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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - मौजूद हुजूम-ए-शहर तो था तमाशा देखने को, मगर किसी के हाथ न उठे उसे बचाने को। सैकड़ों आंखें थीं वहां, पर सब पथराई हुई थीं, के बुत बन गए सब, एक इंसान को बचाने को। पत्थर रहीं धड़कनें उसे, चिल्लाता रहा दिल, पुकारती ज़ालिम ज़माना खडा रहा बस तमाशा बनाने को। पर वो भीड़़, वो बेबसी और वो खामोश सिसकियां, कोई ज़िंदा न था वहां, ज़ैद को बचाने को? क्या मौजूद हुजूम-ए-शहर तो था तमाशा देखने को, मगर किसी के हाथ न उठे उसे बचाने को। सैकड़ों आंखें थीं वहां, पर सब पथराई हुई थीं, के बुत बन गए सब, एक इंसान को बचाने को। पत्थर रहीं धड़कनें उसे, चिल्लाता रहा दिल, पुकारती ज़ालिम ज़माना खडा रहा बस तमाशा बनाने को। पर वो भीड़़, वो बेबसी और वो खामोश सिसकियां, कोई ज़िंदा न था वहां, ज़ैद को बचाने को? क्या - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - चुप रहा मैं उसकी नादानी पर, मुस्कुराया उसकी हैरानी पर। वो समझता रहा कि जीत गया, हार बैठा वो अपनी ला-फ़ानी पर। मैंने लफ़्ज़ों को ख़र्च ही न किया, रहम आता था उसकी नादानी पर। ज़ैद , दुनिया ये क्या समझेगी भला, है रूह-ए-इन्सानी पर। गुज़रती I एक ज़रा ग़फ़लत हुई और पीठ में खंजर लगा.. आज हम को दोस्तों की दोस्ती से डर लगा. ا LessLesH चुप रहा मैं उसकी नादानी पर, मुस्कुराया उसकी हैरानी पर। वो समझता रहा कि जीत गया, हार बैठा वो अपनी ला-फ़ानी पर। मैंने लफ़्ज़ों को ख़र्च ही न किया, रहम आता था उसकी नादानी पर। ज़ैद , दुनिया ये क्या समझेगी भला, है रूह-ए-इन्सानी पर। गुज़रती I एक ज़रा ग़फ़लत हुई और पीठ में खंजर लगा.. आज हम को दोस्तों की दोस्ती से डर लगा. ا LessLesH - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - से पैदा हुए, इस ख़ाक में मिल जाना है ख़ाक मुसाफ़िर हैं हम, और मौत ही ठिकाना है एक किस लिए इतना ग़ुरूर इस दौलत पर रजुल हाथ ख़ाली आए थे, और हाथ ख़ाली जाना है बाग़बाँ कलियाँ न तोड़ो , वक़्त की रफ़्तार देख फूल जो कल खिला था, आज उसे मुरझाना है नेकियों की रौशनी साथ अपने ले चल ऐ ' ज़ैद' कब इस अंधेरी क़ब्र ने किसे पहचाना है? ज़ुल्म की ताक़त पे मत इतरा यहाँ ऐ बे-ख़बर वक़्त का सूरज तो हर इक दिन ही ढल जाना हैं नाम रह जाएगा बस, यादें यहाँ रह जाएँगी मिट्टी का ये पुतला फिर मिट्टी में मिल जाना है से पैदा हुए, इस ख़ाक में मिल जाना है ख़ाक मुसाफ़िर हैं हम, और मौत ही ठिकाना है एक किस लिए इतना ग़ुरूर इस दौलत पर रजुल हाथ ख़ाली आए थे, और हाथ ख़ाली जाना है बाग़बाँ कलियाँ न तोड़ो , वक़्त की रफ़्तार देख फूल जो कल खिला था, आज उसे मुरझाना है नेकियों की रौशनी साथ अपने ले चल ऐ ' ज़ैद' कब इस अंधेरी क़ब्र ने किसे पहचाना है? ज़ुल्म की ताक़त पे मत इतरा यहाँ ऐ बे-ख़बर वक़्त का सूरज तो हर इक दिन ही ढल जाना हैं नाम रह जाएगा बस, यादें यहाँ रह जाएँगी मिट्टी का ये पुतला फिर मिट्टी में मिल जाना है - ShareChat
#😎मज़ेदार पोस्ट 🤩
😎मज़ेदार पोस्ट 🤩 - दिखावे की इबादत से भला क्या हासिल होगा, वही सजदा है सच्चा जो असर तक पहुँच जाए। उठाए हाथ दुनिया की नज़र के वास्ते क्यों हम, दुआ वो है जो ख़ालिक़ के नज़र तक पहुँच जाए। बना ले अपने दिल को तू ख़ुदा का घर ज़़रा बंदे , नज़र तेरी भी फिर शम्स-ओ॰क़मर तक पहुँच जाए। फ़क़त माथे पे सजदों के निशाँ होने से क्या होगा, इबादत वो है जो रूह-ओ-जिगर तक पहुँच जाए। तअल्लक़ तोड़ दे 'ज़ैद' इस जहाँ के झूठ से अपना, तेरी आवाज़ उस " अर्श-ए-बरीं" तक पहुच जाए। दिखावे की इबादत से भला क्या हासिल होगा, वही सजदा है सच्चा जो असर तक पहुँच जाए। उठाए हाथ दुनिया की नज़र के वास्ते क्यों हम, दुआ वो है जो ख़ालिक़ के नज़र तक पहुँच जाए। बना ले अपने दिल को तू ख़ुदा का घर ज़़रा बंदे , नज़र तेरी भी फिर शम्स-ओ॰क़मर तक पहुँच जाए। फ़क़त माथे पे सजदों के निशाँ होने से क्या होगा, इबादत वो है जो रूह-ओ-जिगर तक पहुँच जाए। तअल्लक़ तोड़ दे 'ज़ैद' इस जहाँ के झूठ से अपना, तेरी आवाज़ उस " अर्श-ए-बरीं" तक पहुच जाए। - ShareChat