#श्री गणेशाय नमः #शुभ बुधवार
एकदन्तं महाकायं लम्बोदरं गजाननम् ।
विध्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम् ॥१३॥
[ ब्रह्मवैवर्त पुराण, गणपतिखण्ड १३.१६ ]
अर्थात 👉🏻 एक दाँत वाले , विशाल शरीर वाले , लम्बे उदर वाले , हाथी के मुख वाले , विघ्नों का नाश करने वाले , हेरम्ब नामक देव को मैं प्रणाम करता हूँ ॥१३॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥२७॥
[ नारद पुराण, उत्तरार्ध ११९.२७ ]
अर्थात 👉🏻 हाथी के मुख वाले , भूत-गणों से सेवित , कैथ एवं जामुन के फल खाने वाले , पार्वती पुत्र , शोक का नाश करने वाले , विघ्नेश्वर के चरण-कमलों को मैं नमस्कार करता हूँ ॥२७॥
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः ॥१३॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः ।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ॥१४॥
[ गणेश पुराण , उपासना खण्ड ४६.१३-१४ ]
अर्थात 👉🏻 सुमुख , एकदन्त , कपिल , गजकर्णक , लम्बोदर , विकट , विघ्ननाशक , विनायक , धूम्रकेतु , गणाध्यक्ष , भालचन्द्र , गजानन – इन बारह नामों को जो पढ़ता या सुनता भी है , उसके सभी कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते हैं ॥१३-१४॥
नमो व्रातपतये नमो गणपतये नमः प्रमथपतये ।
नमस्तेऽस्तु लम्बोदरायैकदन्ताय विघ्ननाशिने शिवसुताय ॥७॥
[ गणपति अथर्वशीर्ष उपनिषद्, मंत्र ७ ]
अर्थात 👉🏻 व्रातों के पति को नमस्कार , गणपति को नमस्कार , प्रमथों के पति को नमस्कार । लम्बोदर , एकदन्त , विघ्ननाशक , शिवपुत्र आपको नमस्कार है ॥७॥
छवि स्वर्ण वस्त्रधारी , चतुर्भुज , वरद-अभय मुद्रा में विघ्नहर्ता । नीचे विघ्नहर्ता लिखा हुआ है – ॐ ऊपर , स्वस्तिक मध्य में , श्रीहरि: साथ में – ये गाणपत्य तथा वैष्णव एकता का प्रतीक है । हरि-हर में भेद नहीं है ।
समस्त का आज का दिवस विघ्नहर्ता की कृपा से निर्विघ्न व्यतीत हो ।
🌄🌄 *गणेश वंदन* 🌄🌄


