2122 1212 22
बिन तेरे पास अब बचा क्या है
अंधेरो के सिवा रहा क्या है
खो दिया तुझे खो के सब मैंने
ज़िन्दगी में रहा मजा क्या है
घुट रही साँसे धीरे धीरे अब
मौत के सिवा रास्ता क्या है
लुट गई खुशियां सभी मेरी
कह रहे हो तेरा मिटा क्या है
उड़ गये रंग ज़िन्द के सारे
ओ बड़ी इससे बद्दुआ क्या है
ना दवा में असर न दुआ में
रब ने भी मेरा सुना क्या है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
16/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
212 212 212
राह कोई दिखा ज़िन्दगी
कुछ तरस हमपे खा ज़िन्दगी
खो दिया आँख का तारा भी
और ना अब रुला ज़िन्दगी
गाज दिल पर गिरी है अभी
शूल ना ओ चुभा ज़िन्दगी
घुट रही साँसे तन्हाई में
और ना आजमा ज़िन्दगी
अंधेरो में जियूँ कब तलक
कोई दे मशवरा ज़िन्दगी
और तो पास कुछ ना बचा
मौत से ही मिला ज़िन्दगी
ले डूबेगा मेरा गम मुझे
कर दवा या दुआ ज़िन्दगी
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
12/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
122 122 122 122
जरा देख आँखों मे पानी है अपनी
दिले दर्द की भी कहानी है अपनी
रूठा ही रहा वक़्त हम से हमेशा
जली उस से ही ज़िन्दगानी है अपनी
उतरता है जो दिल मे चुप चाप मेरे
लुटाई उसी पर जवानी है अपनी
बे बस छोड़ वापस चला तो गया तू
ये जाँ अब तुझी पर लुटानी है अपनी
कलम भी मेरी रो पड़ी आज देखो
ग़ज़ल जो लिखी वो सुनानी है अपनी
खयालो में जिसकेफकत खोये है हम
यही बात उस को बतानी है अपनी
लिखे जाएंगे फिर से अफसाने अपने
कहानी जो सब से छुपानी है अपनी
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
221 2121 1221 212
ज़िन्दा वजूद तो है मगर राहत नहीं रही
तेरे बगैर जीने की चाहत नहीं रही
बिस्तर कि सिलवटे दे रही दास्ताने ये
नींदों कि रात में अब शिरकत नहीं रही
कर ले अंदाजे गुफ्तगू मीठेे तु जितने भी
लहजा बता रहा है मुहब्बत नहीं रही
कुछ बंदिशे थी तेरे मुहब्बत में जाने जां
अब जुल्फ की तेरे वो नेमत नहीं रही
खोये से रहते थे तेरे खाबो ख़याल में
उन ख्वाबो में जीने की आदत नहीं रही
ताउम्र को निभाने कि कस्मे जो खाई थी
उन्हें निभाने की अब जरूरत नहीं रही
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
13/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
1212 1122 1212 22/112
रहे कहीं भी तु तुझपे ही ध्यान रहता है
तु दिल मे मेरे मेरी बन के जान रहता है
तेरे कदम के निशाँ मेरे दिलपे कायम है
यहाँ पे बन के तू मेरा गुमान रहता है
छुपी है आहें तबस्सुम में हिज्र की तेरे
तड़फता है दिल मगर बेजुबान रहता है
रहा जो सर पे तेरे साये की तरह हरदम
झुका हुआ वो अब आसमान रहता है
करूं में कैसे यकीं , छोड़ कर गया है तू
बसा है रूह में मेरी ये भान रहता है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
12/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
1212 2122 1212 212
बसा है जो रूह में , कैसे में भुलाऊं उसे
ग़ज़ल बहाना करूँ , और गुनगुनाऊँ उसे
महक रहा फूल के खुशबू जैसे घर जिससेये
लगा के मैं जिस्म ओ जान में समाऊँ उसे
उजड़ चुका है मेरा आशियाँ बहारो में जो
बहारें फिर वो बुलाकर कैसे सजाऊँ उसे
रहा कदम दर कदम साथ सदा जो मेरे
कहाँ से अब में ढूँढ़ कर यहाँ में लाऊं उसे
न जाने किसकी नज़र लग गई खुशी को मेरे
बताये कोई मुझे अब में कैसे पाऊँ उसे
उदास दिन , रातें वीरान है मेरी अब यहाँ
घड़ी घड़ी दे के आवाज में बुलाऊँ उसे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 2122 2122
देख के उनको ज़ख्मे दिल गहरा हुआ है
दर्द दिल का मेरे अब दुहरा हुआ है
मायूसी चहरे पे छाई उनके भी थी
दर्द दिल में उनके भी ठहरा हुआ है
कब तलक छुपाते उनसे दर्द दिल का
साँच पर कब आज तक पहरा हुआ है
कौन कहता चाँद तारे तोड़ लाना
चाँदनी पर भी लगा पहरा हुआ है
मौत के आगोश में सो जाने दो अब
बाद मुद्दत के सुकूँ मिलना हुआ है
मत दिखा सपने सुहाने मोहब्बत के
बे वफ़ा का पहले भी मोहरा हुआ है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2212 2212 2212
कैसे निकालूँ दिल से उल्फत में भला
कैसे करूँ खुद से खिलाफत में भला
कोई समझ पाया न मेरा दर्दे दिल
किससे करूँ शिक्वा शिकायत में भला
रौशन है जिससे ये चिरागे दिल मेरा
कैसे करूँ उस से बगावत में भला
करता है हर मुराद जो पूरी मेरी
क्योँ ना करूँ उसकी इबादत में भला
जिस बागबाँ से खुशियाँ हमको मिली
क्योँ छोड़दूँ उसकीही खिदमत में भला
दिल मे भरी है मोहब्बत कितनी मेरे
कैसे दिखाऊँ उनको चाहत में भला
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
28/9/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
221 2121 1221 212
तेरी ही धुन में आज कलंदर उदास है
बिन तेरे ज़िन्दगी का मुकद्दर उदास है
फिर से बिखर न जायें ये मोती निगाह से
ये सोच सोच कर ही समंदर उदास है
मैलों के शोर में भी खामोशी छाई है
देखूँ जिधर उधर के ही मंजर उदास है
हर कौने में बसी है तेरे प्यार की महक
इक तेरे ही कमी से मेरा दर उदास है
जो सेज थी सजाई यहाँ मिलके हमने वो
तन्हाई देख कर मेरी बिस्तर उदास है
पूछो न हाले दिल गमे तन्हाई का मेरी
खुश था दुआ से जो ये सिकंदर उदास है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
19/11/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
212 212 212 212
जीस्त जिनके लिये आज कुर्बान है
है मिली उनसे ही मुझे पहचान है
सिलसिले प्यार के ख़त्म ना हो कभी
दिल में बस इक यही मेरे अरमान है
घर बनाने में गुजर गयी उम्र जब
किस लिये ज़िन्दगी आज हैरान है
दर्द कागज पे बिकता रहा उम्र भर
बस वही दर्द से मेरे अनजान है
गम करे क्यों अगर वो हमें ना मिले
दिल में तो मेरे अब भी मेहमान है
वक्त - ऐ - मौत तक साथ हो ये इमां
ज़िन्दगी की मेरी जो सदा शान है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
9/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह













