sn vyas
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✴️ काशी : सनातन की शाश्वत राजधानी ✴️ "काशी के बिना भारत अधूरा है, और काशी के बिना मोक्ष भी अधूरा है!" चित्रपट में जो आप देख रहे हैं, वह मात्र एक नक्शा नहीं है — यह तो सनातन धर्म की आत्मा का चित्रण है। यह है मोक्षपुरी काशी — जहाँ हर गली, हर मंदिर, हर तट और हर धूल कण में शिव का ही वास है। यह जो मानचित्र आपके समक्ष है, वह 1914 ईस्वी में निर्मित एक दुर्लभ लकड़ी की छपाई (woodblock print) है, जो ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के 'अश्मोलीन संग्रहालय' में सुरक्षित है। यह केवल ऐतिहासिक नहीं, अपितु आध्यात्मिक भारत की एक अनमोल धरोहर है — काशी का पुरातन यात्रा-मानचित्र। ■ काशी : पृथ्वी का आदितीर्थ ● स्कन्द पुराण कहता है — "काश्याम् हि किल विश्वेशं प्राप्य ये मरणं ध्रुवम्। तेषां पुनर्जन्म नास्ति मम वाक्यं न संशयः॥" (जो काशी में मृत्यु को प्राप्त होता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता — यह स्वयं महादेव की वाणी है!) इस चित्र में आप देख सकते हैं कि गंगा जी मध्य भाग में बह रही हैं और उनके उत्तर में स्थित है काशी, जिसे अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है — अर्थात् वह भूमि जिसे स्वयं भगवान शिव ने कभी छोड़ा नहीं। चित्र के केंद्र में प्रतिष्ठित है — श्री काशी विश्वनाथ महादेव। यह वही मूल लिंग है जिसे "मांग शिवलिंग" कहा गया है, और जो स्वयंभू माने जाते हैं। इन शिवलिंगों की प्रतिष्ठा या तो देवताओं ने की थी या प्राचीन ऋषियों ने — और ये सभी सृष्टि की आदि स्थिति से संबंधित हैं। ● तंत्र, तीर्थ और तत्व की त्रिवेणी :--- इस चित्र में केवल जियो-ग्राफिकल स्थान नहीं हैं — यह एक तांत्रिक मंडल भी है, जिसमें अष्ट विनायक, अष्ट भैरव, दण्डपाणि, कालभैरव, विश्वेश्वर, अन्नपूर्णा, लोलार्क कुण्ड, मणिकर्णिका, हरिश्चन्द्र घाट आदि की दिव्य स्थिति अंकित है। यह ऐसा मानचित्र है जिसे आप आँखों से नहीं — हृदय और श्रद्धा से पढ़ते हैं। ● सनातन भारत का यात्रा-मानचित्र :--- इस चित्रपट को हम सही अर्थों में "सनातन भारत का विंटेज ट्रैवेल मैप" कह सकते हैं। जब ट्रेनें नहीं थीं, जब न मोबाइल था न गूगल मैप — तब श्रद्धालु अपने संकल्प पत्र पर इस प्रकार के तीर्थ-चित्र बनवाकर यात्रा पर निकलते थे। यह चित्र भारत के तीर्थों की धार्मिक ज्यामिति (sacred geography) को भी उद्घाटित करता है — कैसे हर घाट, हर मूर्ति, हर देवालय, एक तांत्रिक अथवा पौराणिक विन्यास में स्थित है। ❖ काशी के विषय में कहा भी गया है :--- "गृहाणि च काशीस्थलानि सर्वे गंगाजलैः प्रोक्षणतोऽपि पुण्याः। न देवता न ऋषयः पुनन्ति काशीं पुनाति क्षणमात्रदृष्ट्या॥" (काशी के प्रत्येक घर गंगाजल से भी अधिक पवित्र हैं; देवता भी जिसे नहीं पवित्र कर पाते, काशी उसकी केवल एक दृष्टि से ही शुद्धि कर देती है।) ◉ यह चित्र कहता है — यह चित्र हमें पुकारकर कहता है — "हे मनुष्य! भौतिक प्रगति की अंधी दौड़ में तुमने जिन सनातन धरोहरों को भुला दिया है, वे आज भी जीवित हैं, प्रतीक्षारत हैं — जैसे काशी प्रतीक्षारत है अपने मूल स्वभाव के पुनः जागरण की।" 《 काशी एक नगर नहीं, एक चेतना है। यह चित्र उस चेतना का अंकन है। 》 🙏🏻 हर हर महादेव 🔱 #काशी
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