ShareChat
click to see wallet page
search
#🖋ग़ज़ल #📖 कविता और कोट्स✒️
🖋ग़ज़ल - अपनों के खयाल, उनका नज़रिया नहीं देखूंगा मैं प्यास तो होगी मगर दरिया नहीं देखूंगा मैं मिट्टी की खुशबू, सितारों का आंचल होगा, सजाया तो जाऊंगा , मगर आईना नहीं देखूंगा मैं अलविदा कहते हुए सब जाते हैं यूं ही, तो क्या हुआ अगर तेरा चेहरा नहीं देखूंगा मैं (aot | ) VGal 9 मैं इश्क़ : आबाद रखूं, तू मजबूरी ज़िंदा रख, फ़िक्र न कर अब तेरा रास्ता नहीं देखूंगा मैं खो जाऊंगा दुआओं में तेरी ख़ुशी मांगकर फिर एक दिन ये दुनिया नहीं देखूंगा मैं.. CLASSYPOETRY VIHAL BAIRAGI  अपनों के खयाल, उनका नज़रिया नहीं देखूंगा मैं प्यास तो होगी मगर दरिया नहीं देखूंगा मैं मिट्टी की खुशबू, सितारों का आंचल होगा, सजाया तो जाऊंगा , मगर आईना नहीं देखूंगा मैं अलविदा कहते हुए सब जाते हैं यूं ही, तो क्या हुआ अगर तेरा चेहरा नहीं देखूंगा मैं (aot | ) VGal 9 मैं इश्क़ : आबाद रखूं, तू मजबूरी ज़िंदा रख, फ़िक्र न कर अब तेरा रास्ता नहीं देखूंगा मैं खो जाऊंगा दुआओं में तेरी ख़ुशी मांगकर फिर एक दिन ये दुनिया नहीं देखूंगा मैं.. CLASSYPOETRY VIHAL BAIRAGI - ShareChat