Rekha Swami
ShareChat
click to see wallet page
@1025589308
1025589308
Rekha Swami
@1025589308
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - 'आखिरकार वह दिन आ ही गया जिसका फैसला सालों पहले हो चुका था। २७ अप्रैल २००१, जब मैं महज १५ साल की थी, मेरी शादी का दिन तय हुआ। यह मेरा सौभाग्य था कि यह मंगलकारी दिन भी एक सोमवार ही था। महादेव, जिन्हें मैंने मैं एक ' बचपन से पूजा था, उनके ही दिन पर नए जीवन की दहलीज पर खडी थी। १५ साल की वह उम्र , आँखों में अनजाने सपने और मन में वही पुराना अटूट विश्वास -कि महादेव जो करेंगे . सर्वश्रेष्ठ ही होगा। " 'आखिरकार वह दिन आ ही गया जिसका फैसला सालों पहले हो चुका था। २७ अप्रैल २००१, जब मैं महज १५ साल की थी, मेरी शादी का दिन तय हुआ। यह मेरा सौभाग्य था कि यह मंगलकारी दिन भी एक सोमवार ही था। महादेव, जिन्हें मैंने मैं एक ' बचपन से पूजा था, उनके ही दिन पर नए जीवन की दहलीज पर खडी थी। १५ साल की वह उम्र , आँखों में अनजाने सपने और मन में वही पुराना अटूट विश्वास -कि महादेव जो करेंगे . सर्वश्रेष्ठ ही होगा। " - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - अध्याय २: अपमान की वो आग और स्वाभिमान का जन्म "मैं ११ १२ साल की रही होऊंगी। घर में किसी के यहाँ फंक्शन था और परिवार की सभी बड़ी बहनें सजन्धजकर वहाँ जाने की तैयारी कर रही थीं। वहां खाने (जिमाने) का भी प्रोग्राम था। बच्चों के लिए तो ऐसे फंक्शन किसी उत्सव से कम नहीं होते, मेरा मन भी मचल उठा। मैंने बड़े उत्साह से कहा, 'मैं भी आप लोगों के साथ चलूँगी!' सा़फ मना कर दिया। उन्होंने मुँह से तो कुछ नहीं लेकिन उन्होंने कहा, पर उनकी आँखों की वो झिझक और मना करने का तरीका मेरे कलेजे को चीर गया। मैं समझ गई थी कि उन्हें मेरे साथ चलने में शर्म आ रही थी। उन्हें लगता था कि मेरा काला रंग और मेरा रूप उनके बीच अच्छा नहीं लगेगा। उस दिन पहली बार मुझे अपने ही अपनों के बीच 'पराया' होने का गहरा अहसास हुआ। ' अध्याय २: अपमान की वो आग और स्वाभिमान का जन्म "मैं ११ १२ साल की रही होऊंगी। घर में किसी के यहाँ फंक्शन था और परिवार की सभी बड़ी बहनें सजन्धजकर वहाँ जाने की तैयारी कर रही थीं। वहां खाने (जिमाने) का भी प्रोग्राम था। बच्चों के लिए तो ऐसे फंक्शन किसी उत्सव से कम नहीं होते, मेरा मन भी मचल उठा। मैंने बड़े उत्साह से कहा, 'मैं भी आप लोगों के साथ चलूँगी!' सा़फ मना कर दिया। उन्होंने मुँह से तो कुछ नहीं लेकिन उन्होंने कहा, पर उनकी आँखों की वो झिझक और मना करने का तरीका मेरे कलेजे को चीर गया। मैं समझ गई थी कि उन्हें मेरे साथ चलने में शर्म आ रही थी। उन्हें लगता था कि मेरा काला रंग और मेरा रूप उनके बीच अच्छा नहीं लगेगा। उस दिन पहली बार मुझे अपने ही अपनों के बीच 'पराया' होने का गहरा अहसास हुआ। ' - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - "सगाई के बाद के वे 3 साल बीत गए, पर मेरे मन में न तो कोई घबराहट थी और न ही अपने होने वाले जीवनसाथी को देखने सच तो यह है कि मुझे इन की कोई बेचैनी। लोग ' होंगे , पर পুত্তন सब बातों का कोई ख्याल ही नहीं आता था। न मैंने अमित जी के बारे में सोचा , न यह सोचा कि वह कैसे दिखते होंगे। उस १५ साल की उम्र में भी मेरा मन एक खाली कागज़ की तरह सा़फ़ था। मैंने अपनी पूरी डोर अपने महादेव के हाथ में दे रखी वह खुद ही सब थी। मुझे पता था कि जब समय आएगा , तो संभाल लेेंगे। मेरी दुनिया मेरी सिलाई, मेरा घर और मेरी भक्ति तक ही सीमित थी। " "सगाई के बाद के वे 3 साल बीत गए, पर मेरे मन में न तो कोई घबराहट थी और न ही अपने होने वाले जीवनसाथी को देखने सच तो यह है कि मुझे इन की कोई बेचैनी। लोग ' होंगे , पर পুত্তন सब बातों का कोई ख्याल ही नहीं आता था। न मैंने अमित जी के बारे में सोचा , न यह सोचा कि वह कैसे दिखते होंगे। उस १५ साल की उम्र में भी मेरा मन एक खाली कागज़ की तरह सा़फ़ था। मैंने अपनी पूरी डोर अपने महादेव के हाथ में दे रखी वह