!होली के इस पावन अवसर पर आप सबको होली कि हार्दिक शुभकामनाये!
आई होली, आई होली।
रंग-बिरंगी आई होली।
मुन्नी आओ, चुन्नी आओ,
रंग भरी पिचकारी लाओ,
मिल-जुल कर खेलेंगे होली।
रंग-बिरंगी आई होली।।
मठरी खाओ, गुंझिया खाओ,
पीला-लाल गुलाल उड़ाओ,
मस्ती लेकर आई होली।
रंग-बिरंगी आई होली।।
रंगों की बौछार कहीं है,
ठण्डे जल की धार कहीं है,
भीग रही टोली की टोली।
रंग-बिरंगी आई होली।।
परसों विद्यालय जाना है,
होम-वर्क भी जंचवाना है,
मेहनत से पढ़ना हमजोली।
रंग-बिरंगी आई होली!!
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!मजबूरिया!
तुम्हारे बिना बढ़ जाती है
जिंदगी में लाखों मजबूरियां,
खुद से ज्यादा प्यार करते हैं तुम्हें
मत रखो हम से ज्यादा दूरियां!
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!तेरी कमी होगी!
जुबान खामोश और आँखों में नमी होगी,
यही बस मेरी दास्तान ए ज़िंदगी होगी,
भरने को तो हर ज़ख्म भर जायेगा लेकिन,
कैसे भरेगी वो जगह जहाँ तेरी कमी होगी!
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!निदान हू इस लिये चुप हू!
ज़िन्दगी है नादान इसलिए चुप हूँ,
दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ,
कह दूँ ज़माने से दास्तान अपनी,
उसमें आएगा तेरा नाम इसलिए चुप हूँ!लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!मेरी हर साँस तेरी नाम लिखी हो जैसे!
कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे
तू ने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाक़ी है मगर साँस रुकी हो जैसे
हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
मुझ से कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे
राह चलते हुए अक्सर ये गुमाँ होता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे
एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफ़र
ज़िंदगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे
इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मैं
मेरी हर साँस तिरे नाम लिखी हो जैसे
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!!दर्द का सिलसिला रह जायेगा!!
तू नहीं तो ज़िन्दगी में और क्या रह जायेगा
दूर तक तन्हाइयों का सिलसिला रह जायेगा
दर्द की सरी तहें और सारे गुज़रे हादसे
सब धुआँ हो जायेंगे एक वाक़िया रह जायेगा
यूं भी होगा वो मुझे दिल से भुला देगा मगर
ये भी होगा खुद उसी में एक खला रह जायेगा
दायरे इन्कार के इकरार की सरगोशियाँ
ये अगर टूटे कभी तो फ़ासला रह जायेगा!
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!!सुबह होती नहीं!!
ये किन किनारों पर
रूकी है नींद मेरी,
इस सिरे तक पहुंचती नही !
बड़ी लम्बी हो रहीं हैं रातें,
क्यों पलक झपकते ही
सुबहें होती नहीं !
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
!!मुझे आजमाया है!!
किसकी शिकायत करूँ मैं दुनिया से
दुनिया वालों ने मुझे आजमाया है
मैं तो भटका हुआ मुसाफिर हूँ
चल दूँगा पल दो पल में दुनिया से
मुझे जिंदगी की इस भटकन ने बड़ा सताया है
मेरा दर्द कोई और नही ये मेरा खुद का साया है!
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺













