_कारण_घर_का_वास्तुदोष_भी_होता_है_क्या_आपके_घर_में_भी_है_वास्तुदोष
By Pandit Mohandas Sharma 9257323913
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मित्रों बढ़ती कीमतों और घटते स्पेस के कारण अब घरों का निर्माण पुराने जमाने की तरह आयताकार प्लॉट्स में नहीं हो पाता है। कम स्पेस में ज्यादा सुविधाएं देने के लिए प्लॉट में जिस जगह जो उचित लगता है, बना दिया जाता है। ऐसे घरों में रहनेवाले लोगों को वास्तुदोष के कारण कई बार कैंसर जैसी बीमारी का भी सामना करना पड़ जाता है। वास्तु शास्त्र की विशेष पुस्तक विश्वकर्मा प्रकाश में इस चीज का वर्णन मिलता है इनके अनुसार घर का निर्माण कराते समय या घर खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखकर कैंसर रोग से बचाव का एक प्रयास किया जा सकता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में ऊर्जा का असंतुलन और प्रमुख दिशाओं का दूषित होना कैंसर जैसी गंभीर और लंबी बीमारियों का कारण बन सकता है। मुख्य रूप से दो दिशाओं—ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण)—में गंभीर वास्तु दोष होने पर इसका खतरा बढ़ता है।वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न अंगों को प्रभावित करने वाले कैंसर के मुख्य वास्तु दोष इस प्रकार हैं:
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में दोष: इस दिशा में शौचालय या रसोईघर होना, या इस कोने का कटा या दबा होना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है, जो कैंसर सहित कई असाध्य रोगों का कारण बनता है।
रक्त कैंसर: ईशान कोण के दूषित होने या नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में पानी की भूमिगत टंकी होने पर ब्लड कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।
ब्रेन कैंसर: घर का उत्तर-पश्चिम (वायव्य) और उत्तर-पूर्व हिस्सा ऊंचा हो, और दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा नीची या वहां पानी का स्रोत हो, तो यह ब्रेन कैंसर की वजह बन सकता है।
हार्मोन/यूट्रस कैंसर: उत्तर-पूर्व में दूषित स्थान के साथ-साथ दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में गड्ढा या भूमिगत पानी का स्रोत होने से महिलाओं में गर्भाशय या ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है।
मित्रों वास्तु शास्त्र केवल ऊर्जा के संतुलन की बात करता है। कैंसर एक चिकित्सीय और आनुवंशिक बीमारी है, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हमेशा योग्य डॉक्टरों से परामर्श लें।)क्या आप अपने घर के किसी विशिष्ट हिस्से (जैसे उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम) के वास्तु के बारे में जानना चाहते हैं, या आप इस बारे में कोई साधारण सुधार (Remedy) पूछना चाहते हैं?
बीमारी और वास्तु के बीच यह है संबंध
जगह की कमी, फिर जरूरत और डिजाइन के हिसाब से किसी जगह को ऊंचा और किसी जगह को नीचा बना दिया जाता है। इस कारण घर में नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का असंतुलन बन जाता है और कैंसर जैसी बीमारी का जन्म होने के कारण क्रिएट हो जाते हैं।
विस्तार
ऐसे ब्रेंन कैंसर की वजह बनता है वास्तु
अगर आपके घर का वायव्य कोण (उत्तर और पश्चिम दिशा का कोना) घर के बाकी हिस्सों से ऊंचा है तो आपके परिवार में इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही घर के अग्नेय कोण, नैऋत्य कोण (दक्षिण – पश्चिम का कोना) और दक्षिण दिशा में पानी का स्रोत होना भी इस बीमारी की वजह बना सकता है।
ब्लड कैंसर से बचने के लिए करें ऐसा
घर के नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी का स्रोत होना तथा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व का कोना) की तुलना में घर के अन्य कोणों का नीचा होना इस बीमारी की वजह हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर ध्यान रखें ये वास्तु टिप्स
घर की पूर्व दिशा और अग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण का कोना) में पानी का स्रतोत होना, जैसे-टंकी, कुंआ या बोरिंग नहीं होना चाहिए। तथा घर की पूर्व दिशा या अग्नेय कोण नीचा होने पर यह दिक्कत आ सकती है। साथ ही ईशान कोण होने पर भी यह बीमारी परेशान कर सकती है।
यूट्रस कैंसर को दक्षिण दिशा करती है प्रभावित
दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में भूमिगत टैंक का होना, इस दिशा और इस कोने का नीचा होना या बढ़ा हुआ होने पर यूट्रस कैंसर की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं।
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#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🙏 माँ वैष्णो देवी #🔯वास्तु दोष उपाय #🙏🏻गुरबानी #✝यीशु वचन
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#वास्तु_शास्त्र_के_अनुसार_सेप्टिक_टैंक_के_सर्वोत्तम_स्थान_जो_की_चित्र_में_आदर्श_गए_हैं #जानिए_सेफ्टीक_टैंक_का_संपूर्ण_वास्तु
By Pandit Mohandas Sharma 9257323913
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नमस्कार मित्रों सेप्टिक टैंक उत्तर दिशा को नव बराबर भागों में बांटकर तीसरे भाग एवं पश्चिम दिशा के भी तीसरे भाग में बनाना चाहिए जगह की कमी रहने पर वायव्य के मूल कौन से डेढ़ फीट छोड़कर उत्तरी वायव्य और पश्चिमी वायव्य की ओर बनाया जा सकता है अर्थात सेप्टिक टैंक को पश्चिमी वायव्य और उत्तरी वायव्य के पास मूल कोण को छोड़ते हुए बनाना चाहिए
जानिए सेफ्टी टैंक का उचित स्थान
सेप्टिक टैंक दक्षिण_पूर्व उत्तर_पूर्व या दक्षिण_पश्चिम कोने में ना रखें उत्तर दिशा में बना सेप्टिक टैंक धन एवं समृद्धि में कमी लाता है यदि इस दिशा में बनाना जरूरी हो जाए तो नॉर्मल रेमेडीज उपयोग करके बना सकते हैं ईशान कोण में हो तो आर्थिक विपन्नता के साथ-साथ मानसिक अशांति बीमारियां संतान सुख की कमी युवाओं को रोजगार की समस्या देता है आग्नेय कोण का सेफ्टी टैंक स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता है दक्षिण में हो तो जीवनसाथी के लिए हानिकारक होता है नैऋत कोण में होने पर घर के प्रमुख व्यक्ति के लिए अशुभ होता है और पश्चिम दिशा में होने पर मानसिक शांति को भंग करता है
सेप्टिक टैंक चारदीवारी या भवन की नींव से सट्टा नहीं होना चाहिए यह काम से कम एक या दो फीट दूर हो किंतु जमीन के तल से ऊंचा ना हो सेप्टिक टैंक के उत्तर या पूर्व में आउटलेट रखें
सेप्टिक टैंक की लंबाई पूर्व पश्चिम दिशा में चौड़ाई उत्तर दक्षिण दिशा में होनी चाहिए
जानिए अलग-अलग दिशाओं में सेप्टिक टैंक के प्रभाव
उत्तर दिशा_ मानसिक उद्विग्नता एवं विवेकशीलता में कमी तथा धन की हानि
ईशान कोण_ शिक्षा बुद्धिमत्ता आध्यात्मिक आत्मिक एवं व्यापार में नुकसान वंश वृद्धि में समस्या पुत्र संतान की चिंता युवाओं को रोजगार की समस्या घर में लाइलाज बीमारियां उत्पन्न होना
पूर्व दिशा _। मान सम्मान यश प्रतिष्ठा एवं स्वास्थ्य में कमी
अग्नि कोण _। घर की महिलाओं में बीमारी साथ ही धन हानि के संभावना घर की औरतों को ला इलाज बीमारियां
दक्षिण दिशा_ उत्साह ऊर्जा साहस एवं स्वास्थ्य की कमी
नैऋल कोण _ संघर्ष करने की क्षमता में कमी भाग्य एवं आयु में कमी
पश्चिमदिशा,_दांपत्य जीवन में नुकसान एवं साझेदारी के व्यवसाय में नुकसान
ब्रह्मस्थान_ जीवन अस्त-व्यस्त निर्णय लेने में परेशानी एवं दिमागी संतुलन में कमी
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Jai सांवरिया सेठ #🙏 माँ वैष्णो देवी #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺 #🔯वास्तु दोष उपाय #🙏🏻गुरबानी
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#चित्र_की_सहायता_से_जानिए_आपके_भवन_में_किस_जगह_पर_कौन_से_देवता_का_आधिपत्य_है