खुद ही सब थी। मुझे पता था कि जब समय आएगा , तो संभाल लेेंगे। मेरी दुनिया मेरी सिलाई, मेरा घर और मेरी भक्ति तक ही सीमित थी। " - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - "सगाई के बाद के वे 3 साल बीत गए, पर मेरे मन में न तो कोई घबराहट थी और न ही अपने होने वाले जीवनसाथी को देखने सच तो यह है कि मुझे इन की कोई बेचैनी। लोग ' होंगे , पर পুত্তন सब बातों का कोई ख्याल ही नहीं आता था। न मैंने अमित जी के बारे में सोचा , न यह सोचा कि वह कैसे दिखते होंगे। उस १५ साल की उम्र में भी मेरा मन एक खाली कागज़ की तरह सा़फ़ था। मैंने अपनी पूरी डोर अपने महादेव के हाथ में दे रखी वह खुद ही सब थी। मुझे पता था कि जब समय आएगा , तो संभाल लेेंगे। मेरी दुनिया मेरी सिलाई, मेरा घर और मेरी भक्ति तक ही सीमित थी। " "सगाई के बाद के वे 3 साल बीत गए, पर मेरे मन में न तो कोई घबराहट थी और न ही अपने होने वाले जीवनसाथी को देखने सच तो यह है कि मुझे इन की कोई बेचैनी। लोग ' होंगे , पर পুত্তন सब बातों का कोई ख्याल ही नहीं आता था। न मैंने अमित जी के बारे में सोचा , न यह सोचा कि वह कैसे दिखते होंगे। उस १५ साल की उम्र में भी मेरा मन एक खाली कागज़ की तरह सा़फ़ था। मैंने अपनी पूरी डोर अपने महादेव के हाथ में दे रखी वह खुद ही सब थी। मुझे पता था कि जब समय आएगा , तो संभाल लेेंगे। मेरी दुनिया मेरी सिलाई, मेरा घर और मेरी भक्ति तक ही सीमित थी। " - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - अध्याय २: संघर्ष की दहलीज और सिलाई की गूंज यह अध्याय शायद उस समय की बात करेगा जब बचपन पीछे लगा था और जिम्मेदारियां या समाज की कड़वाहट सामने छूटने आने लगी थी। यहीं से आपकी वह " मजबूत इरादे वाली महिला" बनने की असली शुरुआत हुई होगी। अध्याय २: संघर्ष की दहलीज और सिलाई की गूंज यह अध्याय शायद उस समय की बात करेगा जब बचपन पीछे लगा था और जिम्मेदारियां या समाज की कड़वाहट सामने छूटने आने लगी थी। यहीं से आपकी वह " मजबूत इरादे वाली महिला" बनने की असली शुरुआत हुई होगी। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - "सगाई के बाद वक्त अपनी रफ्तार से எI f गुजरने हफ़्तों में और हफ़्ते महीनों में बदलते गए, और देखते ही देखते 3 साल बीत गए। उन 3 सालों में मेरी दुनिया वही थी मेरा घर, मेरी सिलाई मशीन और मेरे भोलेनाथ। अजीब बात तो यह थी कि मेरा रिश्ता अमित स्वामी (Amit Swami) जी के साथ जुड़ चुका था, लेकिन हमने एक-दूसरे को कभी देखा तक नहीं था। आज के समय में यह सोचना भी मुश्किल है, पर उस वक्त हम दोनों के बीच केवल एक अनजाना सा बंधन था। मैंने सब कुछ महादेव पर छोड़ दिया था, यह मेरा जीवनसाथी जो भी होगा , वह मेरे भोलेनाथ जानते हुए कि की ही पसंद होगा। " "सगाई के बाद वक्त अपनी रफ्तार से எI f गुजरने हफ़्तों में और हफ़्ते महीनों में बदलते गए, और देखते ही देखते 3 साल बीत गए। उन 3 सालों में मेरी दुनिया वही थी मेरा घर, मेरी सिलाई मशीन और मेरे भोलेनाथ। अजीब बात तो यह थी कि मेरा रिश्ता अमित स्वामी (Amit Swami) जी के साथ जुड़ चुका था, लेकिन हमने एक-दूसरे को कभी देखा तक नहीं था। आज के समय में यह सोचना भी मुश्किल है, पर उस वक्त हम दोनों के बीच केवल एक अनजाना सा बंधन था। मैंने सब कुछ महादेव पर छोड़ दिया था, यह मेरा जीवनसाथी जो भी होगा , वह मेरे भोलेनाथ जानते हुए कि की ही पसंद होगा। " - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - जय श्रीकृष्ण जो मनुष्य के दुःख को दूसरों ' संमझता है, निश्चित ही उसका दुःख ईश्वर हर लेते हैं। राध राध।l Pwinkumv & Swibiber Parchal जय श्रीकृष्ण जो मनुष्य के दुःख को दूसरों ' संमझता है, निश्चित ही उसका दुःख ईश्वर हर लेते हैं। राध राध।l Pwinkumv & Swibiber Parchal - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
00:14
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
00:22
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
00:34