sn vyas
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#🌺श्रीहरि विष्णु🌺🙏 यह चित्र भगवान विष्णु के 10वें और अंतिम अवतार भगवान कल्कि का है। सनातन धर्म के पुराणों (विशेषकर कल्कि पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण) में इनके अवतार की एक बेहद खास और रोमांचक कहानी बताई गई है।भगवान कल्कि से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथा इस प्रकार है:1. अवतार का उद्देश्य (कलियुग का अंत)हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, जब कलियुग में पाप, अधर्म, अनाचार और अत्याचार अपने चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे, तब संसार से बुराई को मिटाने के लिए भगवान विष्णु धरती पर अवतरित होंगे。 इस चित्र में उन्हें पृथ्वी (ग्लोब) के ऊपर दिखाया गया है, जो यह दर्शाता है कि वे पूरी धरती को अधर्म और दुष्टों के आतंक से मुक्त कराने आ रहे हैं।2. जन्म और परिवार की कथाविकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कलियुग के अंत में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के पास स्थित शम्भल नामक ग्राम में एक महान ब्राह्मण विष्णुयश और उनकी पत्नी सुमति के घर भगवान कल्कि का जन्म होगा। वे बचपन से ही बेहद तेजस्वी और समस्त शास्त्रों के ज्ञाता होंगे।3. दिव्य अस्त्र और देवदत्त घोड़ाचित्र में आप भगवान कल्कि को एक सफेद घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार लिए देख सकते हैं। पुराणों के अनुसार:देवदत्त घोड़ा: शिवजी की तपस्या करने के बाद उन्हें 'देवदत्त' नाम का एक उड़ने वाला दिव्य सफेद घोड़ा प्राप्त होगा।दिव्य तलवार: उनके हाथ में चमकती हुई रत्नजड़ित तलवार (रत्नमारू या नंदक) होगी, जिससे निकलने वाला तेज दुष्टों का संहार करेगा।गुरु परशुराम: भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम, कल्कि जी के युद्ध कला के गुरु होंगे और उन्हें अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देंगे।4. कलि पुरुष से महायुद्ध और सतयुग की शुरुआतभगवान कल्कि कलयुग के राजा या पाप के प्रतीक 'कलि' (कलि पुरुष) और उसके वंशजों के साथ भयंकर युद्ध करेंगे। वे धरती से भ्रष्ट राजाओं, लुटेरों और अधर्मियों का समूल नाश करेंगे। उनके द्वारा दुष्टों के इस संहार के बाद धरती फिर से पवित्र हो जाएगी और यहीं से एक बार फिर सतयुग (स्वर्ण युग) की शुरुआत होगी, जहां धर्म और सत्य का राज होगा।चित्र में चारों तरफ उठती आग की लपटें पापियों के विनाश और कलयुग के प्रलयंकारी अंत को दर्शाती हैं, जिसके बाद संसार में फिर से शांति और धार्मिकता की स्थापना होगी।🙏🏻
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