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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - से पैदा हुए, इस ख़ाक में मिल जाना है ख़ाक मुसाफ़िर हैं हम, और मौत ही ठिकाना है एक किस लिए इतना ग़ुरूर इस दौलत पर रजुल हाथ ख़ाली आए थे, और हाथ ख़ाली जाना है बाग़बाँ कलियाँ न तोड़ो , वक़्त की रफ़्तार देख फूल जो कल खिला था, आज उसे मुरझाना है नेकियों की रौशनी साथ अपने ले चल ऐ ' ज़ैद' कब इस अंधेरी क़ब्र ने किसे पहचाना है? ज़ुल्म की ताक़त पे मत इतरा यहाँ ऐ बे-ख़बर वक़्त का सूरज तो हर इक दिन ही ढल जाना हैं नाम रह जाएगा बस, यादें यहाँ रह जाएँगी मिट्टी का ये पुतला फिर मिट्टी में मिल जाना है से पैदा हुए, इस ख़ाक में मिल जाना है ख़ाक मुसाफ़िर हैं हम, और मौत ही ठिकाना है एक किस लिए इतना ग़ुरूर इस दौलत पर रजुल हाथ ख़ाली आए थे, और हाथ ख़ाली जाना है बाग़बाँ कलियाँ न तोड़ो , वक़्त की रफ़्तार देख फूल जो कल खिला था, आज उसे मुरझाना है नेकियों की रौशनी साथ अपने ले चल ऐ ' ज़ैद' कब इस अंधेरी क़ब्र ने किसे पहचाना है? ज़ुल्म की ताक़त पे मत इतरा यहाँ ऐ बे-ख़बर वक़्त का सूरज तो हर इक दिन ही ढल जाना हैं नाम रह जाएगा बस, यादें यहाँ रह जाएँगी मिट्टी का ये पुतला फिर मिट्टी में मिल जाना है - ShareChat
#😎मज़ेदार पोस्ट 🤩
😎मज़ेदार पोस्ट 🤩 - दिखावे की इबादत से भला क्या हासिल होगा, वही सजदा है सच्चा जो असर तक पहुँच जाए। उठाए हाथ दुनिया की नज़र के वास्ते क्यों हम, दुआ वो है जो ख़ालिक़ के नज़र तक पहुँच जाए। बना ले अपने दिल को तू ख़ुदा का घर ज़़रा बंदे , नज़र तेरी भी फिर शम्स-ओ॰क़मर तक पहुँच जाए। फ़क़त माथे पे सजदों के निशाँ होने से क्या होगा, इबादत वो है जो रूह-ओ-जिगर तक पहुँच जाए। तअल्लक़ तोड़ दे 'ज़ैद' इस जहाँ के झूठ से अपना, तेरी आवाज़ उस " अर्श-ए-बरीं" तक पहुच जाए। दिखावे की इबादत से भला क्या हासिल होगा, वही सजदा है सच्चा जो असर तक पहुँच जाए। उठाए हाथ दुनिया की नज़र के वास्ते क्यों हम, दुआ वो है जो ख़ालिक़ के नज़र तक पहुँच जाए। बना ले अपने दिल को तू ख़ुदा का घर ज़़रा बंदे , नज़र तेरी भी फिर शम्स-ओ॰क़मर तक पहुँच जाए। फ़क़त माथे पे सजदों के निशाँ होने से क्या होगा, इबादत वो है जो रूह-ओ-जिगर तक पहुँच जाए। तअल्लक़ तोड़ दे 'ज़ैद' इस जहाँ के झूठ से अपना, तेरी आवाज़ उस " अर्श-ए-बरीं" तक पहुच जाए। - ShareChat