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#श्री राधा #श्री राधे सिंहासन ब्रजभूमि का, राधा के आधीन: ब्रजमंडल का जो सर्वोच्च साम्राज्य या सिंहासन है, उस पर पूरी तरह से केवल श्री राधा रानी का ही शासन है। वे ही ब्रज की वास्तविक स्वामिनी और सम्राज्ञी हैं। पूरी ब्रजभूमि उनकी इच्छा और कृपा से ही संचालित होती है। श्याम सिपाही बन खड़े, सेवा में लौ-लीन: भगवान श्री कृष्ण, जो स्वयं सृष्टि के पालनहार हैं, वे इस ब्रज साम्राज्य में राजा नहीं, बल्कि श्री राधा रानी के एक समर्पित 'सिपाही' (सेवक) की तरह हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं। वे पूरी तरह से उनके प्रेम के वशीभूत हैं और उनकी सेवा व प्रसन्नता में अत्यंत तल्लीन (लौ-लीन) रहते हैं। मुख्य संदेश यह पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि ब्रज रस में 'प्रेम' का स्थान 'ऐश्वर्य' से कहीं ऊंचा है। यहाँ भगवान अपनी सर्वशक्तिमानता को भूलकर केवल प्रेम के अधीन हो जाते हैं और राधा रानी के प्रति अपनी अनन्य भक्ति प्रकट करते हैं।
श्री राधा - जय जय श्री राधे सिंहासन  ब्रजभूमि का, राधा के आधीन। श्याम सिपाही बन खड़े, सेवा में लौ-लीन।। )170702 जय जय श्री राधे सिंहासन  ब्रजभूमि का, राधा के आधीन। श्याम सिपाही बन खड़े, सेवा में लौ-लीन।। )170702 - ShareChat