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मित्रों आज इस चित्र की सहायता से हम जानेंगे कि हमारे भवन में किस जगह पर कौन से देवता का आधिपत्य है और यदि वहां पर वास्तु दोष पाया जाता है तो वहां के देवता के द्वारा दी गई सजा ही हमें प्राप्त होती है
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#भूखंड_का_ईशान_कोण_कटा_हुआ_होना_बहुत_बड़ा_वास्तु_दोष_उत्पन्न_करता_है #जानिए_दोस्त_निवारण_के_उपाय
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मित्रों भूखंड का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) कटा होना एक गंभीर वास्तु दोष है। यह कोना देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान है। इसके कटे होने से मानसिक अशांति, आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याओं और वंश वृद्धि में रुकावट आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास में कमी जैसी समस्याएं आ सकती हैं। इसे दूर करने के लिए विशेष उपाय और ऊर्जा संतुलन की आवश्यकता होती है।
ईशान कोण कटे होने के प्रमुख प्रभाव:
स्वास्थ्य और वंशवृद्धि: अगली पीढ़ी के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और वंशवृद्धि रुक सकती है। युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ सकता है
आर्थिक और मानसिक: धन हानि, संपत्ति का नुकसान और भारी मानसिक तनाव।
पारिवारिक समस्या: घर के सदस्यों के बीच कलह और कानूनी मामलों में फँसने की संभावना।
वास्तु उपाय और उपचार:
जल तत्व की वृद्धि: ईशान कोण में साफ पानी से भरा तांबे का पात्र या छोटा फाउंटेन (Water fountain) रखें। ईशान कोण में अंडरग्राउंड वॉटर टैंक निर्मित करें
पिरामिड का उपयोग: अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह से वास्तु दोष निवारण के लिए चित्र अनुसार अष्टधातु के अभिमंत्रित ट्रिपल लेयर पिरामिड स्थापित करें।
ईशान यंत्र: घर के ईशान कोने में एक सक्रिय 'ईशान कोण यंत्र' या 'वास्तु यंत्र' लगाएँ।
स्वच्छता और प्रकाश: इस क्षेत्र को हमेशा साफ, हल्का और अधिक से अधिक खुला रखें। यहाँ बहुत तेज रोशनी (लाइट) जलाकर रखें।
भारी वस्तु न रखें: कटे हुए ईशान कोण में शौचालय, भारी फर्नीचर या सीढ़ियों का निर्माण बिल्कुल न करें।
नोट: किसी भी गंभीर दोष के लिए अनुभवी वास्तु सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
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#जानिए_बहु_मंजिला_इमारतों_में_आदर्श_फ्लैट_का_संपूर्ण_वास्तु
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नमस्कार मित्रों एक आदर्श फ्लैट के लिए वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर-पूर्व (N-E) दिशा में होना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। रसोई दक्षिण-पूर्व (S-E) में, मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम (S-W) में, और पूजा घर उत्तर-पूर्व में होना शुभ है। फ्लैट चौकोर या आयताकार होना चाहिए और मुख्य द्वार सीधे लिफ्ट के सामने न हो। याद रहे फ्लैट का ईशान कोण कभी भी कटा हुआ नहीं होना चाहिए और अग्नि कोण बढ़ा हुआ नहीं होना चाहिए
फ्लैट के लिए मुख्य वास्तु टिप्स:
प्रवेश द्वार ( men Entrance): पूर्व, उत्तर, या उत्तर-पूर्व दिशा सर्वोत्तम है। दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व प्रवेश द्वार से बचें।
रसोई (Kitchen): दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) आदर्श स्थान है। यदि संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम विकल्प हो सकता है। खाना बनाते समय मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए।
बेडरूम (Bedroom): मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें।
पूजा घर (Pooja Room): उत्तर-पूर्व कोना (ईशान कोण) पूजा घर के लिए सबसे अच्छा है।
बाथरूम/टॉयलेट (Bathroom/Toilet): उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में बेहतर है। इसे उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में न बनाएं।
बालकनी (Balcony): उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की बालकनी शुभ है। दक्षिण या पश्चिम में भारी बालकनी से बचें।
आकार Shape: फ्लैट का आकार अनियमित न होकर आयताकार या वर्गाकार Square होना चाहिए। प्लेट का कोई भी कोना कटा हुआ नहीं होना चाहिए
वास्तु दोष के उपाय: यदि वास्तुदोष है, तो क्रिस्टल, छोटे पौधे, या सही रंगों (जैसे हल्के रंग) का उपयोग करें।
न खरीदें ऐसे फ्लैट:
दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा में मुख्य द्वार वाला फ्लैट
सीढ़ियां या लिफ्ट के सामने मुख्य द्वार वाला फ्लैट
ऐसा फ्लैट जिसका ढलान दक्षिण-पश्चिम की ओर हो।
टी-जंक्शन (T-junction) पर स्थित फ्लैट।
मित्रों यदि आपने पहले से ही फ्लैट खरीद के रखा है और वह फ्लैट आपको लगता है की वस्तु के अनुसार सही नहीं है और तोड़फोड़ भी संभव नहीं है तो आप वहां का पूरा नक्शा हमारे व्हाट्सएप पर भेज कर मात्र ₹500 मैप रीडिंग चार्ज में बिना तोड़फोड़ 100% सफल अभिमंत्रित यंत्रों की रेमेडीज की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं
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#दक्षिण_दिशा_में_मकान_के_सामने_रोड_का_T_पॉइंट_वास्तु_शास्त्र_में_शुभ_नहीं_माना_जाता_है #जानिए_T_पॉइंट_का_संपूर्ण_वास्तु
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दक्षिण दिशा में टी-पॉइंट T-point या वीधी शूल वाला प्लॉट वास्तु के अनुसार आमतौर पर मिश्रित या अशुभ माना जाता है, क्योंकि यहां से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सीधा घर में प्रवेश करता है। विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम (SW) दिशा का टी-पॉइंट स्वास्थ्य (लीवर, किडनी) और धन की हानि कर्ज की स्थिति के लिए बहुत हानिकारक माना जाता है।
दक्षिण दिशा के टी-पॉइंट प्लॉट के लिए वास्तु उपाय:
प्रवेश द्वार: मुख्य द्वार T बिंदु के बिल्कुल सामने नहीं होना चाहिए
सकारात्मक ऊर्जा: दक्षिण की दीवार को मजबूत बनाएं, उस पर भारी निर्माण करें, और वहां पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या अभिमंत्रित सुरक्षा यंत्र लगाएं।
निर्माण: प्लॉट में निर्माण दक्षिण-पश्चिम में भारी और उत्तर-पूर्व में हल्का होना चाहिए।
सड़क से सुरक्षा: घर के मुख्य द्वार के सामने एक ऊंची और मजबूत दीवार या बाधा boundary बनाएं, जो सीधे सड़क को न देखे।
वैकल्पिक उपाय: वास्तु विशेषज्ञ की सलाह से अभिमंत्रित अष्टधातु के ट्रिपल लेयर पिरामिड, क्रिस्टल या वेधी शूल के दोष को कम करने वाले यंत्र लगाएं।
यद्यपि दक्षिण-पूर्व का टी-पॉइंट कुछ स्थितियों में संतुलित किया जा सकता है, फिर भी दक्षिण-पश्चिम में टी-पॉइंट सबसे हानिकारक माना जाता है। यदि ऐसी स्थिति बन रही है तो अनुभव भी वस्तु विशेषज्ञ की सलाह से अभिमंत्रित यंत्रों की रेमेडीज अवश्य अपनानी चाहिए जिससे वास्तु दोष को कुछ हद तक काम किया जा सकता है
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#यदि_हमारा_रसोई_घर_सही_दिशा_में_नहीं_है_तो_हमें_घर_में_बहुत_सी_समस्याओं_का_सामना_करना_पड़ता_है #जानिए_आदर्श_रसोई_का_वास्तु
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नमस्कार मित्रों हमारे घर में रसोई एक ऐसी जगह है जहां प्रकृति के 5 तत्वों में से एक, आग रहती है। इस तत्व के लाभों को प्राप्त करने के लिए सही रसोई वास्तु प्लेसमेंट का अत्यधिक महत्व है, अन्यथा, रसोई दुर्घटनाओं से ग्रस्त हो सकती है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, रसोईघर के लिए आदर्श स्थान घर का दक्षिण-पूर्व कोना होता है. यह दिशा अग्नि से जुड़ी है और प्रचुरता और जीवन शक्ति का प्रतीक है.
रसोईघर से जुड़े कुछ और वास्तु टिप्स ये रहे:
* रसोई में काले, नीले, और ग्रे रंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
* रसोई में पीने का पानी, आरओ वगैरह उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.
* सिंक को उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए.
* इलेक्ट्रिक उपकरणों को दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए.
* रसोई में जल और अग्नि को एक सीधी रेखा में नहीं रखना चाहिए.
* रसोई में अनाज और अन्य चीज़ों का भंडारण उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में करना अच्छा माना जाता है.
* रसोई में कचरे के डिब्बे को घर के उत्तर-पश्चिम कोने में रखना चाहिए.
* रसोई के लिए आदर्श रंग पीला, नारंगी, गुलाबी और चॉकलेट हैं.
* रसोई में स्टील या लोहे के बर्तन के बजाय पीतल, तांबे, कांसे और चांदी के बर्तन होना चाहिए
वास्तु के अनुसार रसोई बनाने का महत्व
घर में पूजा कक्ष के बाद रसोई को सबसे पवित्र कमरा माना जाता है क्योंकि पोषण और भोजन की देवी मां अन्नपूर्णा यहीं निवास करती हैं। रसोई वह जगह है जहां हम अपना दैनिक भोजन तैयार करते हैं, वह भोजन जो हमें अपने दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए ऊर्जा देता है, हमारी भूख की बुनियादी जरूरत को पूरा करता है और हमें स्वस्थ और फिट रखता है।
उचित रसोई वास्तु प्लेसमेंट बीमारियों को आमंत्रित करने वाली नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर रखकर सकारात्मक माहौल के साथ एक स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करता है। वास्तु के अनुसार न बनाई गई रसोई वित्तीय बोझ, बीमारियों, पारिवारिक विवादों आदि को आमंत्रित करती हुई पाई गई है।
रसोई का स्थान:
रसोई वास्तु टिप्स के अनुसार, घर की दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व का क्षेत्र है, इसलिए, रसोई बनाने के लिए वह सबसे अच्छी जगह है।
रसोई के लिए आदर्श वास्तु दिशा उत्तर-पश्चिम दिशा है।
रसोई के स्थान के लिए उत्तर, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं से बचना चाहिए क्योंकि वास्तु के अनुसार इन्हें रसोई की दिशा के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।
बाथरूम और किचन को एक साथ रखने से बचना चाहिए क्योंकि यह वास्तु दोष माना जाता है।
प्रवेश द्वार :
उपयुक्त रसोई वास्तु टिप्स सुझाव देते हैं कि प्रवेश द्वार पश्चिम या उत्तर दिशा में हो। रसोई के प्रवेश द्वार के लिए यह सबसे शुभ दिशा मानी जाती है। यदि ये दिशाएं उपलब्ध न हों तो दक्षिण-पूर्वी दिशा का भी उपयोग किया जा सकता है।
गैस - चूल्हा :
रसोई के लिए वास्तु टिप्स सुझाव देते हैं कि गैस स्टोव को रसोई के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखा जाना चाहिए।
गैस चूल्हा इस प्रकार रखना चाहिए कि खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर हो।
दरवाजे और खिड़कियां :
आदर्श रूप से रसोईघर में प्रवेश के लिए केवल एक ही दिशा होनी चाहिए और एक-दूसरे के विपरीत दो दरवाजे कभी नहीं बनाने चाहिए। यदि दो दरवाजे हैं तो उत्तर या पश्चिम की ओर वाले दरवाजे को खुला रखना चाहिए और विपरीत दिशा वाले दरवाजे को बंद रखना चाहिए।
सही रसोई वास्तु के अनुसार, रसोई का दरवाजा दक्षिणावर्त दिशा में खुलना चाहिए ताकि समृद्धि को आमंत्रित किया जा सके। एन्टीक्लॉकवाइज दिशा में दरवाजा धीमी प्रगति और विलंबित परिणाम लाता है।
खिड़की का होना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सुविधाजनक बनाती है और साथ ही रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन और रोशनी की अनुमति देती है।
खिड़कियाँ रसोईघर के पूर्वी या दक्षिणी हिस्से में रखनी चाहिए ताकि सूर्य और हवा की किरणें आसानी से प्रवेश कर सकें।
यदि रसोई में दो खिड़कियां हैं, तो क्रॉस वेंटिलेशन की सुविधा के लिए छोटी खिड़की बड़ी खिड़की के सामने होनी चाहिए।
रसोई स्लैब:
रसोई के लिए वास्तु शास्त्र सुझाव देता है कि स्लैब ग्रेनाइट के बजाय काले संगमरमर या पत्थर से बना होना चाहिए।
किचन स्लैब का रंग किचन की दिशा पर भी निर्भर करता है।
यदि रसोईघर पूर्व दिशा में हो तो हरे या भूरे रंग का स्लैब सर्वोत्तम होता है।
यदि रसोईघर उत्तर-पूर्व में है तो पीला स्लैब आदर्श है।
दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई के लिए, रसोई वास्तु द्वारा भूरे, मैरून या हरे रंग की स्लैब की सिफारिश की जाती है।
यदि रसोईघर पश्चिम दिशा में है तो भूरे या पीले रंग का स्लैब आदर्श है।
उत्तर दिशा में रसोई के लिए, स्लैब हरे रंग का होना चाहिए, लेकिन वास्तु उत्तर दिशा में रसोई रखने से बचने की सलाह देता है।
रसोई सिंक:
आदर्श रूप से, रसोई सिंक को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जाना चाहिए।
सुनिश्चित करें कि सिंक को स्टोव के समानांतर या एक ही दिशा में नहीं रखा गया है क्योंकि, वास्तु के अनुसार, आग और पानी के तत्व एक-दूसरे का विरोध करते हैं और यदि एक साथ रखा जाता है तो नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हानिकारक प्रभावों को नकारने के लिए, रसोई वास्तु युक्तियों का सुझाव है कि सिंक और स्टोव के बीच एक बोन चाइना फूलदान रखें यदि एक साथ बनाया गया हो।
पीने का पानी:
पीने के पानी और बर्तनों के लिए उपकरणों को भी रसोई के अंदर रखा जाना चाहिए जैसा कि उचित रसोई वास्तु द्वारा सुझाया गया है।
रसोई वास्तु युक्तियों द्वारा पीने के पानी के स्रोतों को रखने के लिए घर के उत्तर-पूर्व या उत्तर कोने की सिफारिश की जाती है।
यदि उत्तर और उत्तर-पूर्व उपलब्ध नहीं हैं तो उन्हें पूर्व कोने में भी रखा जा सकता है।
रसोई उपकरण :
रसोई वास्तु टिप्स रेफ्रिजरेटर को या तो रसोई के दक्षिण-पश्चिम कोने में या किसी एक कोने में रखने का सुझाव देते हैं, लेकिन कभी भी उत्तर-पूर्व कोने में नहीं रखें।
वास्तु के अनुसार रसोई कभी भी अव्यवस्थित नहीं होनी चाहिए, इसलिए सभी बर्तनों को रसोई के दक्षिण या पश्चिम कोने में एक अलमारी में व्यवस्थित ढंग से व्यवस्थित करें।
रसोई के सभी बिजली के उपकरणों को आग्नेय कोण में रखना चाहिए और ईशान कोण में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे इन उपकरणों में खराबी आ जाती है।
किचन का रंग:
किचन वास्तु टिप्स रसोई के लिए हल्के रंगों की सलाह देते हैं।
वास्तु के अनुसार रसोई के रंग के रूप में लाल, हल्का गुलाबी, नारंगी और हरा जैसे रंगों का भी उपयोग किया जा सकता है।
गहरे रंगों का प्रयोग करने से बचें क्योंकि ये रसोई और उसके वातावरण को अंधकारमय बनाते हैं।
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