
श्रवणगिरि गोस्वामी मालकोसनी
@1744062595
पधारो सा! 2 करोड़ लोगां क परिवार म थांको बहुत बहुत
*अगर आपके शरीर के किसी भी अंग का स्पर्श अग्नि से हो जाये तो आपको कितनी पीड़ा होती है?*
*तो फिर विचार कीजिये...*
*ईर्ष्या, राग और द्वेष की अग्नि... जिसे आप जीवन भर अपने हृदय में लेकर जीते हैं,वो अन्दर ही अन्दर आपके ह्रदय को कितनी पीड़ा देती होगी।*
*अतः ईर्ष्या, राग और द्वेष को हमेशा स्वयं से दूर रखें।*
*ओम् नमो नारायण*🙏🙏
*आज का दिन मंगलमय हो।* #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
🕉️ शिवरात्रि का अर्थ क्या है ? 🌿
पुराणों में, वेदों में और शास्त्रों में भगवान शिव-महाकाल के महात्म्य को प्रतिपादित किया गया है। भगवान शिव हिन्दू संस्कृति के प्रणेता आदिदेव महादेव हैं। हमारी सांस्कृतिक मान्यता के अनुसार 33 कोटि देवताओं में 'शिरोमणि' देव शिव ही हैं। सृष्टि के तीनों लोकों में भगवान शिव एक अलग, अलौकिक शक्ति वाले देव हैं।
भगवान_शिव पृथ्वी पर अपने निराकार-साकार रूप में निवास कर रहे हैं। भगवान शिव सर्वव्यापक एवं सर्वशक्तिमान हैं। महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिवशंकर के प्रदोष तांडव नृत्य का महापर्व है। शिव प्रलय के पालनहार हैं और प्रलय के गर्भ में ही प्राणी का अंतिम कल्याण सन्निहित है। शिव शब्द का अर्थ है 'कल्याण' और 'रा' दानार्थक धातु से रात्रि शब्द बना है, तात्पर्य यह कि जो सुख प्रदान करती है, वह रात्रि है।
'शिवस्य प्रिया रात्रियस्मिन व्रते अंगत्वेन विहिता तदव्रतं शिवरात्र्याख्याम्।'
इस प्रकार शिवरात्रि का अर्थ होता है, वह रात्रि जो आनंद प्रदायिनी है और जिसका शिव के साथ विशेष संबंध है। शिवरात्रि, जो फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को है, उसमें शिव पूजा, उपवास और रात्रि जागरण का प्रावधान है। इस महारात्रि को शिव की पूजा करना सचमुच एक महाव्रत है।
ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति महाशिवरात्रि के व्रत पर भगवान शिव की भक्ति, दर्शन, पूजा, उपवास एवं व्रत नहीं रखता, वह सांसारिक माया, मोह एवं आवागमन के बंधन से हजारों वर्षों तक उलझा रहता है। यह भी कहा गया है कि जो शिवरात्रि पर जागरण करता है, उपवास रखता है और कहीं भी किसी भी शिवजी के मंदिर में जाकर भगवान शिवलिंग के दर्शन करता है, वह जन्म-मरण पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति पा जाता है।
शिवरात्रि के व्रत के बारे में पुराणों में कहा गया है कि इसका फल कभी किसी हालत में भी निरर्थक नहीं जाता है।
शिवरात्रि का व्रत सबसे अधिक बलवान है। भोग और मोक्ष का फलदाता शिवरात्रि का व्रत है। इस व्रत को छोड़कर दूसरा मनुष्यों के लिए हितकारक व्रत नहीं है। यह व्रत सबके लिए धर्म का उत्तम साधन है। निष्काम अथवा सकाम भाव रखने वाले सांसारिक सभी मनुष्य, वर्णों, आश्रमों, स्त्रियों, पुरुषों, बालक-बालिकाओं तथा देवता आदि सभी देहधारियों के लिए शिवरात्रि का यह श्रेष्ठ व्रत हितकारक है।
शिवरात्रि के दिन प्रातः उठकर स्नानादि कर शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का विधिवत पूजन कर नमन करें। रात्रि जागरण महाशिवरात्रि व्रत में विशेष फलदायी है।
गीता में इसे स्पष्ट किया गया है-
या निशा सर्वभूतानां तस्या जागर्ति संयमी।
यस्यां जागृति भूतानि सा निशा पश्चतो सुनेः॥
- तात्पर्य यह कि विषयासक्त सांसारिक लोगों की जो रात्रि है, उसमें संयमी लोग ही जागृत अवस्था में रहते हैं और जहां शिव पूजा का अर्थ पुष्प, चंदन एवं बिल्वपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित कर भगवान शिव का जप व ध्यान करना और चित्त वृत्ति का निरोध कर जीवात्मा का परमात्मा शिव के साथ एकाकार होना ही वास्तविक पूजा है।
शिवरात्रि में चार प्रहरों में चार बार अलग-अलग विधि से पूजा का प्रावधान है। महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में भगवान शिव की ईशान मूर्ति को दुग्ध द्वारा स्नान कराएं, दूसरे प्रहर में उनकी अघोर मूर्ति को दही से स्नान करवाएं और तीसरे प्रहर में घी से स्नान कराएं व चौथे प्रहर में उनकी सद्योजात मूर्ति को मधु द्वारा स्नान करवाएं। इससे भगवान आशुतोष अतिप्रसन्न होते हैं।
प्रातःकाल विसर्जन और व्रत की महिमा का श्रवण कर अमावस्या को निम्न प्रार्थना कर पारण करें -
संसार क्लेश दग्धस्य व्रतेनानेन शंकर।
प्रसीद समुखोनाथ, ज्ञान दृष्टि प्रदोभव॥
- तात्पर्य यह कि भगवान शंकर! मैं हर रोज संसार की यातना से, दुखों से दग्ध हो रहा हूं। इस व्रत से आप मुझ पर प्रसन्न हों और प्रभु संतुष्ट होकर मुझे ज्ञानदृष्टि प्रदान करें।
'ॐ नमः शिवाय' कहिए और देवादिदेव प्रसन्न होकर सब मनोरथ पूर्ण करेंगे। शिवरात्रि के दिन शिव को ताम्रफल (बादाम), कमल पुष्प, अफीम बीज और धतूरे का पुष्प चढ़ाना चाहिए एवं अभिषेक कर बिल्व पत्र चढ़ाना चाहिए।
।। हर हर महादेव ।।
।। ॐ नमः शिवाय ।।
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*राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली ।*
*ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥*
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ऐक दशनामी जब दुसरे दशनामी से मीलते हे तो
ॐ नमो नारायण मंत्र से अभीवादन करते हे, उसका अर्थ क्या है जानो,
नारायण खुद जीनको नमस्कार करते हैं उसको याद करना
ओम नमो नारायणाय #🌻 सकारात्मक सोच #📝भक्ति संदेश🙏 #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🏙 आपणो जोधपुर
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ईमानदारी एक बहुमूल्य उपहार है, घटिया लोगों से बिल्कुल भी इसकी अपेक्षा न करें !!
कभी-कभी लगता है कि ‘‘ईमानदारी’’ का अब कोई महत्व नहीं रह गया है, लेकिन ‘‘ईमानदारी’’ आज भी एक दुर्लभ गुण है।जो लोग ईमानदार होते हैं उनके साथ ईमानदार रहना चाहिए और जो लोग ईमानदार नहीं हैं उनके साथ भी ईमानदार रहना चाहिए, इसी तरह से ईमानदारी सिद्ध होती है !!
ॐ नमो नारायण।
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ओम् नमो नारायण.🔱..ॐ नमः शिवाय..🌿.💖🔱🕉🙏🙏🙏🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🕉🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🕉🌿🕉🌿🕉 जय भोलेनाथ 🔱🕉 #🏙 आपणो जोधपुर #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच #📝भक्ति संदेश🙏
ऐक दशनामी जब दुसरे दशनामी से मीलते हे तो
ॐ नमो नारायण मंत्र से अभीवादन करते हे, उसका अर्थ क्या है जानो,
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ओम नमो नारायण आप सभी का दिन सुभ व मंगलमय हो जय भोलेनाथ बाबा री 🚩🔱🙏🌹🔱 हर हर महादेव #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच #🏙 आपणो जोधपुर #📝भक्ति संदेश🙏
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