Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
Jay shiree Krishna - Author on ShareChat
Jay shiree Krishna
650 views • 28 days ago
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #भगवत गीता
तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपः II: प्रवर्तन्त विधानोक्तः सततं ब्रह्मवादिनाम्। इसलिए वेदम्मन्त्रों का उच्चारण करने चाले श्रेष्ठ पुरुषों की शास्त्र विधि से नियत यज्ञ , दान और तपरूप क्रियाएँ सदा ऊँ इस परमात्मा किनाम कोउच्चरण करेहओर्भ எ& ||24|| व्याख्याः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण यह स्पष्ट करते हैं कि वेदों के अनुसार यज्ञ, दान, और तप को सभी क्रियाओं का आरंभ ऊँ केउच्चारण सेहोता हा यहाँ ऊँ कोपरमात्मा का प्रतीक माना गया हायह श्लक बताता हैकिजालोग ने विश्वुस खखतेहैचे अपने शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मवाद धमिक कृत्या कोइस दिव्य ध्वनिऊँ के साथ शुरू करत हैं। सभी धार्मिक कर्मकांडोंकी नीव है और ७२ का उच्चारण यह परमात्मा के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यज्ञ , दान और तॅप जैसे कर्मों को विधिपूर्वक सम्पन्न স্লিক্কক্ি अनिवार्य हाता ्है जिससच ७ का उच्चारण कर्म सफल और फलदायी बन सकें। यह श्लोक हमें यह भी सिखाता हैकि धामिक कृत्यों का उद्देश्य परमात्मा के साथ संपूर्ण एकता की प्राप्ति है। तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपः II: प्रवर्तन्त विधानोक्तः सततं ब्रह्मवादिनाम्। इसलिए वेदम्मन्त्रों का उच्चारण करने चाले श्रेष्ठ पुरुषों की शास्त्र विधि से नियत यज्ञ , दान और तपरूप क्रियाएँ सदा ऊँ इस परमात्मा किनाम कोउच्चरण करेहओर्भ எ& ||24|| व्याख्याः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण यह स्पष्ट करते हैं कि वेदों के अनुसार यज्ञ, दान, और तप को सभी क्रियाओं का आरंभ ऊँ केउच्चारण सेहोता हा यहाँ ऊँ कोपरमात्मा का प्रतीक माना गया हायह श्लक बताता हैकिजालोग ने विश्वुस खखतेहैचे अपने शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मवाद धमिक कृत्या कोइस दिव्य ध्वनिऊँ के साथ शुरू करत हैं। सभी धार्मिक कर्मकांडोंकी नीव है और ७२ का उच्चारण यह परमात्मा के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यज्ञ , दान और तॅप जैसे कर्मों को विधिपूर्वक सम्पन्न স্লিক্কক্ি अनिवार्य हाता ्है जिससच ७ का उच्चारण कर्म सफल और फलदायी बन सकें। यह श्लोक हमें यह भी सिखाता हैकि धामिक कृत्यों का उद्देश्य परमात्मा के साथ संपूर्ण एकता की प्राप्ति है।
7 likes
17 shares
Home
Explore
Wallet
Video